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अफ्रीकन स्वाइन फ्लू ने किए सूअरपालकों के बाड़े खाली, मौत का सिलसिला जारी

Fri, 26 Aug 2022 12:03 AM IST
Rohtak Bureau रोहतक ब्यूरो
Updated Fri, 26 Aug 2022 12:03 AM IST
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African swine flu emptied pig farms, death row continues
राजीव गांधी स्टेडियम के पास घूमते सूअर। अमर उजाला
सूअरों के लिए मौत बनकर आए अफ्रीकन स्वाइन फ्लू ने कलानौर और रोहतक के सूअर पालकों के बाड़ों को लगभग खाली कर दिया है। सूअरों की मौत का सिलसिला अभी भी जारी है। कलानौर, रोहतक शहर व आसपास के गांव इससे बुरी तरह प्रभावित हैं। स्थिति यह है कि इनके मांस की बिक्री पर रोक लग गई है। नगर निगम रोहतक व नगरपालिका कलानौर की टीम लगातार मृत सूअरों को दफना रही हैं। वीरवार को शाम तक 56 मृत सूअरों को दफनाया जा चुका है।
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पीजीआईएमएस में कोवैक्सीन रिसर्च टीम के सदस्य एवं कम्यूनिटी मेडिसिन विभाग के सीनियर प्रोफेसर डॉ. रमेश वर्मा ने बताया कि बीमार सूअरों को छिपाना गलत है। यह अन्य स्वस्थ सूअरों की मौत का कारण बनेंगे। पशुपालन विभाग को बीमार सूअरों की पहचान कर स्वयं मारकर दफन करवा देना चाहिए। अफ्रीकन स्वाइन फ्लू 1921 में पहली बार केन्या में मिला था। वहां से यह 24 देशों में फैला और सभी सूअरों को इसने लगभग मार दिया। फरवरी 2020 में यह देश में मिला। इससे असम में लगभग 40 हजार सूअरों की मौत हुई। यह पूर्वोत्तर में 22 जिलों में फैला और लगभग सूअरों के बाड़ों को खाली कर दिया। गनीमत यह रही कि सूअरों से मनुष्यों में इसके वायरस का ट्रांसमिशन नहीं हुआ। लेकिन अंदेशा रहता है कि सूअरों के अन्य संक्रमण भी मनुष्य को प्रभावित कर सकते हैं। मई 2022 में इससे बचाव की वैक्सीन आई, लेकिन यह किसे लगी है और किसे नहीं लगी है कहा नहीं जा सकता। यह बात तो सूअर पालकों को ही पता होनी चाहिए।
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95 से 100 प्रतिशत मौत निश्चित
डॉ. वर्मा ने बताया कि अफ्रीकन स्वाइन फ्लू सूअरों की नस को तोड़ देता है। एक बार संक्रमित होने के बाद 95 से 100 प्रतिशत सूअर की मौत निश्चित है। इससे तेज बुखार होता है और खून की नशें फट जाती हैं। इसलिए इनको मारना और दफन करना जरूरी होता है। अप्रैल में मिजोरम, सिक्कम, आसाम व अगस्त में केरल में इसका कहर रहा है। अब इसकी वैक्सीन आ गई है। विदेशों में यह पहले से ही है। इसके संक्रमण को रोकने के लिए जरूरी है कि इसके ट्रांसमिशन पर रोक लगाई जाए। इसके बाजार को पूरी तरह बंद कर दिया जाए।
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लक्षणों की पहचान करें
तेज बुखार, स्किन पर लाल चकत्ते, अलसर, जोड़ों में सूजन, सांस लेने में समस्या, खून का जमना, खून की नशें फटना, भूख का कम लगना
नगर निगम ने शहर से उठाए 44 तो कलानौर में मिले 12 मृत सूअर
रोहतक और कलानौर में सूअरों की मौत का सिलसिला वीरवार को भी जारी रहा। वीरवार शाम तक 56 सूअरों के दफन करने की सूचना है। नगर निगम की टीम ने देर शाम तक शहर में 44 तो कलानौर में 12 सूअरों को दफनाया गया है।
यहां मृत सूअर मिले
सूर्य विहार कॉलोनी - 2
जींद बाईपास - 13
कन्हेली रोड - 8
एकता कॉलोनी -5
श्रीराम नगर - 5
भिवानी चुंगी -2
शास्त्री नगर -4
बालक नाथ कॉलोनी - 5
कलानौर - 12
कुल - 56
पशुपालन विभाग की टीमें संक्रमित क्षेत्रों में जगह-जगह निरीक्षण कर रही हैं। सूअर पालकों को अफ्रीकन स्वाइन फ्लू के संक्रमण की रोकथाम एवं नियंत्रण के लिए जागरूक किया जा रहा है। एडीसी की अध्यक्षता में वीरवार को मीटिंग की गई है। पशुपालन विभाग के सह निदेशक डॉ. बीएस रांगी ने भी रिव्यू किया है। -डॉ. सूर्या खटकड़, उप निदेशक, पशुपालन व डेयरी विभाग

मृत पशुओं के निपटान के लिए करें फोन
उपायुक्त कैप्टन शक्ति सिंह ने नगरवासियों से मृत सूअरों के निपटान की कार्रवाई में सहयोग करने की अपील की है। उन्होंने कहा कि अगर किसी भी नागरिक को किसी भी स्थान पर कोई भी मृत सूअर व अन्य प्रकार के पशु मिलें तो इसकी सूचना तुरंत नगर निगम के सफाई निरीक्षक सुंदर सिंह के मोबाइल नंबर 82959-00940 तथा सफाई निरीक्षक हर्ष चावला के मोबाइल नंबर 82959-00941 पर दें, ताकि मृत पशुओं का जल्द निपटान किया जा सके।
बीमार सूअरों के लिए संपर्क करें
पशुपालन विभाग के उप निदेशक डॉ. सूर्या खटकड़- 9416836585
पशुपालक नोडल अधिकारी डॉ. वीरेंद्र सहरावत -99961-09410
टास्क फोर्स प्रभारी डॉ. संजीव फोगाट- 94161-58777
उपमंडलीय अधिकारी रोहतक 80594-35656
उपमंडलीय अधिकारी सांपला 98121-19377
उपमंडल अधिकारी महम 94161-59652
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