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Rohtak News: विशेष हाथों से निकला खास हुनर
Sat, 22 Aug 2026 07:09 PM IST
रोहतक ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, रोहतक
संवाद न्यूज एजेंसी, रोहतक
Updated Sat, 22 Aug 2026 07:09 PM IST
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01- चिराग
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संवाद न्यूज एजेंसी
रोहतक। मेज पर बिखरे रंग-बिरंगे धागे, छोटे-छोटे मोती और सजावटी सामान...सामने बैठे बच्चों के हाथ धीरे-धीरे इन्हें एक आकार दे रहे हैं। कोई धागे में मोती पिरो रहा है तो कोई डिजाइन तैयार कर रहा है। काम की रफ्तार भले धीमी हो लेकिन हर बार जब एक राखी तैयार होती है, चेहरे पर दिखाई देने वाली खुशी कुछ कहती है। इन हाथों ने सिर्फ राखियां नहीं बनाईं बल्कि अपने हुनर और आत्मविश्वास को आकार दिया है।
रोहतक के राज्य पुनर्वास प्रशिक्षण और अनुसंधान संस्थान (सितार) में इस बार विशेष बच्चों ने करीब 1000 हैंडमेड राखियां तैयार की हैं। खास बात यह है कि बच्चों ने बाजार से तैयार राखियां नहीं खरीदीं बल्कि धागे, मोती और अन्य सामग्री से पूरी राखी खुद तैयार करना सीखा। डिजाइन से लेकर मोती पिरोने, गांठ लगाने, फिनिशिंग और पैकिंग तक काम बच्चों ने खुद किया। अब इन राखियों को 20, 30, 40 रुपये के न्यूनतम दाम पर बेचने की तैयारी है।
इस गतिविधि में गतिक, शुभम, विकास, रविंदर, चिराग, मनोज, विजय, सुधांशु, लोकेश और नीरज समेत विशेष बच्चों ने हिस्सा लिया। शिक्षक चक्रेश्वर और स्वीटी ने बच्चों को राखी तैयार करने के अलग-अलग चरणों में प्रशिक्षण और मार्गदर्शन दिया।
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गतिक : जिस धागे को संभालना सीखना था, उसी से बनाई राखी
फोटो: 02- गतिक
गतिक के लिए राखी बनाने की शुरुआत साधारण धागे से हुई लेकिन उस धागे को सही तरीके से पकड़ना और उसमें मोती पिरोना उसके लिए सीखने की प्रक्रिया थी। शिक्षक उसे एक-एक कदम समझाते। वह कोशिश करता। कभी धागा छूट जाता तो फिर से उठाता, कभी मोती गलत जगह चला जाता तो दोबारा पिरोता। धीरे-धीरे उसकी अंगुलियों ने काम को समझना शुरू किया। जिस काम के लिए शुरुआत में बार-बार मदद की जरूरत पड़ती थी, वही काम अभ्यास के बाद वह खुद करने लगा।
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चिराग: एक राखी से शुरू हुई सीख, फिर पूरी प्रक्रिया अपने हाथ में
फोटो: 01- चिराग
शुरुआत में चिराग को धागे को संभालना, मोतियों को सही जगह लगाना, डिजाइन को पूरा करना और अंत में राखी को मजबूत गांठ देना हर चरण को धीरे-धीरे सिखाया गया। इस बार बच्चों को सिर्फ राखी बनाकर रोक नहीं दिया गया। तैयार राखी की फिनिशिंग और पैकिंग भी कराई गई। शुभम ने भी अपनी बनाई राखी को अंतिम रूप देने और उसे पैक करने की प्रक्रिया सीखी।
वर्जन
इस गतिविधि का उद्देश्य केवल राखियां तैयार करना नहीं बल्कि बच्चों में कौशल, आत्मविश्वास और आत्मनिर्भरता की भावना विकसित करना है।
- डॉ. एडी पासवान, प्राचार्य सितार।
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रोहतक। मेज पर बिखरे रंग-बिरंगे धागे, छोटे-छोटे मोती और सजावटी सामान...सामने बैठे बच्चों के हाथ धीरे-धीरे इन्हें एक आकार दे रहे हैं। कोई धागे में मोती पिरो रहा है तो कोई डिजाइन तैयार कर रहा है। काम की रफ्तार भले धीमी हो लेकिन हर बार जब एक राखी तैयार होती है, चेहरे पर दिखाई देने वाली खुशी कुछ कहती है। इन हाथों ने सिर्फ राखियां नहीं बनाईं बल्कि अपने हुनर और आत्मविश्वास को आकार दिया है।
रोहतक के राज्य पुनर्वास प्रशिक्षण और अनुसंधान संस्थान (सितार) में इस बार विशेष बच्चों ने करीब 1000 हैंडमेड राखियां तैयार की हैं। खास बात यह है कि बच्चों ने बाजार से तैयार राखियां नहीं खरीदीं बल्कि धागे, मोती और अन्य सामग्री से पूरी राखी खुद तैयार करना सीखा। डिजाइन से लेकर मोती पिरोने, गांठ लगाने, फिनिशिंग और पैकिंग तक काम बच्चों ने खुद किया। अब इन राखियों को 20, 30, 40 रुपये के न्यूनतम दाम पर बेचने की तैयारी है।
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इस गतिविधि में गतिक, शुभम, विकास, रविंदर, चिराग, मनोज, विजय, सुधांशु, लोकेश और नीरज समेत विशेष बच्चों ने हिस्सा लिया। शिक्षक चक्रेश्वर और स्वीटी ने बच्चों को राखी तैयार करने के अलग-अलग चरणों में प्रशिक्षण और मार्गदर्शन दिया।
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गतिक : जिस धागे को संभालना सीखना था, उसी से बनाई राखी
फोटो: 02- गतिक
गतिक के लिए राखी बनाने की शुरुआत साधारण धागे से हुई लेकिन उस धागे को सही तरीके से पकड़ना और उसमें मोती पिरोना उसके लिए सीखने की प्रक्रिया थी। शिक्षक उसे एक-एक कदम समझाते। वह कोशिश करता। कभी धागा छूट जाता तो फिर से उठाता, कभी मोती गलत जगह चला जाता तो दोबारा पिरोता। धीरे-धीरे उसकी अंगुलियों ने काम को समझना शुरू किया। जिस काम के लिए शुरुआत में बार-बार मदद की जरूरत पड़ती थी, वही काम अभ्यास के बाद वह खुद करने लगा।
चिराग: एक राखी से शुरू हुई सीख, फिर पूरी प्रक्रिया अपने हाथ में
फोटो: 01- चिराग
शुरुआत में चिराग को धागे को संभालना, मोतियों को सही जगह लगाना, डिजाइन को पूरा करना और अंत में राखी को मजबूत गांठ देना हर चरण को धीरे-धीरे सिखाया गया। इस बार बच्चों को सिर्फ राखी बनाकर रोक नहीं दिया गया। तैयार राखी की फिनिशिंग और पैकिंग भी कराई गई। शुभम ने भी अपनी बनाई राखी को अंतिम रूप देने और उसे पैक करने की प्रक्रिया सीखी।
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इस गतिविधि का उद्देश्य केवल राखियां तैयार करना नहीं बल्कि बच्चों में कौशल, आत्मविश्वास और आत्मनिर्भरता की भावना विकसित करना है।
- डॉ. एडी पासवान, प्राचार्य सितार।

01- चिराग

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