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Rohtak News: 150 मरीजों को परामर्श व दवा देना एक ही डॉक्टर के जिम्मे
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10सीटीके12..वार्ड नंबर 26 एआरटी सेंटर में मरीजो को दवा देते डॉ. पीयूष। संवाद
रोहतक। हरियाणा एड्स कंट्रोल सोसाइटी के सदस्यों के हड़ताल पर जाने से सारा काम एक ही डॉक्टर के जिम्मे आ गया है। 10 दिन से जारी हड़ताल के कारण मरीज परेशान हैं। जांच रिपोर्ट नहीं आ रही है। वहीं नए मरीजों को सबसे ज्यादा समस्या हो रही है।
वार्ड-26 एआरटी सेंटर में एचआईवी व एड्स रोगियों के इलाज के लिए एक ही चिकित्सक उपलब्ध हैं। हरियाणा एड्स कंट्रोल सोसाइटी की हड़ताल के कारण एक चिकित्सक ही मरीज का नाम रिकॉर्ड में रजिस्टर कर रहे हैं। मरीजों को परामर्श भी दे रहे हैं। डाटा ऑपरेटर का भी काम कर रहे हैं, साथ ही मरीजों को दवा भी बांट रहे हैं। ऐसे में लंबे समय तक यह हड़ताल चली या फिर योग्य स्टाफ नहीं बुलाए गए तो मरीजों के इलाज की गुणवत्ता पर असर पड़ सकता है।
एक डॉक्टर के भरोसे एआरटी सेंटर
पीजीआईएमएस एआरटी सेंटर एक चिकित्सक के भरोसे 10 दिन से चल रहा है। परिणामस्वरूप मरीजों की लंबी कतार लग रही है। एचआईवी संबंधित बीमारी इतनी जटिल है कि परामर्श और दवा दोनों ही महत्वपूर्ण होती है। फिलहाल एक ही चिकित्सक परामर्श, दवा और रिकॉर्ड रखने का काम कर रहे हैं।
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एआरटी सेंटर में रोजाना आ रहे हैं 150 से ज्यादा मरीज
एआरटी सेंटर में रोजाना करीब 150 मरीजों की ओपीडी दर्ज की जा रही है। यहां चार स्टाफ का काम एक चिकित्सक कर रहे हैं। इसके कारण एक मरीज पर 15 मिनट से ज्यादा समय लग रहा है।
मरीजों के रिकॉर्ड बनाए रखने के साथ-साथ उनकी काउंसिलिंग, परामर्श और दवा देने का काम मेरे ही जिम्मे है। अब हड़ताल के चलते मरीजों को तो छोड़ नहीं सकते। मरीज की चिकित्सा करना ही चिकित्सक का सबसे बड़ा धर्म है। वह मैं कर रहा हूं।
-डॉ. पीयूष, मेडिकल ऑफिसर, एआरटी सेंटर
सरकार कर रही सौतेला व्यवहार
हरियाणा एड्स कंट्रोल सोसाइटी की हड़ताल 10वें दिन भी जारी रही। सिविल सर्जन कार्यालय के बाहर कर्मचारियों ने सरकार के खिलाफ नारेबाजी की। शनिवार को कर्मचारियों ने कहा कि हमारा रोल सबसे महत्वपूर्ण है। हम अक्सर एचआईवी, टीबी जैसे- मरीजों का इलाज करते हैं, गंभीर मरीजों के साथ ही उठना-बैठना है। ऐसे में बीमार होने का रिस्क हमेशा रहता है। कर्मचारियों ने कहा कि जब वह एनएचएम कर्मचारियों को सर्विस बाई लॉज दे सकते हैं तो फिर हमें क्यों नहीं। हमारी क्वालीफिकेशन और अनुभव अधिक है। हमारे काम की जटिलता भी अधिक है। ऐसे में सरकार को हम पर भरोसा दिखाते हुए जल्द नियमित करने की पॉलिसी में एड्स कंट्रोल सोसाइटी के कर्मचारियों को भी डालना चाहिए। सरकार हमारे साथ सौतेला व्यवहार नहीं कर सकती है।
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वार्ड-26 एआरटी सेंटर में एचआईवी व एड्स रोगियों के इलाज के लिए एक ही चिकित्सक उपलब्ध हैं। हरियाणा एड्स कंट्रोल सोसाइटी की हड़ताल के कारण एक चिकित्सक ही मरीज का नाम रिकॉर्ड में रजिस्टर कर रहे हैं। मरीजों को परामर्श भी दे रहे हैं। डाटा ऑपरेटर का भी काम कर रहे हैं, साथ ही मरीजों को दवा भी बांट रहे हैं। ऐसे में लंबे समय तक यह हड़ताल चली या फिर योग्य स्टाफ नहीं बुलाए गए तो मरीजों के इलाज की गुणवत्ता पर असर पड़ सकता है।
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एक डॉक्टर के भरोसे एआरटी सेंटर
पीजीआईएमएस एआरटी सेंटर एक चिकित्सक के भरोसे 10 दिन से चल रहा है। परिणामस्वरूप मरीजों की लंबी कतार लग रही है। एचआईवी संबंधित बीमारी इतनी जटिल है कि परामर्श और दवा दोनों ही महत्वपूर्ण होती है। फिलहाल एक ही चिकित्सक परामर्श, दवा और रिकॉर्ड रखने का काम कर रहे हैं।
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एआरटी सेंटर में रोजाना आ रहे हैं 150 से ज्यादा मरीज
एआरटी सेंटर में रोजाना करीब 150 मरीजों की ओपीडी दर्ज की जा रही है। यहां चार स्टाफ का काम एक चिकित्सक कर रहे हैं। इसके कारण एक मरीज पर 15 मिनट से ज्यादा समय लग रहा है।
मरीजों के रिकॉर्ड बनाए रखने के साथ-साथ उनकी काउंसिलिंग, परामर्श और दवा देने का काम मेरे ही जिम्मे है। अब हड़ताल के चलते मरीजों को तो छोड़ नहीं सकते। मरीज की चिकित्सा करना ही चिकित्सक का सबसे बड़ा धर्म है। वह मैं कर रहा हूं।
-डॉ. पीयूष, मेडिकल ऑफिसर, एआरटी सेंटर
सरकार कर रही सौतेला व्यवहार
हरियाणा एड्स कंट्रोल सोसाइटी की हड़ताल 10वें दिन भी जारी रही। सिविल सर्जन कार्यालय के बाहर कर्मचारियों ने सरकार के खिलाफ नारेबाजी की। शनिवार को कर्मचारियों ने कहा कि हमारा रोल सबसे महत्वपूर्ण है। हम अक्सर एचआईवी, टीबी जैसे- मरीजों का इलाज करते हैं, गंभीर मरीजों के साथ ही उठना-बैठना है। ऐसे में बीमार होने का रिस्क हमेशा रहता है। कर्मचारियों ने कहा कि जब वह एनएचएम कर्मचारियों को सर्विस बाई लॉज दे सकते हैं तो फिर हमें क्यों नहीं। हमारी क्वालीफिकेशन और अनुभव अधिक है। हमारे काम की जटिलता भी अधिक है। ऐसे में सरकार को हम पर भरोसा दिखाते हुए जल्द नियमित करने की पॉलिसी में एड्स कंट्रोल सोसाइटी के कर्मचारियों को भी डालना चाहिए। सरकार हमारे साथ सौतेला व्यवहार नहीं कर सकती है।

10सीटीके12..वार्ड नंबर 26 एआरटी सेंटर में मरीजो को दवा देते डॉ. पीयूष। संवाद