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एक सप्ताह में चालू होगा गैस-बिजली से संचालित शव दाह केंद्र
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कोरोना संक्रमण लगातार बढ़ता जा रहा है। ऐसे में पीजीआई में दम तोड़ने वाले कोरोना संक्रमित मरीजों के अंतिम संस्कार के लिए वैश्य संस्था के नजदीक श्मशान घाट में कुंड की संख्या कम पड़ती जा रही है। ऐसे में नगर निगम 65 लाख की लागत से तैयार गैस-बिजली संचालित शव दाह संस्कार केंद्र एक सप्ताह में चालू कर देगा। ताकि संस्कार के समय दिक्कत का सामना न करना पड़े।
प्रदेश में रोहतक स्थित पीजीआई सबसे बड़ा चिकित्सा संस्थान है। कोरोना संक्रमण के चलते पीजीआई में न केवल रोहतक, बल्कि आसपास के जिलों के भी मरीज दाखिल हो रहे हैं। अगर कोरोना संक्रमित किसी मरीज की जान चली जाती है तो उसका शव परिजनों को नहीं सौंपा जाता, बल्कि नगर निगम द्वारा अंतिम संस्कार किया जाता है। इसके लिए वैश्य संस्था के नजदीक श्मशान घाट व जींद रोड स्थित कब्रिस्तान में व्यवस्था की गई है। शहर में समाजसेवी संस्था ने शीला बाईपास स्थित रामबाग श्मशान घाट में गैस-बिजली से संचालित शव दाह संस्कार केंद्र का निर्माण कराया था, लेकिन तकनीकी दिक्कत के चलते वहां पर कोरोना संक्रमित शवों का संस्कार नहीं किया जा रहा है। वैश्य संस्था के नजदीक श्मशान घाट में ही हर रोज 8 कोरोना संक्रमित शवों के संस्कार की व्यवस्था की गई है। स्थानीय प्रशासन व मेयर के आग्रह पर पिछले साल सरकार ने 65 लाख की लागत से वैश्य संस्था के नजदीक श्मशान घाट में गैस व बिजली से संचालित शव दाह संस्कार केंद्र का निर्माण कार्य शुरू कराया था, जो अब पूरा हो गया है। केंद्र में जल्दी शव का संस्कार किया जा सकता है। जबकि सामान्य तौर पर लकड़ियों से एक कुंड में केवल दो शवों का ही संस्कार हो सकता है।
गैस व बिजली आधारित शव दाह संस्कार केंद्र का निर्माण कार्य पूरा हो गया है। सोमवार को एक निजी एजेंसी का एक्सपर्ट जांच करेगा। इसके बाद दो-तीन दिन तक ट्रायल किया जाएगा, कहीं कोई दिक्कत तो नहीं है। फिर एक सप्ताह के अंदर केंद्र को चालू कर दिया जाएगा।
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- प्रदीप गोदारा, आयुक्त, नगर निगम
शव दाह संस्कार केंद्र का निर्माण तो हो गया है, लेकिन उसमें कई कार्य बाकी हैं। खुद मौके का मुआयना करके एक्सपर्ट से बात करेंगे, ताकि जल्द शवों का संस्कार शुरू हो सके। क्योंकि कोरोना संक्रमण फैलने से शवों के संस्कार में दिक्कत आ रही है।
- मनमोहन गोयल, मेयर, नगर निगम
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प्रदेश में रोहतक स्थित पीजीआई सबसे बड़ा चिकित्सा संस्थान है। कोरोना संक्रमण के चलते पीजीआई में न केवल रोहतक, बल्कि आसपास के जिलों के भी मरीज दाखिल हो रहे हैं। अगर कोरोना संक्रमित किसी मरीज की जान चली जाती है तो उसका शव परिजनों को नहीं सौंपा जाता, बल्कि नगर निगम द्वारा अंतिम संस्कार किया जाता है। इसके लिए वैश्य संस्था के नजदीक श्मशान घाट व जींद रोड स्थित कब्रिस्तान में व्यवस्था की गई है। शहर में समाजसेवी संस्था ने शीला बाईपास स्थित रामबाग श्मशान घाट में गैस-बिजली से संचालित शव दाह संस्कार केंद्र का निर्माण कराया था, लेकिन तकनीकी दिक्कत के चलते वहां पर कोरोना संक्रमित शवों का संस्कार नहीं किया जा रहा है। वैश्य संस्था के नजदीक श्मशान घाट में ही हर रोज 8 कोरोना संक्रमित शवों के संस्कार की व्यवस्था की गई है। स्थानीय प्रशासन व मेयर के आग्रह पर पिछले साल सरकार ने 65 लाख की लागत से वैश्य संस्था के नजदीक श्मशान घाट में गैस व बिजली से संचालित शव दाह संस्कार केंद्र का निर्माण कार्य शुरू कराया था, जो अब पूरा हो गया है। केंद्र में जल्दी शव का संस्कार किया जा सकता है। जबकि सामान्य तौर पर लकड़ियों से एक कुंड में केवल दो शवों का ही संस्कार हो सकता है।
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गैस व बिजली आधारित शव दाह संस्कार केंद्र का निर्माण कार्य पूरा हो गया है। सोमवार को एक निजी एजेंसी का एक्सपर्ट जांच करेगा। इसके बाद दो-तीन दिन तक ट्रायल किया जाएगा, कहीं कोई दिक्कत तो नहीं है। फिर एक सप्ताह के अंदर केंद्र को चालू कर दिया जाएगा।
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- प्रदीप गोदारा, आयुक्त, नगर निगम
शव दाह संस्कार केंद्र का निर्माण तो हो गया है, लेकिन उसमें कई कार्य बाकी हैं। खुद मौके का मुआयना करके एक्सपर्ट से बात करेंगे, ताकि जल्द शवों का संस्कार शुरू हो सके। क्योंकि कोरोना संक्रमण फैलने से शवों के संस्कार में दिक्कत आ रही है।
- मनमोहन गोयल, मेयर, नगर निगम