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Rohtak News: शाम की पाठशाला में संवर रहा भविष्य, बच्चे खेल-खेल में हल कर रहे सवाल

Thu, 05 Nov 2026 11:07 PM IST
Rohtak Bureau रोहतक ब्यूरो
Updated Thu, 05 Nov 2026 11:07 PM IST
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A future is being shaped in the
फोटो 67 सीयूएच में श्रमिकों को पढ़ते हुए स्वयंसेवक विद्यार्थी। संवाद
रबिन वर्मा
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महेंद्रगढ़। किसी के हाथ में पेंसिल है तो कोई कॉपी पर अक्षर उकेर रहा है। कोई गणित के सवाल हल करने में जुटा है तो कोई खेल के माध्यम से कुछ नया सीख रहा है। ये बच्चे उन परिवारों से हैं, जिनके माता-पिता केंद्रीय विश्वविद्यालय हरियाणा के निर्माण स्थल पर काम करते हैं। इनके सपनों को नई उड़ान देने के लिए विश्वविद्यालय के विद्यार्थी शिक्षक की भूमिका निभा रहे हैं। राष्ट्रीय सेवा योजना (एनएसएस) की ओर से शुरू की गई ‘उड़ान’ पहल के तहत 75 बच्चों को शिक्षा से जोड़कर उनके भविष्य की नींव मजबूत की जा रही है।

बता दें कि विश्वविद्यालय में 14 अगस्त को इस पहल का शुभारंभ किया गया था। बच्चों की उम्र, शैक्षणिक स्तर और सीखने की क्षमता के अनुसार उन्हें तीन श्रेणियों में बांटा गया है। इसके तहत हिंदी, अंग्रेजी, गणित और पर्यावरण अध्ययन जैसे विषयों की नियमित कक्षाएं लगाई जाती हैं। ये कक्षाएं एमए और पीएचडी की कक्षाएं पूरी होने के बाद शाम के समय लगती हैं। इसमें विवि के 19 स्वयंसेवक और 21 प्रोफेसर विद्यार्थियों को पढ़ा रहे हैं। विश्वविद्यालय के विभिन्न विभागों के विद्यार्थी बच्चों को पढ़ाने के साथ उनकी शैक्षणिक जरूरतों को समझने और उन्हें व्यक्तिगत मार्गदर्शन देने में भी सहयोग करते हैं। संवाद
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खेल और रचनात्मक गतिविधियों से बनाते हैं पढ़ाई को रोचक

बच्चों को केवल किताबों तक सीमित नहीं रखा जाता। शनिवार और रविवार को विशेष गतिविधि सत्र आयोजित किए जाते हैं। इनमें खेल, समूह सहभागिता, संवादात्मक अभ्यास और रचनात्मक कार्यों के माध्यम से बच्चों को सीखने का अवसर मिलता है। इन गतिविधियों का उद्देश्य बच्चों में आत्मविश्वास, संवाद क्षमता, जिज्ञासा और टीम भावना विकसित करना है। गतिविधि आधारित शिक्षण से बच्चे पढ़ाई को बोझ के बजाय आनंद के रूप में महसूस कर सकें, इस पर विशेष ध्यान दिया जाता है।
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हर महीने ट्रायल कक्षाओं से चुने जाते हैं शिक्षक

पत्रकारिता एवं जनसंचार विभाग से डॉ. नीरज कर्णसिंह ने बताया कि उड़ान पहल में बच्चों को पढ़ाने के लिए विश्वविद्यालय के विद्यार्थियों का चयन भी खास प्रक्रिया से किया जाता है। हर महीने ट्रायल कक्षाएं आयोजित की जाती हैं। इसमें बच्चों के साथ संवाद, विषय की समझ, धैर्य और पढ़ाने के तरीके के आधार पर विद्यार्थियों का चयन किया जाता है। चयनित विद्यार्थियों को शिक्षण से पहले मार्गदर्शन भी दिया जाता है, ताकि बच्चों को बेहतर और सहज माहौल में पढ़ाया जा सके।


बैग, किताबें और स्टेशनरी से भी मिल रहा सहयोग

कुलपति प्रो. टंकेश्वर कुमार ने बताया कि पहल के शुभारंभ पर बच्चों को बैग और स्टेशनरी वितरित की गई थी। इसके बाद विश्वविद्यालय के विद्यार्थियों, शोधार्थियों और सामाजिक संस्थाओं ने भी सहयोग किया। बच्चों को किताबें, कॉपी, पेन, पानी की बोतलें, रंग और अन्य शैक्षणिक सामग्री उपलब्ध करवाई गई। कुछ विद्यार्थियों और शोधार्थियों ने अपने जन्मदिन और उपलब्धियों के अवसर पर बच्चों के बीच स्टेशनरी और अन्य सामग्री वितरित की।

फोटो 67 सीयूएच में श्रमिकों को पढ़ते हुए स्वयंसेवक विद्यार्थी। संवाद

फोटो 67 सीयूएच में श्रमिकों को पढ़ते हुए स्वयंसेवक विद्यार्थी। संवाद

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