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शिक्षा : आरटीई
Updated Sun, 22 Apr 2018 02:32 AM IST
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फोटो : वीएस 3
आरटीई भी नहीं दिला पा रही विद्यार्थियों को निजी स्कूलों में नि:शुल्क शिक्षा
- दाखिले के लिए विद्यार्थियों के आवेदन लेने से इनकार कर रहे संचालक, मजबूरी में करानी पड़ रही रजिस्ट्री
- आरटीई के तहत पहली कक्षा को छोड़ कर नर्सरी से आठवीं तक नि:शुल्क दाखिले का है प्रावधान, 25 प्रतिशत सीटें आरक्षित
अमर उजाला ब्यूरो
रोहतक
आरटीई (राइट टू इंफोर्मेशन) भी पिछड़े तबकों के विद्यार्थियों को निजी स्कूलों में नि:शुल्क नहीं दिला पा रही है। स्कूल संचालक बच्चों के दाखिला आवेदन नहीं ले रहे हैं। मजबूरी में अभिभावकों को आवेदन पत्र रजिस्ट्री के जरिए स्कूल भेजने पड़ रहे हैं। स्कूल संचालकों ने आवेदन नहीं लेने के पीछे नियमों का हवाला दिया है।
सरकार ने हर बच्चे को स्कूल भेजने के साथ निजी स्कूलों में भी दाखिले की व्यवस्था की है। इसके तहत आरटीई लागू किया गया है। आरटीई निजी स्कूलों में पिछड़ा वर्ग के बच्चों के लिए 25 प्रतिशत सीटें आरक्षित करता है। इसके बावजूद जिले में इन सीटों पर बच्चों को दाखिला नहीं मिल पा रहा है। इसके चलते अभिभावक परेशान हैं। स्कूलों में आवेदन स्वीकार नहीं किए जाने से आहत अभिभावक अब डाक के जरिए आवेदन पत्र रजिस्ट्री कराने को विवश हैं। इस कारण रोजाना करीब पांच से दस अभिभावक इन दिनों कोर्ट व डाक विभाग के चक्कर लगा रहे हैं।
केस 1 :
बेटे का निजी स्कूल में दाखिला कराना था। इसके लिए आरटीई की जानकारी मिली तो आवेदन निजी स्कूल में दिया। यहां स्कूल प्रबंधन ने आवेदन लेने से इनकार कर दिया। पिछले सात दिनों से घूम रहे हैं। अब आवेदन रजिस्ट्री से भेजना पड़ रहा है।
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रमेश, एकता कॉलोनी।
केस 2 :
निजी स्कूल में बच्चों को नि:शुल्क शिक्षा दिलाने के लिए आरटीई के बारे में पता लगा। इसलिए एक निजी स्कूल में आवेदन करने गए। यहां स्कूल संचालकों ने आवेदन लेने से मना कर दिया। अब आवेदन रजिस्ट्री के जरिए भेज रहे हैं।
मनोज, आजादगढ़।
आवेदन लेने से इनकार नहीं कर सकते स्कूल
आरटीई के तहत पिछड़े वर्ग के बच्चों को निजी स्कूलों में पढ़ने का अधिकार दिया गया है। इसके तहत स्कूलों में 25 प्रतिशत सीटें आरक्षित रखनी होती है। स्कूल बच्चों के आवेदन लेने से इनकार नहीं कर सकते हैं। पिछले कुछ दिनों से बच्चे आवेदन नहीं लिए जाने की शिकायत लेकर आ रहे हैं। इनके आवेदन रजिस्ट्री के जरिए स्कूलों को भेजे जा रहे हैं। अब भी बच्चों को दाखिला नहीं मिला तो कोर्ट का दरवाजा खटखटाया जाएगा।
प्रवीण कल्सन, जिला प्रभारी, दो जमा पांच मुद्दे जन आंदोलन संगठन।
चुनिंदा स्कूलों पर ही लागू होते हैं नियम
आरटीई सभी स्कूलों पर लागू नहीं होता है। यह चुनिंदा स्कूलों पर ही लागू है। शहर में यह लागू ही नहीं होता है। नियमानुसार दो किलोमीटर के क्षेत्र में सरकारी स्कूल नहीं होने पर ही निजी स्कूल में दाखिला दिया जा सकता है। इसके अलावा पहली कक्षा में सरकारी स्कूल से सीट रिक्त नहीं होने के बारे में लिखित रूप में पुष्टि करानी होती है। नियमों के तहत दाखिला दिया जा रहा है।
रवींद्र नांदल, अध्यक्ष, निजी स्कूल एसोसिएशन।
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आरटीई भी नहीं दिला पा रही विद्यार्थियों को निजी स्कूलों में नि:शुल्क शिक्षा
- दाखिले के लिए विद्यार्थियों के आवेदन लेने से इनकार कर रहे संचालक, मजबूरी में करानी पड़ रही रजिस्ट्री
- आरटीई के तहत पहली कक्षा को छोड़ कर नर्सरी से आठवीं तक नि:शुल्क दाखिले का है प्रावधान, 25 प्रतिशत सीटें आरक्षित
अमर उजाला ब्यूरो
रोहतक
आरटीई (राइट टू इंफोर्मेशन) भी पिछड़े तबकों के विद्यार्थियों को निजी स्कूलों में नि:शुल्क नहीं दिला पा रही है। स्कूल संचालक बच्चों के दाखिला आवेदन नहीं ले रहे हैं। मजबूरी में अभिभावकों को आवेदन पत्र रजिस्ट्री के जरिए स्कूल भेजने पड़ रहे हैं। स्कूल संचालकों ने आवेदन नहीं लेने के पीछे नियमों का हवाला दिया है।
सरकार ने हर बच्चे को स्कूल भेजने के साथ निजी स्कूलों में भी दाखिले की व्यवस्था की है। इसके तहत आरटीई लागू किया गया है। आरटीई निजी स्कूलों में पिछड़ा वर्ग के बच्चों के लिए 25 प्रतिशत सीटें आरक्षित करता है। इसके बावजूद जिले में इन सीटों पर बच्चों को दाखिला नहीं मिल पा रहा है। इसके चलते अभिभावक परेशान हैं। स्कूलों में आवेदन स्वीकार नहीं किए जाने से आहत अभिभावक अब डाक के जरिए आवेदन पत्र रजिस्ट्री कराने को विवश हैं। इस कारण रोजाना करीब पांच से दस अभिभावक इन दिनों कोर्ट व डाक विभाग के चक्कर लगा रहे हैं।
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केस 1 :
बेटे का निजी स्कूल में दाखिला कराना था। इसके लिए आरटीई की जानकारी मिली तो आवेदन निजी स्कूल में दिया। यहां स्कूल प्रबंधन ने आवेदन लेने से इनकार कर दिया। पिछले सात दिनों से घूम रहे हैं। अब आवेदन रजिस्ट्री से भेजना पड़ रहा है।
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रमेश, एकता कॉलोनी।
केस 2 :
निजी स्कूल में बच्चों को नि:शुल्क शिक्षा दिलाने के लिए आरटीई के बारे में पता लगा। इसलिए एक निजी स्कूल में आवेदन करने गए। यहां स्कूल संचालकों ने आवेदन लेने से मना कर दिया। अब आवेदन रजिस्ट्री के जरिए भेज रहे हैं।
मनोज, आजादगढ़।
आवेदन लेने से इनकार नहीं कर सकते स्कूल
आरटीई के तहत पिछड़े वर्ग के बच्चों को निजी स्कूलों में पढ़ने का अधिकार दिया गया है। इसके तहत स्कूलों में 25 प्रतिशत सीटें आरक्षित रखनी होती है। स्कूल बच्चों के आवेदन लेने से इनकार नहीं कर सकते हैं। पिछले कुछ दिनों से बच्चे आवेदन नहीं लिए जाने की शिकायत लेकर आ रहे हैं। इनके आवेदन रजिस्ट्री के जरिए स्कूलों को भेजे जा रहे हैं। अब भी बच्चों को दाखिला नहीं मिला तो कोर्ट का दरवाजा खटखटाया जाएगा।
प्रवीण कल्सन, जिला प्रभारी, दो जमा पांच मुद्दे जन आंदोलन संगठन।
चुनिंदा स्कूलों पर ही लागू होते हैं नियम
आरटीई सभी स्कूलों पर लागू नहीं होता है। यह चुनिंदा स्कूलों पर ही लागू है। शहर में यह लागू ही नहीं होता है। नियमानुसार दो किलोमीटर के क्षेत्र में सरकारी स्कूल नहीं होने पर ही निजी स्कूल में दाखिला दिया जा सकता है। इसके अलावा पहली कक्षा में सरकारी स्कूल से सीट रिक्त नहीं होने के बारे में लिखित रूप में पुष्टि करानी होती है। नियमों के तहत दाखिला दिया जा रहा है।
रवींद्र नांदल, अध्यक्ष, निजी स्कूल एसोसिएशन।