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राेहतक: 70 लाख की स्वीपिंग मशीन, रखरखाव व डीजल पर खर्च डाले 84 लाख, फिर भी ठेके पर सड़कों की सफाई

Tue, 28 Dec 2021 01:51 AM IST
रोहतक ब्यूरो अमर उजाला ब्यूरो, रोहतक (हरियाणा)
अमर उजाला ब्यूरो, रोहतक (हरियाणा) Published by: रोहतक ब्यूरो Updated Tue, 28 Dec 2021 01:51 AM IST
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84 lakhs spent on maintenance and diesel of 70 lakh sweeping machine in Rohtak
स्वीपिंग मशीन - फोटो : अमर उजाला

रोहतक शहर की सरकार अपने ही पार्षदों के आरोप झेल रही है। भाजपा की महिला पार्षद के पति ने शहरी निकाय मंत्री अनिल विज को पत्र भेजकर आरोप लगाया है कि नगर निगम शहर की सड़कों की सफाई का कार्य ठेके पर होने के बावजूद लाखों रुपये खर्च कर दिए। निगम की स्वीपिंग मशीन की कीमत 70 लाख है, लेकिन एक साल में 56 लाख रखरखाव और 28 लाख का डीजल फूंक दिया। जवाब में निगम के संयुक्त आयुक्त कहते हैं कि पूरा रिकॉर्ड पारदर्शी तरीके से मौजूद है। मशीन के जीपीएस सिस्टम से आकर कोई भी देख सकता है।

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सोमवार को पूर्व पार्षद अशोक खुराना की ओर जारी बयान में आरोप लगाया गया है कि नगर निगम ने शहर की सड़कों का ठेका निजी हाथों में दे रखा है। बावजूद इसके खुद 70 लाख रुपये में नई रोड स्वीपिंग मशीन खरीदी थी। इस मशीन का मेंटेनेंस का ठेका हर माह चार लाख 70 हजार यानी 56 लाख रुपये वार्षिक पर दिया है। एक साल में 28 लाख रुपये का डीजल भी खर्च कर दिया गया है। ठेके में सड़कों की स्वीपिंग मशीन से सफाई करवाने का प्रावधान है।

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700 के करीब फाइल फांक रही धूल, बेवजह रद्द की गई

पूर्व पार्षद का दूसरा आरोप है कि शहर के लोगों को प्रॉपर्टी की रजिस्ट्री करवाना बेहद कठिन हो गया है। भवन शाखा से फाइल बाहर नहीं आ रही हैं। प्रॉपर्टी टैक्स और एनडीसी की 1628 फाइलें पूर्ण होने का दावा किया जा रहा है, जबकि 700 के करीब फाइल अब भी ब्रांच के कर्मचारियों की कुर्सी के पीछे रखी हुई हैं। ज्यादातर फाइल रद्द कर दी या पेंडिंग में रखी हुई हैं। उन्हाेंने आरोप लगाया निगम क्षेत्र में भवनों का निर्माण बिल्डिंग कोड (बाइलॉज) के पूर्ण नियमों के तहत नहीं हो रहा है, जिसमें कार्रवाई के नाम पर खानापूर्ति होती है। निगम प्रशासन ने पांचवीं मंजिल तोड़ने की कार्रवाई शुरू होने से पहले ही बंद कर दी गई।

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तीन करोड़ की लागत से बना स्लॉटर हाउस बना सफेद हाथी

नगर निगम ने तीन करोड़ रुपये की लागत से स्लॉटर हाउस का निर्माण करवाया, लेकिन तकनीकी फॉल्ट बताकर बिल्डिंग का काम रोक दिया गया है। निगम ने दो करोड़ रुपये की लागत से छह पानी के बूस्टर बनवाए हैं, जो तीन साल बाद भी चालू नहीं हुए हैं। कन्हैली बूस्टर का पूरा भवन ध्वस्त हो गया है। भाजपा नेता अशोक खुराना ने कहा कि शहर की अधिकांश सड़कों पर गड्ढे हैं।

फूड कोर्ट, पावर चौक की दुकानें व ट्रैफिक पार्क का काम भी अधूरा

भाजपा के पूर्व पार्षद का आरोप है कि फूड कोर्ट, पावर हाउस स्थित दुकानें, मेडिकल मोड़ स्थित ट्रैफिक पार्क, सोनीपत स्टैंड कम्यूनिटी सेंटर आदि का निर्माण अधूरा है। जन स्वास्थ्य विभाग ने बिना जरूरत के 32 लाख रुपये के ट्यूबवेल लगाए हैं। नहर से सोनीपत रोड स्थित वाटर टैंक तक पाइप बिछाने का काम पांच वर्ष से जारी है, लेकिन पूरा कब होगा कोई नहीं जानता। भाजपा नेता अशोक खुराना ने शहरी स्थानीय निकाय मंत्री अनिल विज को पत्र लिखकर निगम में दस साल में हुए विकास कार्यों का ऑडिट कराने की मांग की है ताकि हकीकत सामने आ सके।

रोड स्वीपिंग मशीन में जीपीएस सिस्टम लगा हुआ है। मशीन कहां चली कितने समय चली, इसका ब्योरा कोई भी निगम के पास आकर देख सकता है। 28 लाख रुपये का डीजल खर्च का पूरा ब्योरा अंकित है। प्रॉपर्टी टैक्स व एनडीसी की वही फाइलें रद्द की गई है, जिनमें बुलाने के बाद भी लोग नहीं आए। किसी ने फीस जमा नहीं की तो किसी ने दस्तावेज पूरे नहीं किए। बिना वजह से कोई भी फाइल रद्द नहीं की गई है। - सुरेश कुमार, संयुक्त आयुक्त नगर निगम

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