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अब रोहतक की चौधर, पब्लिक के हाथ में, सीधा करेगी मेयर का चुनाव
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, रोहतक (हरियाणा)
Updated Thu, 06 Sep 2018 12:30 PM IST
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अब रोहतक शहर की चौधर पब्लिक के हाथ में होगी। क्योंकि अक्तूबर में होने वाले निगम चुनाव में पब्लिक सीधे वोट डालकर मेयर का चुनाव करेगी। पहले चुने गए पार्षद बहुमत से मेयर का चयन करते थे। खास बात यह है कि पब्लिक का चुना मेयर तीन विधानसभा क्षेत्र का प्रतिनिधित्व करेगा। क्योंकि निगम में सात वार्ड कलानौर, 14 वार्ड रोहतक तो एक वार्ड गढ़ी सांपला-किलोई हलके में आते हैं।
प्रदेश की मनोहर सरकार के मंत्रिमंडल की बुधवार को मीटिंग हुई, जिसमें अक्तूबर में होने वाले पांच निगमों रोहतक, हिसार, पानीपत, करनाल व यमुनानगर में मेयर का चुनाव सीधे पब्लिक से कराने का निर्णय लिया गया। अब निगम एरिया की पब्लिक अपने वार्ड पार्षद के साथ मेयर के लिए भी वोट डालेगी। सरकार के फैसले निगम चुनाव की तैयारी कर रहे पार्षदों के चेहरों पर रौनक आ गई है। क्योंकि जो पार्षद वार्ड रिजर्व होने के कारण खुद चुनाव नहीं लड़ पा रहे थे, वे मेयर का चुनाव लड़ सकते हैं। मेयर का चुनाव ओपन है। उसे एससी-एसटी, बीसी या महिला वर्ग के लिए आरक्षित नहीं किया गया है।
तीन हलकों से जुड़ेगी मेयर की चौधर
निगम की जनसंख्या 5 लाख 12 हजार है, जिसके अंदर वार्ड नंबर 1, 2, 3, 4 का 30 प्रतिशत हिस्सा, 5, 10, 20, 21 व 22 कलानौर, वार्ड 9 का बोहर व अस्थल बोहर गांव हलका गढ़ी सांपला-किलोई और 6, 7, 8, 11, 12, 13, 14, 15, 16, 17, 18,19 रोहतक विधानसभा क्षेत्र में आते हैं। ऐसे में मेयर के चयन में तीनों हलकों की जनता का हाथ रहेगा।
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हुड्डा व ग्रोवर परिवार कूद सकते हैं मैदान में
रोहतक नगर निगम मेयर का पद राजनीति के हिसाब से अब विधायक से भी अहम रहेगा। ऐसे में कांग्रेस से हुड्डा परिवार और भाजपा से ग्रोवर परिवार सीधे मैदान में आ सकते हैं। हालांकि कई कांग्रेस व भाजपा के पार्षद खुद को अभी से मैदान में मानकर चल रहे हैं।
किसने क्या कहा
सरकार के फैसले का वे स्वागत करते हैं। अब पहले की तरह मेयर के लिए पार्षदों की बोली नहीं लगेगी। खरीद-फरोख्त पर अंकुश लगेगा। जल्द सरकार निगम चुनाव करवाएगी।
-मनीष ग्रोवर, सहकारिता मंत्री एवं स्थानीय विधायक
मेयर के पास फिलहाल वित्तीय व प्रशासनिक पावर नहीं है। सरकार को मेयर को अधिकार भी देने चाहिए। वैसे सरकार की असली मंशा निगम चुनाव टालने की है। क्योंकि मेयर का सीधा चुनाव कराने में नगर निगम एक्ट 1994 में संशोधन करना पड़ेगा। इसमें समय लगेगा। -भारत भूषण बतरा, पूर्व विधायक कांग्रेस
सरकार का फैसला सही, मेयर पद का दावेदार
सरकार ने सही फैसला लिया है। अगर पार्टी ने अनुमति दी तो वे मेयर पद का चुनाव लड़ेंगे। जल्द निगम चुनाव होंगे। इसके लिए कार्यकर्ता तैयार रहें।
-अशोक खुराना, पूर्व पार्षद भाजपा
चुनाव से भाग रही सरकार, पार्टी का फैसला मानेंगे
भाजपा सरकार अब तक नाकाम रही है। चुनाव में हार का सामना न करना पड़े, इसलिए सरकार ने गेम खेला है। क्योंकि मेयर का सीधा पब्लिक के हाथों चुनाव कराने के लिए समय लेगा। दूसरा, अगर पार्टी कहेगी तो वे मेयर का चुनाव लड़ने के लिए तैयार हैं।
-राजबीर सैनी, पूर्व पार्षद कांग्रेस
विधानसभा सत्र में पास होगा प्रस्ताव, अक्तूबर में चुनाव तय
विधानसभा के वर्तमान सत्र में ही मेयर का चुनाव सीधा पब्लिक से कराने का प्रस्ताव पास किया जाएगा। जल्द राज्यपाल से मंजूरी के बाद नगर निगम एक्ट 1994 में संशोधन हो जाएगा। अक्तूबर में पांचों निगमों के चुनाव तय हैं। -राजीव जैन, मीडिया सलाहकार सीएम
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प्रदेश की मनोहर सरकार के मंत्रिमंडल की बुधवार को मीटिंग हुई, जिसमें अक्तूबर में होने वाले पांच निगमों रोहतक, हिसार, पानीपत, करनाल व यमुनानगर में मेयर का चुनाव सीधे पब्लिक से कराने का निर्णय लिया गया। अब निगम एरिया की पब्लिक अपने वार्ड पार्षद के साथ मेयर के लिए भी वोट डालेगी। सरकार के फैसले निगम चुनाव की तैयारी कर रहे पार्षदों के चेहरों पर रौनक आ गई है। क्योंकि जो पार्षद वार्ड रिजर्व होने के कारण खुद चुनाव नहीं लड़ पा रहे थे, वे मेयर का चुनाव लड़ सकते हैं। मेयर का चुनाव ओपन है। उसे एससी-एसटी, बीसी या महिला वर्ग के लिए आरक्षित नहीं किया गया है।
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तीन हलकों से जुड़ेगी मेयर की चौधर
निगम की जनसंख्या 5 लाख 12 हजार है, जिसके अंदर वार्ड नंबर 1, 2, 3, 4 का 30 प्रतिशत हिस्सा, 5, 10, 20, 21 व 22 कलानौर, वार्ड 9 का बोहर व अस्थल बोहर गांव हलका गढ़ी सांपला-किलोई और 6, 7, 8, 11, 12, 13, 14, 15, 16, 17, 18,19 रोहतक विधानसभा क्षेत्र में आते हैं। ऐसे में मेयर के चयन में तीनों हलकों की जनता का हाथ रहेगा।
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हुड्डा व ग्रोवर परिवार कूद सकते हैं मैदान में
रोहतक नगर निगम मेयर का पद राजनीति के हिसाब से अब विधायक से भी अहम रहेगा। ऐसे में कांग्रेस से हुड्डा परिवार और भाजपा से ग्रोवर परिवार सीधे मैदान में आ सकते हैं। हालांकि कई कांग्रेस व भाजपा के पार्षद खुद को अभी से मैदान में मानकर चल रहे हैं।
किसने क्या कहा
सरकार के फैसले का वे स्वागत करते हैं। अब पहले की तरह मेयर के लिए पार्षदों की बोली नहीं लगेगी। खरीद-फरोख्त पर अंकुश लगेगा। जल्द सरकार निगम चुनाव करवाएगी।
-मनीष ग्रोवर, सहकारिता मंत्री एवं स्थानीय विधायक
मेयर के पास फिलहाल वित्तीय व प्रशासनिक पावर नहीं है। सरकार को मेयर को अधिकार भी देने चाहिए। वैसे सरकार की असली मंशा निगम चुनाव टालने की है। क्योंकि मेयर का सीधा चुनाव कराने में नगर निगम एक्ट 1994 में संशोधन करना पड़ेगा। इसमें समय लगेगा। -भारत भूषण बतरा, पूर्व विधायक कांग्रेस
सरकार का फैसला सही, मेयर पद का दावेदार
सरकार ने सही फैसला लिया है। अगर पार्टी ने अनुमति दी तो वे मेयर पद का चुनाव लड़ेंगे। जल्द निगम चुनाव होंगे। इसके लिए कार्यकर्ता तैयार रहें।
-अशोक खुराना, पूर्व पार्षद भाजपा
चुनाव से भाग रही सरकार, पार्टी का फैसला मानेंगे
भाजपा सरकार अब तक नाकाम रही है। चुनाव में हार का सामना न करना पड़े, इसलिए सरकार ने गेम खेला है। क्योंकि मेयर का सीधा पब्लिक के हाथों चुनाव कराने के लिए समय लेगा। दूसरा, अगर पार्टी कहेगी तो वे मेयर का चुनाव लड़ने के लिए तैयार हैं।
-राजबीर सैनी, पूर्व पार्षद कांग्रेस
विधानसभा सत्र में पास होगा प्रस्ताव, अक्तूबर में चुनाव तय
विधानसभा के वर्तमान सत्र में ही मेयर का चुनाव सीधा पब्लिक से कराने का प्रस्ताव पास किया जाएगा। जल्द राज्यपाल से मंजूरी के बाद नगर निगम एक्ट 1994 में संशोधन हो जाएगा। अक्तूबर में पांचों निगमों के चुनाव तय हैं। -राजीव जैन, मीडिया सलाहकार सीएम