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कार्डियक सर्जन डॉ. शमशेर सिंह लोहचब ने बचाया नवजात का जीवन
Updated Tue, 15 May 2018 03:00 AM IST
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कार्डियक सर्जन डॉ. शमशेर सिंह लोहचब ने बचाया नवजात का जीवन
तीन घंटे की सर्जरी कर तीन माह की बच्ची की ब्लॉक नसों को खोला
फोटो सहित
अमर उजाला ब्यूरो
रोहतक।
पंडित भगवत दयाल शर्मा स्वास्थ्य विज्ञान विश्वविद्यालय के लाला श्याम लाल अतिविशिष्ट चिकित्सा केंद्र के कार्डियक सर्जरी विभाग में एक तीन माह की नवजात बच्ची को नवजीवन मिला है। विभागाध्यक्ष डॉ. शमशेर सिंह लोहचब व उनकी टीम ने तीन घंटे का ऑपरेशन कर बच्ची की ब्लॉक नसें खोल कर उसका जीवन बचाया।
पंजाब के तरनतारन से एक परिवार तीन माह की बच्ची को लेकर पीजीआईएमएस आया। यहां ओपीडी में जांच के दौरान डॉक्टरों ने पाया कि शरीर में रक्त सप्लाई करने वाली मुख्य नस में ब्लॉकेज है। डॉ. लोहचब ने बताया कि इस नस की यदि ब्लॉकेज न खोली जाती तो शरीर के निचले हिस्से में रक्त की सप्लाई कम हो जाती। यदि ऊपर रक्त नहीं आता तो दिमाग की नस तक फट सकती थी। इसके साथ हार्ट फेल होने की भी अधिक चांस हो जाते हैं। इसलिए इस ऑपरेशन को जल्द करना एक चैलेंज था। ऑपरेशन के बाद बच्ची फिट है। ऑपरेशन के तीसरे दिन उसे छुट्टी भी दे दी गई है। एक्सपर्ट ने बताया कि तीन माह की बच्ची का संस्थान में यह पहला आपरेशन है। इससे पहले यहां पांच से छह साल के बच्चों का ऑपरेशन यहां किया गया है। बच्ची को सात दिन बाद रूटीन जांच के लिए बुलाया गया है। ऑपरेशन करने वालों की टीम में कार्डियक सर्जरी विभाग से डॉ. शमशेर सिंह लोहचब, डॉ. अशोक चहल व एनेस्थीसिया विभाग से डॉ. शशि किरण शामिल रही।
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तीन घंटे की सर्जरी कर तीन माह की बच्ची की ब्लॉक नसों को खोला
फोटो सहित
अमर उजाला ब्यूरो
रोहतक।
पंडित भगवत दयाल शर्मा स्वास्थ्य विज्ञान विश्वविद्यालय के लाला श्याम लाल अतिविशिष्ट चिकित्सा केंद्र के कार्डियक सर्जरी विभाग में एक तीन माह की नवजात बच्ची को नवजीवन मिला है। विभागाध्यक्ष डॉ. शमशेर सिंह लोहचब व उनकी टीम ने तीन घंटे का ऑपरेशन कर बच्ची की ब्लॉक नसें खोल कर उसका जीवन बचाया।
पंजाब के तरनतारन से एक परिवार तीन माह की बच्ची को लेकर पीजीआईएमएस आया। यहां ओपीडी में जांच के दौरान डॉक्टरों ने पाया कि शरीर में रक्त सप्लाई करने वाली मुख्य नस में ब्लॉकेज है। डॉ. लोहचब ने बताया कि इस नस की यदि ब्लॉकेज न खोली जाती तो शरीर के निचले हिस्से में रक्त की सप्लाई कम हो जाती। यदि ऊपर रक्त नहीं आता तो दिमाग की नस तक फट सकती थी। इसके साथ हार्ट फेल होने की भी अधिक चांस हो जाते हैं। इसलिए इस ऑपरेशन को जल्द करना एक चैलेंज था। ऑपरेशन के बाद बच्ची फिट है। ऑपरेशन के तीसरे दिन उसे छुट्टी भी दे दी गई है। एक्सपर्ट ने बताया कि तीन माह की बच्ची का संस्थान में यह पहला आपरेशन है। इससे पहले यहां पांच से छह साल के बच्चों का ऑपरेशन यहां किया गया है। बच्ची को सात दिन बाद रूटीन जांच के लिए बुलाया गया है। ऑपरेशन करने वालों की टीम में कार्डियक सर्जरी विभाग से डॉ. शमशेर सिंह लोहचब, डॉ. अशोक चहल व एनेस्थीसिया विभाग से डॉ. शशि किरण शामिल रही।
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