{"_id":"5b3a94bd4f1c1b69578b468e","slug":"61530565821-rohtak-news","type":"story","status":"publish","title_hn":"रोहतक में सफलता मिली तो पूरे राज्य में लागू होगा सेफर कमयूट फॉर स्कूल चिल्ड्रेन","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
रोहतक में सफलता मिली तो पूरे राज्य में लागू होगा सेफर कमयूट फॉर स्कूल चिल्ड्रेन
Updated Tue, 03 Jul 2018 02:40 AM IST
विज्ञापन
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
स्विट्जरलैंड का ‘बॉटनार’ बच्चों का सफर बनाएगा सुरक्षित, बदलेगा ट्रैफिक इंफ्रास्ट्रक्चर
- रोहतक में सफलता मिली तो पूरे राज्य में लागू होगा ‘सेफर कमयूट फॉर स्कूल चिल्ड्रेन’
- रोहतक में पायलेट प्रोजेक्ट के तौर पर पांच स्कूलों को साथ लेकर शुरू किया गया दो वर्षीय प्रोजेक्ट
- प्रोजेक्ट में बच्चोें, माता-पिता और शिक्षकों के साथ मिल घर व स्कूल के बीच सुरक्षित आवागमन बनाया जाएगा
- डब्ल्युआरआई, पुलिस और प्रशासन के सहयोग से बच्चों को ध्यान में रखते हुए ट्रैफिक इंफ्रास्ट्रक्चर में होगा बदलाव
कुशाग्र मिश्रा
रोहतक। क्या आप दावा कर सकते हैं कि आपका बेटी या बेटा स्कूल से घर के बीच आने और जाने के दौरान पूरी तरह से सुरक्षित हैं, शायद नहीं। शहर का ट्रैफिक सिस्टम इतना पुख्ता नहीं है कि सफर सौ फीसदी सुरक्षित हो। अपने बच्चों की सुरक्षा के लिए आप उन्हें स्कूल तक छोड़कर आते हैं और छुट्टी होने पर स्कूल से घर लेकर भी आते हैं या स्कूल ट्रांसपोर्टेशन पर खर्च उठाते है, क्योंकि अनहोनी की आशंका हमेशा रहती है।
माता-पिता का मकसद यही है कि बच्चे का सफर सुरक्षित हो। इसी सोच के साथ ही जिला प्रशासन ने वर्ल्ड रिसोर्सेज इंडिया (डब्ल्यूआरआई) के साथ मिलकर स्विट्जरलैंड की बॉटनार फाउंडेशन के साथ मिलकर रोहतक में दो वर्ष का पायलेट प्रोजेक्ट शुरू किया है। जिला प्रशासन के इस महत्वाकांक्षी प्रोजेक्ट का मकसद है कि शहर में ऐसा ट्रैफिक इंफ्रास्ट्रक्चर तैयार किया जाए, जिससे बच्चों का पैदल या साइकिल पर स्कूल जाने और वहां से घर आने तक का सफर सौ फीसदी सुरक्षित हो, सड़क पर किसी अनहोनी की गुंजाइश ही नहीं रहे। रोड सेफ्टी को लेकर स्वीडन विजन जीरो की तर्ज पर राज्य सरकार ने हरियाणा विजन जीरो की पिछले वर्ष शुरुआत की थी। इसी के अंतर्गत ‘बॉटनार सेफर कम्यूट फॉर स्कूल चिल्ड्रेन’ की शुरुआत की गई है। यह प्रोजेक्ट पूरी तरह से बच्चोें के सुरक्षित सफर पर केंद्रित है। अगर यह पायलेट प्रोजेक्ट सफल रहा तो दो वर्ष पूरे होेने के बाद इसे पूरे हरियाणा में लागू किया जाएगा।
- सरकार के साथ मिलकर बनाया गया कंसोर्टियम
जिला प्रशासन, रोहतक पुलिस, म्युनसिपल कारपोरेशन, डब्ल्यूआरआई इंडिया और नासकॉम फाउंडेशन ने मिलकर एक कंसोर्टियम तैयार किया, जो इस प्रोजेक्ट पर संयुक्त तौर पर काम कर रहे हैं। इस प्रोजेक्ट को नाम दिया गया है ‘बॉटनार सेफर कम्यूट फॉर स्कूल चिल्ड्रेन’। स्विट्जरलैंड की बॉटनार फाउंडेशन पूरे प्रोजेक्ट को फंड कर रही है।
विज्ञापन
- 64 स्कूलों में विजिट करने के बाद पांच स्कूलों को चुना जाएगा
डब्ल्यूआरआई इंडिया की ओर से रोहतक में प्रोजेक्ट के रिसर्च कंसल्टेंट निशांत भटनागर ने बताया कि शहर के 64 स्कूलों को डाटा उपलब्ध हुआ है। सभी स्कूलों में विजिट किया जाएगा, उनसे एक फार्म भरवाया जाएगा। फार्म की स्क्रूटनी के आधार पर पांच स्कूलों को प्रोजेक्ट के लिए चुना जाएगा। स्कूलों में स्टूडेंट्स, पैरेंट्स और शिक्षक से मिलकर बच्चों के सफर को लेकर बात की जाएगी। जिससे पता चलेगा कि बच्चों के सफर के दौरान किस तरह का डर एवं आशंकाएं रहती हैं।
- कक्षा-5 तक और कक्षा-5 से ऊपर की श्रेणियों पर एक साथ होगा काम
कक्षा-5 तक में पढ़ने वाले और कक्षा-5 से ऊपर की कक्षाओं में पढ़ने वाले बच्चों के सफर में अलग-अलग दिक्कतें होंगी। इसी के चलते प्रोजेक्ट में दो श्रेणियों में काम होगा। बच्चों में खतरे को पहचाने की योग्यता विकसित की जाएगी। उसे यह पता होना चाहिए कि सड़क पर खेलना खतरा है, सड़क के बीच में चलना खतरा है आदि।
- बोले उपायुक्त
यह एक महत्वाकांक्षी प्रोजेक्ट है। दो वर्ष का प्रोजेक्ट पूरा होने के बाद ही इसके परिणाम सामने आएंगी। सरकार और प्रशासन का मकसद है कि घर व स्कूल के बीच के सफर को सुरक्षित बनाया जाए। इसके लिए ट्रैफिक इंफ्रास्ट्रक्चर में बदलाव करना पड़े तो वे भी किए जाएंगे। बच्चों में आत्मविश्वास पैदा करना है कि वह अकेला स्कूल जा सकता और वापस भी आ सकता है। चाहे वह पैदल जाए या साइकिल से। रोहतक को इस प्रोजेक्ट के जरिए पूरे हरियाणा में एक मॉडल के तौर पर पेश किया जाएगा।
विज्ञापन
- रोहतक में सफलता मिली तो पूरे राज्य में लागू होगा ‘सेफर कमयूट फॉर स्कूल चिल्ड्रेन’
- रोहतक में पायलेट प्रोजेक्ट के तौर पर पांच स्कूलों को साथ लेकर शुरू किया गया दो वर्षीय प्रोजेक्ट
- प्रोजेक्ट में बच्चोें, माता-पिता और शिक्षकों के साथ मिल घर व स्कूल के बीच सुरक्षित आवागमन बनाया जाएगा
- डब्ल्युआरआई, पुलिस और प्रशासन के सहयोग से बच्चों को ध्यान में रखते हुए ट्रैफिक इंफ्रास्ट्रक्चर में होगा बदलाव
कुशाग्र मिश्रा
रोहतक। क्या आप दावा कर सकते हैं कि आपका बेटी या बेटा स्कूल से घर के बीच आने और जाने के दौरान पूरी तरह से सुरक्षित हैं, शायद नहीं। शहर का ट्रैफिक सिस्टम इतना पुख्ता नहीं है कि सफर सौ फीसदी सुरक्षित हो। अपने बच्चों की सुरक्षा के लिए आप उन्हें स्कूल तक छोड़कर आते हैं और छुट्टी होने पर स्कूल से घर लेकर भी आते हैं या स्कूल ट्रांसपोर्टेशन पर खर्च उठाते है, क्योंकि अनहोनी की आशंका हमेशा रहती है।
माता-पिता का मकसद यही है कि बच्चे का सफर सुरक्षित हो। इसी सोच के साथ ही जिला प्रशासन ने वर्ल्ड रिसोर्सेज इंडिया (डब्ल्यूआरआई) के साथ मिलकर स्विट्जरलैंड की बॉटनार फाउंडेशन के साथ मिलकर रोहतक में दो वर्ष का पायलेट प्रोजेक्ट शुरू किया है। जिला प्रशासन के इस महत्वाकांक्षी प्रोजेक्ट का मकसद है कि शहर में ऐसा ट्रैफिक इंफ्रास्ट्रक्चर तैयार किया जाए, जिससे बच्चों का पैदल या साइकिल पर स्कूल जाने और वहां से घर आने तक का सफर सौ फीसदी सुरक्षित हो, सड़क पर किसी अनहोनी की गुंजाइश ही नहीं रहे। रोड सेफ्टी को लेकर स्वीडन विजन जीरो की तर्ज पर राज्य सरकार ने हरियाणा विजन जीरो की पिछले वर्ष शुरुआत की थी। इसी के अंतर्गत ‘बॉटनार सेफर कम्यूट फॉर स्कूल चिल्ड्रेन’ की शुरुआत की गई है। यह प्रोजेक्ट पूरी तरह से बच्चोें के सुरक्षित सफर पर केंद्रित है। अगर यह पायलेट प्रोजेक्ट सफल रहा तो दो वर्ष पूरे होेने के बाद इसे पूरे हरियाणा में लागू किया जाएगा।
विज्ञापन
- सरकार के साथ मिलकर बनाया गया कंसोर्टियम
जिला प्रशासन, रोहतक पुलिस, म्युनसिपल कारपोरेशन, डब्ल्यूआरआई इंडिया और नासकॉम फाउंडेशन ने मिलकर एक कंसोर्टियम तैयार किया, जो इस प्रोजेक्ट पर संयुक्त तौर पर काम कर रहे हैं। इस प्रोजेक्ट को नाम दिया गया है ‘बॉटनार सेफर कम्यूट फॉर स्कूल चिल्ड्रेन’। स्विट्जरलैंड की बॉटनार फाउंडेशन पूरे प्रोजेक्ट को फंड कर रही है।
विज्ञापन
- 64 स्कूलों में विजिट करने के बाद पांच स्कूलों को चुना जाएगा
डब्ल्यूआरआई इंडिया की ओर से रोहतक में प्रोजेक्ट के रिसर्च कंसल्टेंट निशांत भटनागर ने बताया कि शहर के 64 स्कूलों को डाटा उपलब्ध हुआ है। सभी स्कूलों में विजिट किया जाएगा, उनसे एक फार्म भरवाया जाएगा। फार्म की स्क्रूटनी के आधार पर पांच स्कूलों को प्रोजेक्ट के लिए चुना जाएगा। स्कूलों में स्टूडेंट्स, पैरेंट्स और शिक्षक से मिलकर बच्चों के सफर को लेकर बात की जाएगी। जिससे पता चलेगा कि बच्चों के सफर के दौरान किस तरह का डर एवं आशंकाएं रहती हैं।
- कक्षा-5 तक और कक्षा-5 से ऊपर की श्रेणियों पर एक साथ होगा काम
कक्षा-5 तक में पढ़ने वाले और कक्षा-5 से ऊपर की कक्षाओं में पढ़ने वाले बच्चों के सफर में अलग-अलग दिक्कतें होंगी। इसी के चलते प्रोजेक्ट में दो श्रेणियों में काम होगा। बच्चों में खतरे को पहचाने की योग्यता विकसित की जाएगी। उसे यह पता होना चाहिए कि सड़क पर खेलना खतरा है, सड़क के बीच में चलना खतरा है आदि।
- बोले उपायुक्त
यह एक महत्वाकांक्षी प्रोजेक्ट है। दो वर्ष का प्रोजेक्ट पूरा होने के बाद ही इसके परिणाम सामने आएंगी। सरकार और प्रशासन का मकसद है कि घर व स्कूल के बीच के सफर को सुरक्षित बनाया जाए। इसके लिए ट्रैफिक इंफ्रास्ट्रक्चर में बदलाव करना पड़े तो वे भी किए जाएंगे। बच्चों में आत्मविश्वास पैदा करना है कि वह अकेला स्कूल जा सकता और वापस भी आ सकता है। चाहे वह पैदल जाए या साइकिल से। रोहतक को इस प्रोजेक्ट के जरिए पूरे हरियाणा में एक मॉडल के तौर पर पेश किया जाएगा।