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विडंबना : 200 छात्राओं की पढ़ाई पर संकट!
Updated Sat, 09 Dec 2017 11:29 PM IST
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दस गांवों की 200 छात्राओं की पढ़ाई पर संकट!
अमर उजाला ब्यूरो
कोसली।
कोसली-कनीना मार्ग पर यात्रियों के कम दबाव के कारण रोडवेज की बसों का संचालन बंद होने से करीब 200 छात्राओं की पढ़ाई संकट में आ गई है। इस रूट के गांवों के लोगों और शिक्षण संस्थानों से जुड़े बच्चों ने सड़कों पर उतरकर प्रदर्शन भी किया है। तब अधिकारियों ने आश्वासन देकर लोगों को शांत तो कराया लेकिन समस्या का समाधान आज नहीं हुआ है। अब अधिकारियों का तर्क है कि उनको इस समस्या के बारे में कोई जानकारी नहीं है। दूसरी तरफ करीब दस गांवों के ग्रामीणों और बच्चों ने एक बार फिर सड़कों पर उतरकर आरपार का संघर्ष करने का मन बना लिया है। वर्तमान में इन गांवों की बेटियां जान पर खेलकर इस रूट पर चलने वाले प्राइवेट, मालवाहक और अन्य वाहनों पर लटककर शिक्षण संस्थानों तक पहुंच रहीं हैं। इसके बाद शाम को भी शिक्षण संस्थानों से लौटना किसी जंग लड़ने से कम नहीं है। ऐसे में अभिभावकों का कहना है कि बेटियों को रोजाना शिक्षण संस्थानों तक छोड़ना और लाना उनके लिए संभव नहीं है। इसके अलावा इस मार्ग पर सुबह छह और सात बजे जबकि शाम को पांच और छह बजे के मध्य दो रोडवेज की बसें चलती हैं, उनका बच्चों के लिए कोई उपयोगिता नहीं है। वर्तमान में इन गांवों की बेटियां करीब 25 किलोमीटर दूर कनीना और नाहड़ के कॉलेज जा रही हैं।
जितने बड़े गांव उतनी बड़ी परेशानी
कोसली-कनीना मार्ग पर दस से ज्यादा गांव स्थित हैं। गुजरवास, लूखी, कोटिया, बव्वा, कारोली, बिसोहा सहित 10 गांवों के लोग इस समस्या से परेशान हैं। इन गांवों में शिक्षा का स्तर बहुत अच्छा है। यहां से करीब 200 छात्राएं पढ़ाई के लिए एक दूसरे से करीब 25 किलोमीटर दूर स्थित नाहड़ और कनीना के कॉलेजों में जाती हैं। अब साधनों के अभाव में सब अटक रहा है।
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दो साल से बनी परेशानी
करीब दो साल पहले तक यहां सब कुछ ठीक था। इस मार्ग पर रोहतक, झज्जर, रेवाड़ी और नारनौल डिपो की बसें चलती थीं। धीरे-धीरे बसें बंद होती चली गईं। बंद होने का कारण यात्री भार का कम होना बताया गया। इसके अतिरिक्त चार बसें सहकारी समितियों की भी चलती थी। वह भी घाटे के चलते बंद हो गई। इस सबका सर्वाधिक प्रभाव बेटियों की पढ़ाई पर पड़ रहा है।
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पिछले साल बेटियों ने लगाया था जाम
समस्या को लेकर लूखी-कारोली की बेटियों ने गत वर्ष दिसंबर माह में इस मार्ग पर जाम लगाया था। करीब पांच घंटे तक लगे जाम के बाद अधिकारियों ने समस्या के समाधान का आश्वासन देकर जाम तो खुलवा तो दिया लेकिन बस नहीं चली।
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कोसली-कनीना मार्ग पर बस सेवा की कमी की जानकारी मुझे नहीं हैं। समस्या का समाधान किया जाएगा। बेटियों की पढ़ाई बाधित नहीं होने दी जाएगी। - नरेंद्र यादव, एसडीएम, कोसली
कोसली-कनीना सड़क मार्ग पर यातायात के साधनों की स्थिति बहुत खराब है। निजी वाहनों में लटककर जाना पड़ता है। इसका समाधान होना चाहिए।
पढ़ाई पर असर पड़ रहा है। - कोमल, टूमड़ा
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कॉलेज जाना बहुत मुश्किल हो गया है। साधन कोई है नहीं। कई बार प्रशासन से इसके लिए मांग कर चुके हैं, लेकिन हल नहीं निकला है। - सुनीता, नयागांव
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साधनों के अभाव में पढ़ाई मुश्किल हो गई है। कॉलेज कैसे जाएं। समझ ही नहीं आता। इसका समाधान निकाला जाना चाहिए। - रिंकू, छात्रा
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पहले इस रोड पर काफी बसें जाती थीं, लेकिन अब वह बंद हो गई है। ऐेसे में मुसीबत बढ़ गई है। अब उनकी पढ़ाई पर संकट के बादल मंडरा रहे हैं। - मनीषा, छात्रा
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बसों की अगर समस्या है तो इसका समाधान कराया जाएगा। बेटियों को परेशानी नहीं होने दी जाएगी। - लाजपत राय, जीएम, रोडवेज
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मांग बिल्कुल जायज है। इसका समाधान होना चाहिए। हम भी अपने स्तर पर इसके लिए प्रयास करेंगे। - विक्रम सिंह यादव, विधायक, कोसली
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अमर उजाला ब्यूरो
कोसली।
कोसली-कनीना मार्ग पर यात्रियों के कम दबाव के कारण रोडवेज की बसों का संचालन बंद होने से करीब 200 छात्राओं की पढ़ाई संकट में आ गई है। इस रूट के गांवों के लोगों और शिक्षण संस्थानों से जुड़े बच्चों ने सड़कों पर उतरकर प्रदर्शन भी किया है। तब अधिकारियों ने आश्वासन देकर लोगों को शांत तो कराया लेकिन समस्या का समाधान आज नहीं हुआ है। अब अधिकारियों का तर्क है कि उनको इस समस्या के बारे में कोई जानकारी नहीं है। दूसरी तरफ करीब दस गांवों के ग्रामीणों और बच्चों ने एक बार फिर सड़कों पर उतरकर आरपार का संघर्ष करने का मन बना लिया है। वर्तमान में इन गांवों की बेटियां जान पर खेलकर इस रूट पर चलने वाले प्राइवेट, मालवाहक और अन्य वाहनों पर लटककर शिक्षण संस्थानों तक पहुंच रहीं हैं। इसके बाद शाम को भी शिक्षण संस्थानों से लौटना किसी जंग लड़ने से कम नहीं है। ऐसे में अभिभावकों का कहना है कि बेटियों को रोजाना शिक्षण संस्थानों तक छोड़ना और लाना उनके लिए संभव नहीं है। इसके अलावा इस मार्ग पर सुबह छह और सात बजे जबकि शाम को पांच और छह बजे के मध्य दो रोडवेज की बसें चलती हैं, उनका बच्चों के लिए कोई उपयोगिता नहीं है। वर्तमान में इन गांवों की बेटियां करीब 25 किलोमीटर दूर कनीना और नाहड़ के कॉलेज जा रही हैं।
जितने बड़े गांव उतनी बड़ी परेशानी
कोसली-कनीना मार्ग पर दस से ज्यादा गांव स्थित हैं। गुजरवास, लूखी, कोटिया, बव्वा, कारोली, बिसोहा सहित 10 गांवों के लोग इस समस्या से परेशान हैं। इन गांवों में शिक्षा का स्तर बहुत अच्छा है। यहां से करीब 200 छात्राएं पढ़ाई के लिए एक दूसरे से करीब 25 किलोमीटर दूर स्थित नाहड़ और कनीना के कॉलेजों में जाती हैं। अब साधनों के अभाव में सब अटक रहा है।
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दो साल से बनी परेशानी
करीब दो साल पहले तक यहां सब कुछ ठीक था। इस मार्ग पर रोहतक, झज्जर, रेवाड़ी और नारनौल डिपो की बसें चलती थीं। धीरे-धीरे बसें बंद होती चली गईं। बंद होने का कारण यात्री भार का कम होना बताया गया। इसके अतिरिक्त चार बसें सहकारी समितियों की भी चलती थी। वह भी घाटे के चलते बंद हो गई। इस सबका सर्वाधिक प्रभाव बेटियों की पढ़ाई पर पड़ रहा है।
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पिछले साल बेटियों ने लगाया था जाम
समस्या को लेकर लूखी-कारोली की बेटियों ने गत वर्ष दिसंबर माह में इस मार्ग पर जाम लगाया था। करीब पांच घंटे तक लगे जाम के बाद अधिकारियों ने समस्या के समाधान का आश्वासन देकर जाम तो खुलवा तो दिया लेकिन बस नहीं चली।
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कोसली-कनीना मार्ग पर बस सेवा की कमी की जानकारी मुझे नहीं हैं। समस्या का समाधान किया जाएगा। बेटियों की पढ़ाई बाधित नहीं होने दी जाएगी। - नरेंद्र यादव, एसडीएम, कोसली
कोसली-कनीना सड़क मार्ग पर यातायात के साधनों की स्थिति बहुत खराब है। निजी वाहनों में लटककर जाना पड़ता है। इसका समाधान होना चाहिए।
पढ़ाई पर असर पड़ रहा है। - कोमल, टूमड़ा
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कॉलेज जाना बहुत मुश्किल हो गया है। साधन कोई है नहीं। कई बार प्रशासन से इसके लिए मांग कर चुके हैं, लेकिन हल नहीं निकला है। - सुनीता, नयागांव
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साधनों के अभाव में पढ़ाई मुश्किल हो गई है। कॉलेज कैसे जाएं। समझ ही नहीं आता। इसका समाधान निकाला जाना चाहिए। - रिंकू, छात्रा
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पहले इस रोड पर काफी बसें जाती थीं, लेकिन अब वह बंद हो गई है। ऐेसे में मुसीबत बढ़ गई है। अब उनकी पढ़ाई पर संकट के बादल मंडरा रहे हैं। - मनीषा, छात्रा
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बसों की अगर समस्या है तो इसका समाधान कराया जाएगा। बेटियों को परेशानी नहीं होने दी जाएगी। - लाजपत राय, जीएम, रोडवेज
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मांग बिल्कुल जायज है। इसका समाधान होना चाहिए। हम भी अपने स्तर पर इसके लिए प्रयास करेंगे। - विक्रम सिंह यादव, विधायक, कोसली