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रोहतक की नातिन ने पूरे देश में नाम किया रोशन
Updated Sun, 19 Nov 2017 03:38 AM IST
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चीन में चमकी नातिन, नानी नाची रोहतक में
- रोहतक की नातिन मानुषी ने पूरे विश्व में नाम किया रोशन
- नानी को एक दिन पहले रात में फोन कर जन्मदिन की दी थी बधाई
- नानी के हाथ के कढ़ी-चावल हैं मानुषी को सबसे ज्यादा पसंद
मयंक तिवारीे
रोहतक।
कहते हैं कि पूत के पांव पालने में ही नजर आने लगते हैं। यह बात रोहतक में जन्मी मानुषी छिल्लर पर चरितार्थ होती है। उसने वह कर दिखाया जिसकी लोगों को उसके बचपन से ही उम्मीद थी।
तिलक नगर कॉलोनी में जन्मी मानुषी की प्राथमिक शिक्षा रोहतक में हुई है। परिवार के साथ रहने के दौरान उसका नाना व नानी से कुछ खास ही लगाव था। परिवार में साथ रहने के साथ समय मिलने पर पुरानी आईटीआई कॉलोनी में रहने वाले नाना-नानी के पास जाती थी। इतना ही नहीं जिस दिन नानी के घर पर कढ़ी-चावल बने होते थे तो वह इसे खाना नहीं भूलती थीं।
नाना चन्द्र सिंह सेहरावत भवन व सड़क विभाग विभाग में कार्यकारी अभियंता के पद से सेवा रिटायर हुए हैं। वह कहते हैं कि मानुषी बचपन से ही अलग थी। स्वच्छता उसकी हॉबी थी। वह नाना के घर आती थी तो गार्डन में पौधोें की देखरेख और अन्य साफ-सफाई पर ध्यान देती थी।
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सोनीपत में पढ़ाई के दौरान शनिवार की शाम को आती थी नानी के पास
मानुषी वीपीएस राजकीय मेडिकल कॉलेज में तृतीय वर्ष की छात्रा है। उसके माता-पिता दिल्ली रहते हैं। अक्सर वह सोनीपत से अपनी नानी के पास शनिवार को आ जाती थी और सोमवार की सुबह सोनीपत कालेज चली जाती थी। जब उसे पढ़ाई को लेकर कोई आवश्यकता होती थी तो दिल्ली में अपने माता-पिता के पास जाती थी। उसके माता-पिता दोनों ही डॉक्टर हैं।
दुबली-पतली नातिन नानी को रसोई में नहीं जाने देती थी
नानी सावित्री सेहरावत कहती है कि उनकी नातिन बहुत दुबली-पतली थी और खाने-पीने का बहुत खयाल रखती थी। ज्यादा तली-भुनी चीज उसे नहीं पसंद है। उसके आने पर जब वह रसोई में जाती तो वह मना कर देती। उसके रहते हुए रसोई में जाने का मौका नहीं मिलता है। ननिहाल में आने पर ज्यादा समय नानी के साथ ही बिताना चाहती है।
ममेरी बहन पलक से थी ज्यादा दोस्ती
ननिहाल में उसकी सबसे प्रिय बहन पलक सेहरावत है। वह स्नातक की पढ़ाई कर रही है। वह कहती है कि दीदी पढ़ाई के समय भी बचपन में मॉडलिंग व अन्य किताबें ज्यादा देखती थी और कहती थी कि तेरी बहन को ऐसा बनना है।
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चीन में चमकी नातिन, नानी नाची रोहतक में
- रोहतक की नातिन मानुषी ने पूरे विश्व में नाम किया रोशन
- नानी को एक दिन पहले रात में फोन कर जन्मदिन की दी थी बधाई
- नानी के हाथ के कढ़ी-चावल हैं मानुषी को सबसे ज्यादा पसंद
मयंक तिवारीे
रोहतक।
कहते हैं कि पूत के पांव पालने में ही नजर आने लगते हैं। यह बात रोहतक में जन्मी मानुषी छिल्लर पर चरितार्थ होती है। उसने वह कर दिखाया जिसकी लोगों को उसके बचपन से ही उम्मीद थी।
तिलक नगर कॉलोनी में जन्मी मानुषी की प्राथमिक शिक्षा रोहतक में हुई है। परिवार के साथ रहने के दौरान उसका नाना व नानी से कुछ खास ही लगाव था। परिवार में साथ रहने के साथ समय मिलने पर पुरानी आईटीआई कॉलोनी में रहने वाले नाना-नानी के पास जाती थी। इतना ही नहीं जिस दिन नानी के घर पर कढ़ी-चावल बने होते थे तो वह इसे खाना नहीं भूलती थीं।
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नाना चन्द्र सिंह सेहरावत भवन व सड़क विभाग विभाग में कार्यकारी अभियंता के पद से सेवा रिटायर हुए हैं। वह कहते हैं कि मानुषी बचपन से ही अलग थी। स्वच्छता उसकी हॉबी थी। वह नाना के घर आती थी तो गार्डन में पौधोें की देखरेख और अन्य साफ-सफाई पर ध्यान देती थी।
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सोनीपत में पढ़ाई के दौरान शनिवार की शाम को आती थी नानी के पास
मानुषी वीपीएस राजकीय मेडिकल कॉलेज में तृतीय वर्ष की छात्रा है। उसके माता-पिता दिल्ली रहते हैं। अक्सर वह सोनीपत से अपनी नानी के पास शनिवार को आ जाती थी और सोमवार की सुबह सोनीपत कालेज चली जाती थी। जब उसे पढ़ाई को लेकर कोई आवश्यकता होती थी तो दिल्ली में अपने माता-पिता के पास जाती थी। उसके माता-पिता दोनों ही डॉक्टर हैं।
दुबली-पतली नातिन नानी को रसोई में नहीं जाने देती थी
नानी सावित्री सेहरावत कहती है कि उनकी नातिन बहुत दुबली-पतली थी और खाने-पीने का बहुत खयाल रखती थी। ज्यादा तली-भुनी चीज उसे नहीं पसंद है। उसके आने पर जब वह रसोई में जाती तो वह मना कर देती। उसके रहते हुए रसोई में जाने का मौका नहीं मिलता है। ननिहाल में आने पर ज्यादा समय नानी के साथ ही बिताना चाहती है।
ममेरी बहन पलक से थी ज्यादा दोस्ती
ननिहाल में उसकी सबसे प्रिय बहन पलक सेहरावत है। वह स्नातक की पढ़ाई कर रही है। वह कहती है कि दीदी पढ़ाई के समय भी बचपन में मॉडलिंग व अन्य किताबें ज्यादा देखती थी और कहती थी कि तेरी बहन को ऐसा बनना है।