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लिखकर दें, 100 किलोग्राम से ज्यादा जनरेट नहीं करते कचरा प्रतिदिन
Updated Tue, 26 Jun 2018 02:40 AM IST
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सरकारी व गैर सरकारी संस्थान व बिल्डिंग मालिक लिखकर दें, नहीं करते 100 किलोग्राम हर रोज वेस्ट जनरेट
- एनजीटी व पर्यावरण विभाग की टीम आज आ सकती है रोहतक
- बुलक जनरेट की श्रेणी में आने वाले सरकारी व गैर सरकारी संस्थान होंगे जांच के दायरे में
अमर उजाला ब्यूरो
रोहतक। नेशनल ग्रीन ट्रिब्युनल और केंद्रीय पर्यावरण विभाग की संयुक्त टीम मंगलवार को रोहतक आकर उन संस्थान व बिल्डिंगों की जांच कर सकती है, जहां 100 किलोग्राम से ज्यादा प्रतिदिन कचरा उत्पादन किया जाता है। ऐसे संस्थान बुलक जनरेट श्रेणी में आते हैं, जिसमें रोहतक के एमडीयू व पीजीआई को माना जाता है। इसके चलते निगम ने होटल, रेस्टोरेंट, आरडब्ल्यू और मार्केट एसोसिएशन से लिखित में मांगा है कि वे बुलक जनरेट की श्रेणी में नहीं आते । जांच के दौरान पकड़े जाएं तो खुद ही जिम्मेदार होंगे।
बता दें कि एनजीटी के नियमों के तहत 100 किलोग्राम या इससे ज्यादा हर रोज कचरा उत्पादन करने वाले संस्थान या बिल्डिंग में कचरा निस्तारण की उचित व्यवस्था होनी चाहिए। कचरा पैदा होने से लेकर उसे रि-साइकिल करने की पूरी व्यवस्था होनी चाहिए। निगम के सूत्रों ने बताया कि एनजीटी की टीम मंगलवार को रोहतक आ सकती है। संभावना है कि टीम सबसे पहले पीजीआई में जांच पड़ताल करेगी, जहां मेडिकल वेस्ट निकलता है। रोहतक के अंदर पीजीआई व एमडीयू ही ऐसे संस्थान हैं, जो बुलक वेस्ट जनरेट की श्रेणी में आते हैं। हालांकि टीम कहीं भी जाकर जांच पड़ताल कर सकती है।
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- एनजीटी व पर्यावरण विभाग की टीम आज आ सकती है रोहतक
- बुलक जनरेट की श्रेणी में आने वाले सरकारी व गैर सरकारी संस्थान होंगे जांच के दायरे में
अमर उजाला ब्यूरो
रोहतक। नेशनल ग्रीन ट्रिब्युनल और केंद्रीय पर्यावरण विभाग की संयुक्त टीम मंगलवार को रोहतक आकर उन संस्थान व बिल्डिंगों की जांच कर सकती है, जहां 100 किलोग्राम से ज्यादा प्रतिदिन कचरा उत्पादन किया जाता है। ऐसे संस्थान बुलक जनरेट श्रेणी में आते हैं, जिसमें रोहतक के एमडीयू व पीजीआई को माना जाता है। इसके चलते निगम ने होटल, रेस्टोरेंट, आरडब्ल्यू और मार्केट एसोसिएशन से लिखित में मांगा है कि वे बुलक जनरेट की श्रेणी में नहीं आते । जांच के दौरान पकड़े जाएं तो खुद ही जिम्मेदार होंगे।
बता दें कि एनजीटी के नियमों के तहत 100 किलोग्राम या इससे ज्यादा हर रोज कचरा उत्पादन करने वाले संस्थान या बिल्डिंग में कचरा निस्तारण की उचित व्यवस्था होनी चाहिए। कचरा पैदा होने से लेकर उसे रि-साइकिल करने की पूरी व्यवस्था होनी चाहिए। निगम के सूत्रों ने बताया कि एनजीटी की टीम मंगलवार को रोहतक आ सकती है। संभावना है कि टीम सबसे पहले पीजीआई में जांच पड़ताल करेगी, जहां मेडिकल वेस्ट निकलता है। रोहतक के अंदर पीजीआई व एमडीयू ही ऐसे संस्थान हैं, जो बुलक वेस्ट जनरेट की श्रेणी में आते हैं। हालांकि टीम कहीं भी जाकर जांच पड़ताल कर सकती है।
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