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दिल्ली एनसीआर में डेंगू और चिकनगुनिया की दस्तक से हड़कंप
Updated Sat, 24 Jun 2017 02:48 AM IST
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अमर उजाला ब्यूरो
रोहतक। दिल्ली और एनसीआर में चिकनगुनिया के 150 और डेंगू के 90 मरीज सामने आने से हरियाणा में भी हड़कंप मचा है। सिविल सर्जन कार्यालय ने मलेरिया शाखा को भी अलर्ट कर दिया है। इस बीमारी को फैलने से रोकने के लिए एक्सपर्ट के अलावा 135 एमपीएचडब्ल्यू, 28 एचआई, दो एसएमआई, एसएमओ और एमओ की ड्यूटी लगाई गई है।
स्वास्थ्य विभाग के अनुसार जिले में दिमागी बुखार के मरीज नहीं हैं, लेकिन डेंगू और चिकनगुनिया के मरीज हर साल स्वास्थ्य विभाग के लिए मुसीबत खड़ी कर देते हैं। इसके लिए जिला स्तर पर एंटी लारवा एक्टिविटी चलाकर लोगों को जागरूक किया जाता है। विभाग के लिए चुनौती होती है कि अन्य राज्यों से आने वाले मरीज यदि जिले में उपचार लेते हैं तो उनका रिकार्ड उनके पास आ जाता है। इसके बाद उन्हें तलाशना मुश्किल हो जाता है। सिविल सर्जन डॉ. दीपा जाखड़ का कहना है कि उनका विभाग इस साल मौसमी बीमारी से निपटने को तैयार है। इसके लिए उनके पास पर्याप्त बजट है और इस साल से उनके डॉक्टर जरूरत पड़ने पर दवाएं भी खरीद सकते हैं। अधिकारी ने बताया कि जून माह में मलेरिया के 13 केस सामने आए हैं। विभाग के पास दवाओं के लिए स्पेशल बजट है, इससे किसी मरीज को समस्या नहीं आएगी।
जिलावार आंकडे़
वर्ष डेंगू चिकनगुनिया मलेरिया
सस्पेक्टेड-कंफर्म
2006 0-54 0 4.3
2007 0-16 12 1.76
2008 0-75 3 1.45
2009 0-6 0 0.72
2010 11-21 1 0.76
2011 0-11 0 1.29
2012 1-14 0 1.04
2013 79-55 0 0.28
2014 2-1 0 0.06
2015 279-3937 0 0.08
2016 1-183 938 0.09
कूलर और पक्षियों के बर्तन रखें साफ
एक्सपर्ट का कहना है कि आमजन कूलर का पानी और पक्षियों के बर्तन का पानी फेंक कर अकसर मान लेते हैं कि वह सुरक्षित हैं। लेकिन ऐसा नहीं है। जब तक कपडे़ से इसे साफ नहीं किया जाता, मच्छर का अंडा रह जाता है। अंडे को सुरक्षित रहने के लिए महज हल्की नमी की जरूरत होती है। चाहे एक साल बार फिर उसमें पानी डाला जाए तो अंडे की अगली प्रक्रिया शुरू हो जाती है। गौरतलब है कि स्वास्थ्य विभाग मरीज की मच्छर जनित बीमारी की पाजिटिव रिपोर्ट आने पर उसके क्षेत्र के आसपास फॉगिंग करवाने के अलावा उनकी रक्त जांच करवाता है।
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रोहतक। दिल्ली और एनसीआर में चिकनगुनिया के 150 और डेंगू के 90 मरीज सामने आने से हरियाणा में भी हड़कंप मचा है। सिविल सर्जन कार्यालय ने मलेरिया शाखा को भी अलर्ट कर दिया है। इस बीमारी को फैलने से रोकने के लिए एक्सपर्ट के अलावा 135 एमपीएचडब्ल्यू, 28 एचआई, दो एसएमआई, एसएमओ और एमओ की ड्यूटी लगाई गई है।
स्वास्थ्य विभाग के अनुसार जिले में दिमागी बुखार के मरीज नहीं हैं, लेकिन डेंगू और चिकनगुनिया के मरीज हर साल स्वास्थ्य विभाग के लिए मुसीबत खड़ी कर देते हैं। इसके लिए जिला स्तर पर एंटी लारवा एक्टिविटी चलाकर लोगों को जागरूक किया जाता है। विभाग के लिए चुनौती होती है कि अन्य राज्यों से आने वाले मरीज यदि जिले में उपचार लेते हैं तो उनका रिकार्ड उनके पास आ जाता है। इसके बाद उन्हें तलाशना मुश्किल हो जाता है। सिविल सर्जन डॉ. दीपा जाखड़ का कहना है कि उनका विभाग इस साल मौसमी बीमारी से निपटने को तैयार है। इसके लिए उनके पास पर्याप्त बजट है और इस साल से उनके डॉक्टर जरूरत पड़ने पर दवाएं भी खरीद सकते हैं। अधिकारी ने बताया कि जून माह में मलेरिया के 13 केस सामने आए हैं। विभाग के पास दवाओं के लिए स्पेशल बजट है, इससे किसी मरीज को समस्या नहीं आएगी।
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जिलावार आंकडे़
वर्ष डेंगू चिकनगुनिया मलेरिया
सस्पेक्टेड-कंफर्म
2006 0-54 0 4.3
2007 0-16 12 1.76
2008 0-75 3 1.45
2009 0-6 0 0.72
2010 11-21 1 0.76
2011 0-11 0 1.29
2012 1-14 0 1.04
2013 79-55 0 0.28
2014 2-1 0 0.06
2015 279-3937 0 0.08
2016 1-183 938 0.09
कूलर और पक्षियों के बर्तन रखें साफ
एक्सपर्ट का कहना है कि आमजन कूलर का पानी और पक्षियों के बर्तन का पानी फेंक कर अकसर मान लेते हैं कि वह सुरक्षित हैं। लेकिन ऐसा नहीं है। जब तक कपडे़ से इसे साफ नहीं किया जाता, मच्छर का अंडा रह जाता है। अंडे को सुरक्षित रहने के लिए महज हल्की नमी की जरूरत होती है। चाहे एक साल बार फिर उसमें पानी डाला जाए तो अंडे की अगली प्रक्रिया शुरू हो जाती है। गौरतलब है कि स्वास्थ्य विभाग मरीज की मच्छर जनित बीमारी की पाजिटिव रिपोर्ट आने पर उसके क्षेत्र के आसपास फॉगिंग करवाने के अलावा उनकी रक्त जांच करवाता है।
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