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Rohtak News: जेएलएन नहर में स्टोर 300 क्यूसेक पानी पड़ा काला, दुर्गंध भी आ रही
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26सीटीके29 जेएलएन नहर से शहर में जलघरों के लिए सप्लाई होता काला पानी। संवाद
रोहतक। जेएलएन व बीएसबी नहर से जलापूर्ति बंद हो गई है। जेएलएन नहर में स्टोर किए गए पानी की लिफ्टिंग कर जलघरों तक पहुंचाया जा रहा है। अब नहरबंदी तक जेएलएन नहर में स्टोर किया पानी ही शहर के लिए प्रयोग किया जाएगा, लेकिन पानी काला पड़ गया है। नहर के पास में खड़े रहने से दुर्गंध भी आनी शुरू हो गई है।
जेएलएन में 14 मई व बीएसबी नहर में 24 मई को जलापूर्ति बंद हुई है। घरों में सुचारु आपूर्ति के लिए जेएलएन में पानी स्टोर किया गया है। जनस्वास्थ्य विभाग की मांग पर सिंचाई विभाग ने मायना के पास शटर डाउन कर शहर के लिए करीब 300 क्यूसेक पानी स्टोर कर रखा है। जो अगले 11 दिन तक प्रयोग किया जाना है, लेकिन 14 मई के बाद से स्टोर किए गए पानी का रंग काला पड़ गया और दुर्गंध भी आनी शुरू हो गई है। गर्मियाें में नहरीबंदी के बाद पानी अक्सर काला होने की समस्या आती है। अप्रैल में भी पानी बिल्कुल काला हो गया था।
इसको लेकर जन स्वास्थ्य विभाग के अधिकारियों का कहना है कि पानी को सीधे नहरों से नलों में सप्लाई नहीं किया जा रहा है, बल्कि वाटर ट्रीटमेंट प्लांट से पूरी तक शुद्ध किया जा रहा है। बहते पानी में किसी प्रकार की अधिक समस्या नहीं होती, लेकिन नहर में किसी भी तरह कुछ डालना ठीक नहीं है।
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इधर, सेक्टर-1 के हाउसिंग बोर्ड में दूषित जलापूर्ति हो रही है। स्थानीय निवासी सतवीर ने बताया कि पीना से दुर्गंध आ रही है, इसे पीना तो दूर स्नान भी नहीं कर सकते।
वाटर ट्रीटमेंट प्लांट से हो रहा पानी शुद्ध
जन स्वास्थ्य विभाग के अधिकारियों ने बताया कि नहर से जलघरों में पानी पहुंचता है। इसके बाद पानी वाटर टैंक में आता है। पानी की गुणवत्ता अनुसार उसमें फिटकरी (एएलयूएम) डाली जाती है, जिससे पानी के कीटाणुओं को खत्म किया जाता है। करीब पांच चरणों में पानी की गंदगी को अलग किया जाता है।
रैपिड सेंड फिल्टर से पानी करीब 100 प्रतिशत साफ हो जाता है। इसके बाद बाद भी भी प्राकृतिक तरीके से पानी को शुद्ध किया जाता है। वाटर ट्रीटमेंट प्लांट से पानी शुद्ध करने पर ही घरों में सप्लाई किया जाता है।
आंधी से धूल-मिट्टी के कारण पानी का रंग बदला है। नहरी पानी वाटर ट्रीटमेंट प्लांट से शुद्ध किया जा रहा है। लोगों को नल से बिल्कुल साफ पानी मिल रहा है।
- प्रदीप कुमार, एसडीओ, जन स्वास्थ्य विभाग।
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जेएलएन में 14 मई व बीएसबी नहर में 24 मई को जलापूर्ति बंद हुई है। घरों में सुचारु आपूर्ति के लिए जेएलएन में पानी स्टोर किया गया है। जनस्वास्थ्य विभाग की मांग पर सिंचाई विभाग ने मायना के पास शटर डाउन कर शहर के लिए करीब 300 क्यूसेक पानी स्टोर कर रखा है। जो अगले 11 दिन तक प्रयोग किया जाना है, लेकिन 14 मई के बाद से स्टोर किए गए पानी का रंग काला पड़ गया और दुर्गंध भी आनी शुरू हो गई है। गर्मियाें में नहरीबंदी के बाद पानी अक्सर काला होने की समस्या आती है। अप्रैल में भी पानी बिल्कुल काला हो गया था।
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इसको लेकर जन स्वास्थ्य विभाग के अधिकारियों का कहना है कि पानी को सीधे नहरों से नलों में सप्लाई नहीं किया जा रहा है, बल्कि वाटर ट्रीटमेंट प्लांट से पूरी तक शुद्ध किया जा रहा है। बहते पानी में किसी प्रकार की अधिक समस्या नहीं होती, लेकिन नहर में किसी भी तरह कुछ डालना ठीक नहीं है।
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इधर, सेक्टर-1 के हाउसिंग बोर्ड में दूषित जलापूर्ति हो रही है। स्थानीय निवासी सतवीर ने बताया कि पीना से दुर्गंध आ रही है, इसे पीना तो दूर स्नान भी नहीं कर सकते।
वाटर ट्रीटमेंट प्लांट से हो रहा पानी शुद्ध
जन स्वास्थ्य विभाग के अधिकारियों ने बताया कि नहर से जलघरों में पानी पहुंचता है। इसके बाद पानी वाटर टैंक में आता है। पानी की गुणवत्ता अनुसार उसमें फिटकरी (एएलयूएम) डाली जाती है, जिससे पानी के कीटाणुओं को खत्म किया जाता है। करीब पांच चरणों में पानी की गंदगी को अलग किया जाता है।
रैपिड सेंड फिल्टर से पानी करीब 100 प्रतिशत साफ हो जाता है। इसके बाद बाद भी भी प्राकृतिक तरीके से पानी को शुद्ध किया जाता है। वाटर ट्रीटमेंट प्लांट से पानी शुद्ध करने पर ही घरों में सप्लाई किया जाता है।
आंधी से धूल-मिट्टी के कारण पानी का रंग बदला है। नहरी पानी वाटर ट्रीटमेंट प्लांट से शुद्ध किया जा रहा है। लोगों को नल से बिल्कुल साफ पानी मिल रहा है।
- प्रदीप कुमार, एसडीओ, जन स्वास्थ्य विभाग।

26सीटीके29 जेएलएन नहर से शहर में जलघरों के लिए सप्लाई होता काला पानी। संवाद