{"_id":"5a2861c84f1c1b74698c040e","slug":"21512595912-rohtak-news","type":"story","status":"publish","title_hn":"एसयूसीआई कम्युनिस्ट ने मनाया काला दिवस, शहर में निकाला जुलूस","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
एसयूसीआई कम्युनिस्ट ने मनाया काला दिवस, शहर में निकाला जुलूस
Updated Thu, 07 Dec 2017 03:01 AM IST
विज्ञापन
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
फोटो समेत
एसयूसीआई कम्युनिस्ट ने मनाया काला दिवस, शहर में निकाला जुलूस
- बाबरी मस्जिद ढहाने की 25वीं बरसी पर किया गया कार्यक्रम, कांग्रेस और भाजपा के खिलाफ की जमकर नारेबाजी
अमर उजाला ब्यूरो
रोहतक।
बाबरी मस्जिद ढहाने की 25वीं बरसी पर बुधवार को एसयूसीआई कम्युनिस्ट कार्यकर्ताओं ने काला दिवस मनाकर शहर में जुलूस निकाला। कार्यकर्ताओं ने कांग्रेस और भाजपा सरकार के खिलाफ जमकर नारेबाजी की।
एसयूसीआई की लोकल कमेटी के सदस्य हरीश कुमार के नेतृत्व में मानसरोवर पार्क से लघु सचिवालय तक जुलूस निकाला गया। इस दौरान उन्होंने कहा कि 6 दिसंबर 1992 को बाबरी मस्जिद को ढहा दिया गया था। आजाद भारत के इतिहास में वह दिन काले रविवार के तौर पर दर्ज है। कांग्रेस की केंद्र सरकार और उत्तर प्रदेश की भाजपा सरकार की मिलीभगत के चलते उसे ढहाया गया था। भारतीय समाज की धर्मनिरपेक्ष जनतांत्रिक नींव पर यह सबसे घातक हमला था। कहा कि इस अन्याय को कभी नहीं भूलाया जा सकता है। जब तक दोषियों पर कार्रवाई नहीं होगी तब तक आंदोलन करते रहेंगे। इस मौके पर उमेश कुमार, जगदीश, धनराज और राजकुमार आदि मौजूद रहे।
विज्ञापन
एसयूसीआई कम्युनिस्ट ने मनाया काला दिवस, शहर में निकाला जुलूस
- बाबरी मस्जिद ढहाने की 25वीं बरसी पर किया गया कार्यक्रम, कांग्रेस और भाजपा के खिलाफ की जमकर नारेबाजी
अमर उजाला ब्यूरो
रोहतक।
बाबरी मस्जिद ढहाने की 25वीं बरसी पर बुधवार को एसयूसीआई कम्युनिस्ट कार्यकर्ताओं ने काला दिवस मनाकर शहर में जुलूस निकाला। कार्यकर्ताओं ने कांग्रेस और भाजपा सरकार के खिलाफ जमकर नारेबाजी की।
एसयूसीआई की लोकल कमेटी के सदस्य हरीश कुमार के नेतृत्व में मानसरोवर पार्क से लघु सचिवालय तक जुलूस निकाला गया। इस दौरान उन्होंने कहा कि 6 दिसंबर 1992 को बाबरी मस्जिद को ढहा दिया गया था। आजाद भारत के इतिहास में वह दिन काले रविवार के तौर पर दर्ज है। कांग्रेस की केंद्र सरकार और उत्तर प्रदेश की भाजपा सरकार की मिलीभगत के चलते उसे ढहाया गया था। भारतीय समाज की धर्मनिरपेक्ष जनतांत्रिक नींव पर यह सबसे घातक हमला था। कहा कि इस अन्याय को कभी नहीं भूलाया जा सकता है। जब तक दोषियों पर कार्रवाई नहीं होगी तब तक आंदोलन करते रहेंगे। इस मौके पर उमेश कुमार, जगदीश, धनराज और राजकुमार आदि मौजूद रहे।
विज्ञापन