{"_id":"59a7222a4f1c1b0a278b48be","slug":"21504125482-rohtak-news","type":"story","status":"publish","title_hn":"इंफ्रास्ट्रक्चर की कमी से जूझ रहा जिला","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
इंफ्रास्ट्रक्चर की कमी से जूझ रहा जिला
Updated Thu, 31 Aug 2017 02:12 AM IST
विज्ञापन
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
इंफ्रास्ट्रक्चर की कमी से जूझ रहा जिला
चरखी दादरी।
करीब छह माह पहले जिला सचिवालय के लिए जमीन एक्वायर किए जाने को लेकर प्रशासन से सरकार की ओर से मांगी गई जमीन की साइट सर्वे रिपोर्ट पर आज तक फाइल आगे नहीं बढ़ सकी है। ऐसे में चरखी दादरी जिला बन जाने के बाद अब सरकारी विभागों को दाएं-आएं शिफ्ट कर काम चलाया जा रहा है। नया व बड़ा सचिवालय बनने के बाद ही सही तरीके से जिले का आधारभूत ढांचा तैयार हो सकता है। इस समय प्रदेश का 22वां जिला इंफ्रास्ट्रक्चर की कमी से जूझ रहा है और सरकार भी इस तरह मौन है।
-18 सितंबर 2016 की चरखी दादरी नई अनाज मंडी में हुई सीएम रैली में चरखी दादरी को जिलेे का दर्जा दिए जाने की घोषणा की गई थी। तत्पश्चात नवंबर माह में सरकार की ओर से नोटिफिकेशन जारी कर जिले को अंतिम रूप दिया गया था। करीब छह माह पूर्व सरकार ने चरखी दादरी प्रशासन से नए जिला सचिवालय के लिए शहर व आसपास के गांवों में जमीन की सर्वे करने को कहा गया था ताकि यहां सचिवालय का निर्माण करवाया जा सके। सरकार के आदेशानुसार प्रशासनिक अधिकारियों ने शहर की चारो ओर की साइटों का निरीक्षण किया था। जिसमें समसपुर के समीप दिल्ली बाइपास, महेंद्रगढ़ चुंगी रोड, भिवानी रोड बाइपास के अलावा रोहतक रोड पर कमोद के आसपास के क्षेत्र को शामिल किया गया। तत्पश्चात प्रशासन ने इसकी रिपोर्ट तैयार कर सरकार को भेज दी थी।
सर्वे रिपोर्ट सरकार के पास, नहीं मिले निर्देश
अब इस रिपोर्ट को सरकार के पास भेजे छह माह बीत चुके हैं लेकिन सरकार ने इस संबंध में आज तक कोई सुध नहीं ली है। इससे सचिवालय की जमीन के लिए प्रक्रिया आगे नहीं बढ़ पा रही है। इस प्रकार जिले के आधारभूत ढॉचे के गठन की प्रक्रिया पर एक प्रकार से विराम-सा लगा हुआ है। इस समय अधिकतर कार्यालय किराए के भवनों में ही शुरू किए गए हैं। आरटीओ कार्यालय किराए के भवन में शुरू किया गया है। पटवार भवन न होने से पटवारी आवासीय कालोनियों में किराए के कमरों में बैठकर लोगों का काम निपटा रहे हैं। कई कार्यालय दूसरे कार्यालयों से अटैच किए जा रहे हैं ताकि जैसे-तैसे काम चलाया जा सके।
विज्ञापन
अब प्रशासन भी है अनभिज्ञ
सरकार की ओर से सचिवालय की जमीन के लिए प्रक्रिया आगे नहीं बढ़ पाने पर प्रशासन भी अब मौन बना हुआ है। प्रशासन की ओर से सरकार के पास भेजी सचिवालय जमीन की साइट सर्वे रिपोर्ट पर कोई किसी प्रकार का जवाब न आने पर प्रशासन भी शांत बैठा है। ऐसे में नया जिला इंफ्रास्ट्रक्चर की कमी से जूझ रहा है। इस समय जिले को बड़े स्तर के सचिवालय की जरूरत बनी हुई है ताकि सभी विभागों के कार्यालय सुचारु रूप से स्थापित हो सके व जनता को भी अपने सरकारी कामकाज के लिए शहर के इधर-उधर भागों मेें नहीं भटकना पड़े। कम से कम 25 एकड़ जमीन पर सचिवालय बनाए जाने की प्लानिंग जरूरी है।
वर्जन--
विभाग ने जमीन की साइट रिपोर्ट सरकार को भेज रखी है। जैसे ही अगले निर्देश मिलेंगे। इस पर तत्परता से काम शुरू करवा दिया जाएगा। जमीन की सर्वे रिपोर्ट शहर के चारो से तैयार की गई है।
जिला राजस्व अधिकारी, राजकुमार
विज्ञापन
चरखी दादरी।
करीब छह माह पहले जिला सचिवालय के लिए जमीन एक्वायर किए जाने को लेकर प्रशासन से सरकार की ओर से मांगी गई जमीन की साइट सर्वे रिपोर्ट पर आज तक फाइल आगे नहीं बढ़ सकी है। ऐसे में चरखी दादरी जिला बन जाने के बाद अब सरकारी विभागों को दाएं-आएं शिफ्ट कर काम चलाया जा रहा है। नया व बड़ा सचिवालय बनने के बाद ही सही तरीके से जिले का आधारभूत ढांचा तैयार हो सकता है। इस समय प्रदेश का 22वां जिला इंफ्रास्ट्रक्चर की कमी से जूझ रहा है और सरकार भी इस तरह मौन है।
-18 सितंबर 2016 की चरखी दादरी नई अनाज मंडी में हुई सीएम रैली में चरखी दादरी को जिलेे का दर्जा दिए जाने की घोषणा की गई थी। तत्पश्चात नवंबर माह में सरकार की ओर से नोटिफिकेशन जारी कर जिले को अंतिम रूप दिया गया था। करीब छह माह पूर्व सरकार ने चरखी दादरी प्रशासन से नए जिला सचिवालय के लिए शहर व आसपास के गांवों में जमीन की सर्वे करने को कहा गया था ताकि यहां सचिवालय का निर्माण करवाया जा सके। सरकार के आदेशानुसार प्रशासनिक अधिकारियों ने शहर की चारो ओर की साइटों का निरीक्षण किया था। जिसमें समसपुर के समीप दिल्ली बाइपास, महेंद्रगढ़ चुंगी रोड, भिवानी रोड बाइपास के अलावा रोहतक रोड पर कमोद के आसपास के क्षेत्र को शामिल किया गया। तत्पश्चात प्रशासन ने इसकी रिपोर्ट तैयार कर सरकार को भेज दी थी।
विज्ञापन
सर्वे रिपोर्ट सरकार के पास, नहीं मिले निर्देश
अब इस रिपोर्ट को सरकार के पास भेजे छह माह बीत चुके हैं लेकिन सरकार ने इस संबंध में आज तक कोई सुध नहीं ली है। इससे सचिवालय की जमीन के लिए प्रक्रिया आगे नहीं बढ़ पा रही है। इस प्रकार जिले के आधारभूत ढॉचे के गठन की प्रक्रिया पर एक प्रकार से विराम-सा लगा हुआ है। इस समय अधिकतर कार्यालय किराए के भवनों में ही शुरू किए गए हैं। आरटीओ कार्यालय किराए के भवन में शुरू किया गया है। पटवार भवन न होने से पटवारी आवासीय कालोनियों में किराए के कमरों में बैठकर लोगों का काम निपटा रहे हैं। कई कार्यालय दूसरे कार्यालयों से अटैच किए जा रहे हैं ताकि जैसे-तैसे काम चलाया जा सके।
विज्ञापन
अब प्रशासन भी है अनभिज्ञ
सरकार की ओर से सचिवालय की जमीन के लिए प्रक्रिया आगे नहीं बढ़ पाने पर प्रशासन भी अब मौन बना हुआ है। प्रशासन की ओर से सरकार के पास भेजी सचिवालय जमीन की साइट सर्वे रिपोर्ट पर कोई किसी प्रकार का जवाब न आने पर प्रशासन भी शांत बैठा है। ऐसे में नया जिला इंफ्रास्ट्रक्चर की कमी से जूझ रहा है। इस समय जिले को बड़े स्तर के सचिवालय की जरूरत बनी हुई है ताकि सभी विभागों के कार्यालय सुचारु रूप से स्थापित हो सके व जनता को भी अपने सरकारी कामकाज के लिए शहर के इधर-उधर भागों मेें नहीं भटकना पड़े। कम से कम 25 एकड़ जमीन पर सचिवालय बनाए जाने की प्लानिंग जरूरी है।
वर्जन--
विभाग ने जमीन की साइट रिपोर्ट सरकार को भेज रखी है। जैसे ही अगले निर्देश मिलेंगे। इस पर तत्परता से काम शुरू करवा दिया जाएगा। जमीन की सर्वे रिपोर्ट शहर के चारो से तैयार की गई है।
जिला राजस्व अधिकारी, राजकुमार