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बजट
Updated Tue, 27 Jun 2017 01:31 AM IST
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9.30 करोड़ का बजट खाते में, फिर भी नहीं हुआ विकास
चरखी दादरी।
ढाई साल बाद बजट जारी होने से जिले के सौ गांवों में विकास की उम्मीद बंधी थी, लेकिन पंचायत विभाग के खाते में ग्रांट होने के बाद भी विकास कार्यों पर ब्रेक लगा हुआ है। जिले के सभी चारों ब्लॉक में बीडीपीओ के पद खाली पड़े हैं। इससे पंचायतों को समय पर न तो गाइडलाइन मिल पा रही है और न ही गांवों में विकास का खाका तैयार हो पा रहा है। पंचायत विभाग के खाते में 9.30 करोड़ का बजट आए करीब बीस दिन बीत चुके हैं, लेकिन अब तक विकास कार्य शुरू नहीं करवाए गए हैं। ऐसे में बजट मिलने के बाद भी ग्रामीण विकास पर ब्रेक लगे हुए हैं। इतना ही नहीं बीडीपीओ की कमी से कामकाज के लिए पंचायत विभाग कार्यालय में आने वाले सरपंचों को भी मायूस होकर लौटना पड़ रहा है।
जानकारी के अनुसार जिले की पंचायतों को करीब ढाई साल बाद ग्रांट तो मिल गई लेकिन इसके बाद भी विकास कार्य अधर में लटके हुए हैं। जिले के चारों ब्लॉकों में बीडीपीओ के पद खाली होने से सरपंचों को भी निराश होकर लौटना पड़ता है। इतना नहीं पंचायत कार्यालय के संपूर्ण कार्यों पर भी विराम लगा हुआ है। जून प्रथम सप्ताह में ही यह राशि विकास कार्यों के लिए पंचायतों के पास पहुंची है। गांवों में इस समय विकास कार्यों की सख्त जरूरत बनी हुई है। गांवों में इस बरसाती पानी निकासी की अधिक समस्या बनी हुई हैं। कई गांवों में पेयजल लाइन बिछाए जाने पर वहां पक्की गलियों का निर्माण करवाया जाना जरूरी है। कई गांवों की तो हालात काफी बदतर है। कई गांवों में सामुदायिक केंद्र भी बनने हैं। चरखी दादरी नया जिला बनने के बाद यहां चार ब्लॉक बनाए गए हैं जिनमें दादरी ब्लॉक, बाढड़ा ब्लॉक, बौंद कलां व झोझू कलां ब्लॉक शामिल हैं। झोझू कलां में दादरी व बाढड़ा ब्लॉक के कुछ गांवों को तोड़कर शामिल किया गया है। इन चारों ब्लॉकों में बीडीपीओ के पद सृजित हो चुके हैं।
बीडीपीओ बिना ये कामकाम है प्रभावित
पंचायत ब्लॉक का मुख्य अधिकारी बीडीपीओ ही होता है। बीडीपीओ की देखरेख व गाइडलाइन से कार्यालय व पंचायतों के सभी प्रकार के कामकाज निपटाए जाते हैं। इस समय इन चारों ब्लॉकों में बीडीपीओ तैनात नहीं हैं। बीडीपीओ न होने से पंचायत कार्यालय में रूटीन की डाक व फाइलों के निपटान का कार्य प्रभावित हो रहा है। इस समय ग्रामीण क्षेत्रों के युवा बेरोजगार रिहायशी एवं जाति प्रमाण -पत्र बनवा रहे हैं ऐसे में सरपंच की ओर से हस्ताक्षरित फाइल पर प्रतिहस्ताक्षर बीडीपीओ ही करता है। इनके अलावा कार्यालय का अनुशासन एवं प्रबंधन पर भी असर पड़ता है। अधिकारी के कार्यालय में होने पर पूरी व्यवस्था चरमरा जाती है।
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पंचायतों के विकास कार्य हो रहे बाधित
बीडीपीओ न होने से पंचायतों के कामकाज भी बाधित हो गए हैं। समय- समय पर सरपंचों को विकास कार्यो के लिए गाइड लाइन की जरूरत पड़ती है। अधिकतर गांवों में युवा सरपंचों के पास अनुभव की भी कमी है ऐसे में उन्हें मार्गदर्शन के लिए पंचायत अधिकारियों की मदद लेनी पड़ती है। बीडीपीओ तैनात न होने से विकास कार्यों के लिए गाइड लाइन नहीं मिल पा रही है। विभिन्न प्रकार की फाइलों पर हस्ताक्षर भी पेंडिंग चले आ रहे हैं। इनके अलावा पंचायती जमीन से संबंधित मामलों का भी निपटान रूका हुआ है।
9 करोड़ 30 लाख का बजट हो चुका जारी
पिछले दिनों करीब 100 गांवों के विकास कार्यो के लिए नौ करोड़ 30 लाख का बजट जारी हो चुका है। इस बजट से अधिकतर गांवों में गलियां व सामुदायिक केंद्र बनाए जाने हैं। कई गांवों में स्कूली कमरे भी बनने हैं।
चारों ब्लॉकों में बीडीपीओ तैनात नहीं होने से कामकाज काफी हद तक जरूरत प्रभावित हो रहा है। जल्द ही सरकार की ओर से इन खाली पदों को भर दिया जाएगा। गांवों के विकास कार्य प्रभावित नहीं होने दिए जाएंगे।
पंचायत ऑफिसर, विकास राणा
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चरखी दादरी।
ढाई साल बाद बजट जारी होने से जिले के सौ गांवों में विकास की उम्मीद बंधी थी, लेकिन पंचायत विभाग के खाते में ग्रांट होने के बाद भी विकास कार्यों पर ब्रेक लगा हुआ है। जिले के सभी चारों ब्लॉक में बीडीपीओ के पद खाली पड़े हैं। इससे पंचायतों को समय पर न तो गाइडलाइन मिल पा रही है और न ही गांवों में विकास का खाका तैयार हो पा रहा है। पंचायत विभाग के खाते में 9.30 करोड़ का बजट आए करीब बीस दिन बीत चुके हैं, लेकिन अब तक विकास कार्य शुरू नहीं करवाए गए हैं। ऐसे में बजट मिलने के बाद भी ग्रामीण विकास पर ब्रेक लगे हुए हैं। इतना ही नहीं बीडीपीओ की कमी से कामकाज के लिए पंचायत विभाग कार्यालय में आने वाले सरपंचों को भी मायूस होकर लौटना पड़ रहा है।
जानकारी के अनुसार जिले की पंचायतों को करीब ढाई साल बाद ग्रांट तो मिल गई लेकिन इसके बाद भी विकास कार्य अधर में लटके हुए हैं। जिले के चारों ब्लॉकों में बीडीपीओ के पद खाली होने से सरपंचों को भी निराश होकर लौटना पड़ता है। इतना नहीं पंचायत कार्यालय के संपूर्ण कार्यों पर भी विराम लगा हुआ है। जून प्रथम सप्ताह में ही यह राशि विकास कार्यों के लिए पंचायतों के पास पहुंची है। गांवों में इस समय विकास कार्यों की सख्त जरूरत बनी हुई है। गांवों में इस बरसाती पानी निकासी की अधिक समस्या बनी हुई हैं। कई गांवों में पेयजल लाइन बिछाए जाने पर वहां पक्की गलियों का निर्माण करवाया जाना जरूरी है। कई गांवों की तो हालात काफी बदतर है। कई गांवों में सामुदायिक केंद्र भी बनने हैं। चरखी दादरी नया जिला बनने के बाद यहां चार ब्लॉक बनाए गए हैं जिनमें दादरी ब्लॉक, बाढड़ा ब्लॉक, बौंद कलां व झोझू कलां ब्लॉक शामिल हैं। झोझू कलां में दादरी व बाढड़ा ब्लॉक के कुछ गांवों को तोड़कर शामिल किया गया है। इन चारों ब्लॉकों में बीडीपीओ के पद सृजित हो चुके हैं।
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बीडीपीओ बिना ये कामकाम है प्रभावित
पंचायत ब्लॉक का मुख्य अधिकारी बीडीपीओ ही होता है। बीडीपीओ की देखरेख व गाइडलाइन से कार्यालय व पंचायतों के सभी प्रकार के कामकाज निपटाए जाते हैं। इस समय इन चारों ब्लॉकों में बीडीपीओ तैनात नहीं हैं। बीडीपीओ न होने से पंचायत कार्यालय में रूटीन की डाक व फाइलों के निपटान का कार्य प्रभावित हो रहा है। इस समय ग्रामीण क्षेत्रों के युवा बेरोजगार रिहायशी एवं जाति प्रमाण -पत्र बनवा रहे हैं ऐसे में सरपंच की ओर से हस्ताक्षरित फाइल पर प्रतिहस्ताक्षर बीडीपीओ ही करता है। इनके अलावा कार्यालय का अनुशासन एवं प्रबंधन पर भी असर पड़ता है। अधिकारी के कार्यालय में होने पर पूरी व्यवस्था चरमरा जाती है।
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पंचायतों के विकास कार्य हो रहे बाधित
बीडीपीओ न होने से पंचायतों के कामकाज भी बाधित हो गए हैं। समय- समय पर सरपंचों को विकास कार्यो के लिए गाइड लाइन की जरूरत पड़ती है। अधिकतर गांवों में युवा सरपंचों के पास अनुभव की भी कमी है ऐसे में उन्हें मार्गदर्शन के लिए पंचायत अधिकारियों की मदद लेनी पड़ती है। बीडीपीओ तैनात न होने से विकास कार्यों के लिए गाइड लाइन नहीं मिल पा रही है। विभिन्न प्रकार की फाइलों पर हस्ताक्षर भी पेंडिंग चले आ रहे हैं। इनके अलावा पंचायती जमीन से संबंधित मामलों का भी निपटान रूका हुआ है।
9 करोड़ 30 लाख का बजट हो चुका जारी
पिछले दिनों करीब 100 गांवों के विकास कार्यो के लिए नौ करोड़ 30 लाख का बजट जारी हो चुका है। इस बजट से अधिकतर गांवों में गलियां व सामुदायिक केंद्र बनाए जाने हैं। कई गांवों में स्कूली कमरे भी बनने हैं।
चारों ब्लॉकों में बीडीपीओ तैनात नहीं होने से कामकाज काफी हद तक जरूरत प्रभावित हो रहा है। जल्द ही सरकार की ओर से इन खाली पदों को भर दिया जाएगा। गांवों के विकास कार्य प्रभावित नहीं होने दिए जाएंगे।
पंचायत ऑफिसर, विकास राणा