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स्मॉग से जहरीली हुई आबोहवा, अस्पतालों की ओपीडी 50 फीसदी बढ़ी

Sat, 11 Nov 2017 01:58 AM IST
Updated Sat, 11 Nov 2017 01:58 AM IST
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स्मॉग से जहरीली हुई आबोहवा, अस्पतालों की ओपीडी 50 फीसदी बढ़ी
स्मॉग से जहरीली हुई आबोहवा, अस्पतालों की ओपीडी 50 फीसदी तक बढ़ी
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चरखी दादरी।
चरखी दादरी जिले की आबोहवा इन दोनों बेहद खराब हो चुकी है। सुबह-शाम कोहरा रूपी स्मॉग की चादर शहर को ढक लेती है और दोनों ही समय घरों से बाहर निकलने पर आमजन को परेशानियां हो रही है। घरों में बैठने पर भी आंखों में जलन व सांस लेने में लोगों को तकलीफें हो रही हैं। प्रदूषण का स्तर 900 पीएम (पार्टिकल मेटर) से अधिक पहुंचने से लोग धड़ाधड़ बीमारियों की चपेट में आ रहे हैं। आंखों में जलन व सांस रोगियों सहित खांसी-जुकाम व बुखार से पीड़ित मरीजों की ओपीडी बढ़ी है। अकेले सिविल अस्पताल में ओपीडी 200 से बढ़कर 400 तक जा पहुंची है। बीते दो दिनों में करीब 350 मरीजों ने अपने खून की जांच कराई है। पहले सामान्य तौर पर 40 से 50 मरीज ही एक दिन में खून की जांच कराते थे। वहीं निजी अस्पतालों में भी ओपीडी ढाई हजार से बढ़कर 4000 के पार जा चुकी हैं। प्रदूषण नियंत्रक बोर्ड चरखी दादरी में प्रदूषण के स्तर को बेहद खतरनाक बताते हुए प्राइमरी कक्षाओं की छुट्टियां करने तक की सिफारिश कर चुका है। हालांकि जिला प्रशासन को अब तक कोई पराली या फसलों के अवशेष जलाता नहीं मिला है। इसके बावजूद प्रदूषण का स्तर कम होने का नाम ही नहीं ले रहा है।
सामान्य बुखार, खांसी-जुकाम या सांस लेने में तकलीफ होने पर तुरंत चिकित्सक के पास उपचार के लिए जाने की हिदायतें स्वास्थ्य विभाग के अधिकारी दे रहे हैं। सिविल अस्पताल की ओपीडी पर गौर करें तो इस मौसम में बुजुर्ग व बच्चे सबसे अधिक बीमारियों की चपेट में आ रहे हैं। चिकित्सक का कहना है कि ऐसे मौसम में बच्चे सबसे अधिक निमोनिया का शिकार होते हैं। वहीं, स्वास्थ्य विभाग के अधिकारी बीमारियों के इस मौसम को लेकर अलर्ट होने के दावें कर रहे हैं। नगर परिषद ने भी पिछले सप्ताह ही शहर में फॉगिंग कराई थी।
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कूड़े को लगा रहे आग, प्रशासन नहीं ले रहा कोई एक्शन
शहर में आए दिन वार्डों व मोहल्लों में कूड़े-कचरे के ढेर को आग लगाने की घटनाएं देखने को मिल रही है। कुछ जगह तो डस्टबिन से कूड़े का उठान करने की बजाय आग जलाई जा रही है। अमर उजाला समय-समय पर कूड़े के ढेर में आग लगाने की लापरवाही को प्रकाशित कर नगर परिषद व जिला प्रशासन का ध्यान इस ओर आकर्षित कर चुका है, लेकिन इस गंभीर मसले पर गंभीरता दिखाते हुए कोई कार्रवाई नहीं की गई। यह घटनाएं शाम के समय अक्सर देखने को मिलती है।
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मरीजों की संख्या अधिक, चिकित्सकों की कमी
सिविल अस्पताल की ओपीडी जहां 50 फीसदी तक बढ़ी है तो जिला मुख्यालय अस्पताल को अब भी चिकित्सकों का इंतजार है। एसएमओ सहित सिविल अस्पताल में इस समय महज तीन चिकित्सक है। इनमें से एक अस्पताल की नई बिल्डिंग में तो दो पुरानी बिल्डिंग में ही बैठकर मरीजों का उपचार करते हैं। महज तीन चिकित्सक सिविल अस्पताल में तैनात होने व अस्पताल के कंधे पर 172 गांवों के मरीजों जिम्मेवारी होने के चलते उपचार के लिए भी मरीजों को इंतजार करना पड़ रहा है। सिविल अस्पताल में शुक्रवार को उपचार कराने आए रणबीर, संदीप, मुन्नी देवी, रोहताश, कलावती, रजनी, केला व रेणू ने बताया कि सिविल अस्पताल में चिकित्सकों की कमी है और ओपीडी की पर्ची कटवाने के बाद उपचार के लिए इंतजार करना पड़ता है।
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मरीज बोले: प्रदूषित वातावरण ही बीमारी का कारण
1 पिछले पांच दिनों से लगातार बुखार आ रहा है। साथ में खांसी भी है, दवा लेने पर भी कोई आराम नहीं हो रहा है। अब आंखों में जलन की शिकायत भी हो गई है। वातावरण दूषित होने से बीमारियां बढ़ने लगी है जिससे हर व्यक्ति परेशान है।
- राजेंद्र, फतेगढ़ निवासी
2 .पिछले एक सप्ताह से खांसी-जुकाम से पीड़ित हूं। दवा लेने पर भी आराम नहीं आया है। आंखों में जलन के साथ-साथ सांस लेने में भी तकलीफ हो रही है। चिकित्सक स्मॉग को बीमारी का कारण बता रहे हैं।
- प्रदीप, मिर्च निवासी
3 .एक सप्ताह से अधिक समय से मुझे बुखार आ रहा है। इसके साथ ही सांस लेने में भी दिक्कत हो रही है। सुबह-शाम के समय अधिक समस्या रहती है। बच्चों को भी इस मौसम में परेशानी है लेकिन कोई समाधान अभिभावकों के पास नहीं है।
- संतरा, दूधवा निवासी
4 .पिछले दस दिन से बुखार, खांसी-जुकाम से पीड़ित हूं। बीते तीन-चार दिनों से सांस लेने में भी परेशानी हो रही है। आबोहवा बेहद प्रदूषित हो चुकी है। थोड़ा सा चलते ही सांस चढ़ जाती है। सीने में दर्द की समस्या भी होने लगी है।

- हरिसिंह, दादरी निवासी
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बाक्स: ठंडे पानी से धोएं आंखें, घर से बाहर मास्क पहनें
ऐसे वातावरण में समय-समय पर अपने आस-पास सफाई करते रहना चाहिए। घर के बाहर निकलते समय मास्क अवश्य पहनें। घर के आस-पास पानी का छिड़काव करना चाहिए। सांस लेने में दिक्कत हो रही हो तो तुरंत डॉक्टर को दिखाना चाहिए। धुएं से बचकर रहना चाहिए और आंखों पर चश्मा लगानी चाहिए। घर पर या बाहर कुछ समय बाद आंखें ठंडे पानी से आंखें धोनी चाहिए। छोटे बच्चों को बीमारियों से बचाने के लिए गर्म पानी में विक्स डालकर भांप देनी चाहिए।
डॉ. नवीन, सिविल अस्पताल
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