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अभिव्यक्ति की आजादी के नाम पर देश की विभूतियों का अपमान स्वीकार नहीं: चौहान
Updated Sun, 03 Dec 2017 12:02 AM IST
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अभिव्यक्ति की आजादी के नाम पर देश की विभूतियों का अपमान स्वीकार नहीं: चौहान
अमर उजाला ब्यूरो
पूंडरी। कलात्मकता और अभिव्यक्ति की आजादी के नाम पर देश की विभूतियों का अपमान स्वीकार नहीं है। संविधान अभिव्यक्ति की आजादी देता है, लेकिन व्यापक समाज के हित में इसे मर्यादित करने का प्रावधान भी इस संविधान में मौजूद हैं। यह बात हरियाणा ग्रंथ अकादमी के डिप्टी चेयरमैन और निदेशक प्रो. वीरेंद्र सिंह चौहान ने कही। वे शनिवार को पूंडरी के लोक निर्माण विभाग विश्राम गृह में मीडिया कर्मियों से बात कर रहे थे। यह बात उन्होंने विवादित फिल्म पद्मावती को लेकर पत्रकारों के सवालों के जवाब में कही। इस दरम्यान भारतीय जनता पार्टी के जिलाध्यक्ष सुभाष हजवाना भी उनके साथ थे।
प्रो. वीरेंद्र सिंह चौहान ने कहा कि बॉलीवुड के कुछ निर्माताओं के साथ देश में कांग्रेस द्वारा पोषित फर्जी बुद्धिजीवियों का एक तबका हमेशा भारतीय इतिहास के गौरवपूर्ण पन्नों को गलत ढंग से प्रस्तुत करने की कोशिश करता रहा है। यह वही लोग हैं जो बरसों तक किताबों में महाराणा प्रताप, छत्रपति शिवाजी, गुरु तेग बहादुर और शहीद भगत सिंह जैसे भारतीय आदर्शों को किसी ना किसी रूप में अपमानित करते रहे हैं। इन्होंने हमेशा राणा प्रताप के मुकाबले अकबर को, छत्रपति शिवाजी महाराज और महान सिख गुरुओं के मुकाबले में मुगलों का महिमामंडित किया है। ऐसा प्रतीत होता है कि संजय लीला भंसाली की फिल्म पद्मावती भी उसी साजिश का हिस्सा है। उन्होंने कहा कि मुख्यमंत्री मनोहर लाल ने साफ कहा है कि किसी को भी समाज की भावनाओं को आहत करने की अनुमति नहीं दी जाएगी। पत्रकारों के एक सवाल के जवाब में भाजपा नेता ने कहा कि विकास के मामले में राज्य सरकार ने बगैर भेदभाव के काम किया है। हरियाणा एक हरियाणवी एक और सबका साथ सबका विकास के नारों को व्यवहार में उतारा जा रहा है। यह अपने आप में बहुत बड़ा परिवर्तन है जिसके चलते विरोधियों के पास आज इस सरकार के खिलाफ कोई ठोस मुद्दे नहीं है। इस दौरान पुरषोत्तम शर्मा सदस्य सीएम विंडो, रामपाल टीक चेयरमैन निगरानी समिति पूंडरी, साहब सिंह टीक सदस्य निगरानी समिति, हाकम शर्मा ट्योंठा, विजेंदर ट्योंठा, राजीव शर्मा, मंगतू राम, अजय फरल, प्रदीप राणा, सुभाष रोहिल्ला, दलबीर पांचाल, धर्मेंद्र सिंह व बलिंद्र सिंह मौजूद रहे।
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अमर उजाला ब्यूरो
पूंडरी। कलात्मकता और अभिव्यक्ति की आजादी के नाम पर देश की विभूतियों का अपमान स्वीकार नहीं है। संविधान अभिव्यक्ति की आजादी देता है, लेकिन व्यापक समाज के हित में इसे मर्यादित करने का प्रावधान भी इस संविधान में मौजूद हैं। यह बात हरियाणा ग्रंथ अकादमी के डिप्टी चेयरमैन और निदेशक प्रो. वीरेंद्र सिंह चौहान ने कही। वे शनिवार को पूंडरी के लोक निर्माण विभाग विश्राम गृह में मीडिया कर्मियों से बात कर रहे थे। यह बात उन्होंने विवादित फिल्म पद्मावती को लेकर पत्रकारों के सवालों के जवाब में कही। इस दरम्यान भारतीय जनता पार्टी के जिलाध्यक्ष सुभाष हजवाना भी उनके साथ थे।
प्रो. वीरेंद्र सिंह चौहान ने कहा कि बॉलीवुड के कुछ निर्माताओं के साथ देश में कांग्रेस द्वारा पोषित फर्जी बुद्धिजीवियों का एक तबका हमेशा भारतीय इतिहास के गौरवपूर्ण पन्नों को गलत ढंग से प्रस्तुत करने की कोशिश करता रहा है। यह वही लोग हैं जो बरसों तक किताबों में महाराणा प्रताप, छत्रपति शिवाजी, गुरु तेग बहादुर और शहीद भगत सिंह जैसे भारतीय आदर्शों को किसी ना किसी रूप में अपमानित करते रहे हैं। इन्होंने हमेशा राणा प्रताप के मुकाबले अकबर को, छत्रपति शिवाजी महाराज और महान सिख गुरुओं के मुकाबले में मुगलों का महिमामंडित किया है। ऐसा प्रतीत होता है कि संजय लीला भंसाली की फिल्म पद्मावती भी उसी साजिश का हिस्सा है। उन्होंने कहा कि मुख्यमंत्री मनोहर लाल ने साफ कहा है कि किसी को भी समाज की भावनाओं को आहत करने की अनुमति नहीं दी जाएगी। पत्रकारों के एक सवाल के जवाब में भाजपा नेता ने कहा कि विकास के मामले में राज्य सरकार ने बगैर भेदभाव के काम किया है। हरियाणा एक हरियाणवी एक और सबका साथ सबका विकास के नारों को व्यवहार में उतारा जा रहा है। यह अपने आप में बहुत बड़ा परिवर्तन है जिसके चलते विरोधियों के पास आज इस सरकार के खिलाफ कोई ठोस मुद्दे नहीं है। इस दौरान पुरषोत्तम शर्मा सदस्य सीएम विंडो, रामपाल टीक चेयरमैन निगरानी समिति पूंडरी, साहब सिंह टीक सदस्य निगरानी समिति, हाकम शर्मा ट्योंठा, विजेंदर ट्योंठा, राजीव शर्मा, मंगतू राम, अजय फरल, प्रदीप राणा, सुभाष रोहिल्ला, दलबीर पांचाल, धर्मेंद्र सिंह व बलिंद्र सिंह मौजूद रहे।
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