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वेटेज समाप्त करने पर एसएफआई ने की डीएचई की निंदा
Updated Wed, 27 Jun 2018 02:24 AM IST
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वेटेज समाप्त करने पर एसएफआई ने की डीएचई की निंदा
अमर उजाला ब्यूरो
रोहतक। स्टूडेंट्स फेडरेशन ऑफ इंडिया (एसएफआई) ने उच्च शिक्षा विभाग के ग्रामीण विद्यार्थियों की वेटेज समाप्त करने के फैसले की निंदा की है। संगठन ने इस पर आपत्ति जताते हुए रोष प्रकट किया है। यह फैसला ग्रामीण परिवेश के विद्यार्थियों को प्रभावित करेगा। वेटेज के अतिरिक्त पांच अंक नहीं मिलने से ग्रामीण विद्यार्थियों को दाखिले से वंचित रहना पड़ेगा।
एसएफआई राज्य सचिव सुमित सिंह ने कहा कि प्रदेश भर के कॉलेजों में केंद्रीयकृत दाखिला प्रक्रिया चल रही है। छात्र छात्राएं कालेजों में दाखिले को लेकर संघर्षरत हैं। इन्हें दाखिलों में अलग-अलग प्रकार से छूट मिलती है। ग्रामीण इलाकों के सरकारी स्कूलों से 10वीं व 12वीं करने वालों को दाखिले में पांच अंक की वेटेज मिलती रही है। इसे विद्यार्थियों ने संघर्ष के बाद हासिल किया था। अब ग्रामीण परिवेश के बच्चों से यह अधिकार छीन लिया गया है। जबकि इन विद्यार्थियों के पास पहले ही सुविधाएं कम होती हैं।
राज्य उपप्रधान सुरेंद्र ने कहा कि उच्च शिक्षा विभाग छात्र विरोधी फैसले ले रहा है। इसके चलते छात्रों को भारी परेशानियों का सामना करना पड़ रहा है। छात्रों को सस्ती व गुणवत्ता परक शिक्षा मिले, स्थाई शिक्षकों की भर्ती कर खाली पद भरे जाएं, फीस कम हो, इस दिशा में सोचने के बजाए सरकार व विभाग के अधिकारी मनमाने फैसले ले रहे हैं। एसएफआई ऐसे छात्र विरोधी निर्णयों का विरोध करती है। इसके खिलाफ संघर्ष किया जाएगा।
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अमर उजाला ब्यूरो
रोहतक। स्टूडेंट्स फेडरेशन ऑफ इंडिया (एसएफआई) ने उच्च शिक्षा विभाग के ग्रामीण विद्यार्थियों की वेटेज समाप्त करने के फैसले की निंदा की है। संगठन ने इस पर आपत्ति जताते हुए रोष प्रकट किया है। यह फैसला ग्रामीण परिवेश के विद्यार्थियों को प्रभावित करेगा। वेटेज के अतिरिक्त पांच अंक नहीं मिलने से ग्रामीण विद्यार्थियों को दाखिले से वंचित रहना पड़ेगा।
एसएफआई राज्य सचिव सुमित सिंह ने कहा कि प्रदेश भर के कॉलेजों में केंद्रीयकृत दाखिला प्रक्रिया चल रही है। छात्र छात्राएं कालेजों में दाखिले को लेकर संघर्षरत हैं। इन्हें दाखिलों में अलग-अलग प्रकार से छूट मिलती है। ग्रामीण इलाकों के सरकारी स्कूलों से 10वीं व 12वीं करने वालों को दाखिले में पांच अंक की वेटेज मिलती रही है। इसे विद्यार्थियों ने संघर्ष के बाद हासिल किया था। अब ग्रामीण परिवेश के बच्चों से यह अधिकार छीन लिया गया है। जबकि इन विद्यार्थियों के पास पहले ही सुविधाएं कम होती हैं।
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राज्य उपप्रधान सुरेंद्र ने कहा कि उच्च शिक्षा विभाग छात्र विरोधी फैसले ले रहा है। इसके चलते छात्रों को भारी परेशानियों का सामना करना पड़ रहा है। छात्रों को सस्ती व गुणवत्ता परक शिक्षा मिले, स्थाई शिक्षकों की भर्ती कर खाली पद भरे जाएं, फीस कम हो, इस दिशा में सोचने के बजाए सरकार व विभाग के अधिकारी मनमाने फैसले ले रहे हैं। एसएफआई ऐसे छात्र विरोधी निर्णयों का विरोध करती है। इसके खिलाफ संघर्ष किया जाएगा।
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