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शहर में मधुमक्खियों का आतंक, आईसी कालेज से नहीं हटाएगा निगम मक् खी
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रोहतक। शहर में डीएलएफ पार्क, वैश्य व महिला कॉलेज में हमले से मधुमक्खियों का आतंक फैला हुआ है। इसके चलते निगम शहर के सभी पार्कों व कॉलोनियों से छत्तों को हटाने का अभियान चलाए हुए है। वहीं एक्सपर्ट का मानना है कि यही सबसे बड़ी गलती है, जिसकी वजह से मधुमक्खियां हमला बढ़ रहा है। उनका कहना है कि बेहतर होगा कि जब तक मधुमक्खियां दोबारा नहीं बस जाती है, लोग उन जगहों पर न जाएं, जहां से छत्ते हटाए गए हैं। इसके साथ ही शरीर को ढक कर रखें और हमले के वक्त जमीन पर पेट के बल लेट जाएं।
हरियाणा एग्रीकल्चर यूनिवर्सिटी हिसार के कीट विज्ञान विभाग के हेड प्रो. योगेश कुमार ने बताया कि जब तक मधुमक्खी के छत्ते तो छेड़ा नहीं जाता, वे हमला नहीं करती हैं। कोई पत्थर मार दे या छत्ते पर शीशे के जरिए चमक पैदा की जाए तो मधुमक्खियां उग्र हो जाती हैं। गलती यह हुई कि छत्तों को हटाने के चलते सभी मधुमक्खियों को छेड़ दिया गया, ऐसे में उनके दोबारा बसने तक इंतजार करना होगा। जून और जुलाई में मधुमक्खियां थोड़े कम तापमान वाली जगहों पर चली जाएंगी।
जिला वन्य प्राणी विभाग के अधिकारी दीपक ऐलावादी ने बताया कि मधुमक्खी सात तरह की होती हैं। साथ ही इसकी 44 उप जातियां हैं। एक छत्ते यानि कॉलोनी में एक रानी मधुमक्खी होती है, जबकि 300 के करीब नर मक्खी होती हैं। अन्य दो से ढाई हजार सैनिक (वर्कर) मधुमक्खी होती हैं। सैनिक मधुमक्खियों का काम छत्ते के निर्माण से लेकर फूलों से रस लेकर आना और छत्ते की सुरक्षा करना होता है।
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सावधान में ही बचाव, ज्यादा काटने से जा सकती है जान
एक्सपर्ट का कहना है कि खतरा महसूस होने पर ही मधुमक्खी काटती है। वसंत ऋ तु में रानी मधुमक्खी जहां अड्डे देती हैं, वहीं सैनिक मधुमक्खी छत्ते के निर्माण के साथ-साथ शहद एकत्रित करती हैं। वसंत ऋतु में पूरे सीजन का शहद एकत्रित हो जाता है। गर्मी के मौसम में मक्खी अपनी कॉलोनी बदलती हैं। अगर रास्ते में उनको किसी से खतरा महसूस होता है, तभी वे काटती हैं। एक मधुमक्खी के काटते ही डंक से निकलने वाली गंध दूसरी मधुमक्खियों तक पहुंच जाती है। तब वे एक साथ हमला करती हैं। ऐसे में जब मधुमक्खी काटते, तुरंत डंक को बाहर न निकालें। जहां तक संभव हो, शरीर को तुरंत ढकने का प्रयास करें।
निगम नहीं हटाएगा कॉलेज व सरकारी आफिस से छत्ते
निगम प्रशासन का कहना है कि उनकी जिम्मेदारी केवल पार्कों से छत्ते के हटाने की है। सरकारी बिल्डिंग या कॉलेजों के अंदर बैठी मधुमक्खियों को वहां के अधिकारी या प्रबंधन हटवाए। उधर, शुक्रवार को निगम की टीम छुट्टी पर रही। अब शनिवार रात को छत्ते हटाए जाएंगे।
चार जगह हो चुके हैं मधुमक्खियों के हमले, एक ही मौत
शहर में दो बार डीएलएफ पार्क में मधुमक्खियों के हमले हो चुके हैं। बताया जाता है कि पहले दिन कुछ युवक शहतूत तोड़ रहे थे। एक पत्थर दूसरे पेड़ पर मधुमक्खियों के छत्ते पर जा लगा। इसके बाद मक्खियों ने पार्क में बैठे लोगों पर हमला कर दिया। इससे नरेंद्र पुनियानी नाम के व्यक्ति की जान चली गई थी। इसके बाद अगले दिन डीएलएफ पार्क के बाहर, फिर वैश्य कालेज और गुरुवार को राजकीय महिला कालेज की छात्रों पर हमला कर दिया था। तभी से निगम शहर में मधुमक्खियों के छत्ते हटाने का अभियान चलाए हुए है।
सरकारी कार्यालयों के अधिकारियों ने नहीं उठाया अभी तक कदम
उधर, लघुसचिवालय व जिला विकास भवन में दीवारों पर मधुमक्खियों के छत्ते लटक रहे हैं, लेकिन निगम को छोड़कर किसी भी विभाग ने छत्ते हटाने का काम शुरू नहीं किया है।
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हरियाणा एग्रीकल्चर यूनिवर्सिटी हिसार के कीट विज्ञान विभाग के हेड प्रो. योगेश कुमार ने बताया कि जब तक मधुमक्खी के छत्ते तो छेड़ा नहीं जाता, वे हमला नहीं करती हैं। कोई पत्थर मार दे या छत्ते पर शीशे के जरिए चमक पैदा की जाए तो मधुमक्खियां उग्र हो जाती हैं। गलती यह हुई कि छत्तों को हटाने के चलते सभी मधुमक्खियों को छेड़ दिया गया, ऐसे में उनके दोबारा बसने तक इंतजार करना होगा। जून और जुलाई में मधुमक्खियां थोड़े कम तापमान वाली जगहों पर चली जाएंगी।
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जिला वन्य प्राणी विभाग के अधिकारी दीपक ऐलावादी ने बताया कि मधुमक्खी सात तरह की होती हैं। साथ ही इसकी 44 उप जातियां हैं। एक छत्ते यानि कॉलोनी में एक रानी मधुमक्खी होती है, जबकि 300 के करीब नर मक्खी होती हैं। अन्य दो से ढाई हजार सैनिक (वर्कर) मधुमक्खी होती हैं। सैनिक मधुमक्खियों का काम छत्ते के निर्माण से लेकर फूलों से रस लेकर आना और छत्ते की सुरक्षा करना होता है।
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सावधान में ही बचाव, ज्यादा काटने से जा सकती है जान
एक्सपर्ट का कहना है कि खतरा महसूस होने पर ही मधुमक्खी काटती है। वसंत ऋ तु में रानी मधुमक्खी जहां अड्डे देती हैं, वहीं सैनिक मधुमक्खी छत्ते के निर्माण के साथ-साथ शहद एकत्रित करती हैं। वसंत ऋतु में पूरे सीजन का शहद एकत्रित हो जाता है। गर्मी के मौसम में मक्खी अपनी कॉलोनी बदलती हैं। अगर रास्ते में उनको किसी से खतरा महसूस होता है, तभी वे काटती हैं। एक मधुमक्खी के काटते ही डंक से निकलने वाली गंध दूसरी मधुमक्खियों तक पहुंच जाती है। तब वे एक साथ हमला करती हैं। ऐसे में जब मधुमक्खी काटते, तुरंत डंक को बाहर न निकालें। जहां तक संभव हो, शरीर को तुरंत ढकने का प्रयास करें।
निगम नहीं हटाएगा कॉलेज व सरकारी आफिस से छत्ते
निगम प्रशासन का कहना है कि उनकी जिम्मेदारी केवल पार्कों से छत्ते के हटाने की है। सरकारी बिल्डिंग या कॉलेजों के अंदर बैठी मधुमक्खियों को वहां के अधिकारी या प्रबंधन हटवाए। उधर, शुक्रवार को निगम की टीम छुट्टी पर रही। अब शनिवार रात को छत्ते हटाए जाएंगे।
चार जगह हो चुके हैं मधुमक्खियों के हमले, एक ही मौत
शहर में दो बार डीएलएफ पार्क में मधुमक्खियों के हमले हो चुके हैं। बताया जाता है कि पहले दिन कुछ युवक शहतूत तोड़ रहे थे। एक पत्थर दूसरे पेड़ पर मधुमक्खियों के छत्ते पर जा लगा। इसके बाद मक्खियों ने पार्क में बैठे लोगों पर हमला कर दिया। इससे नरेंद्र पुनियानी नाम के व्यक्ति की जान चली गई थी। इसके बाद अगले दिन डीएलएफ पार्क के बाहर, फिर वैश्य कालेज और गुरुवार को राजकीय महिला कालेज की छात्रों पर हमला कर दिया था। तभी से निगम शहर में मधुमक्खियों के छत्ते हटाने का अभियान चलाए हुए है।
सरकारी कार्यालयों के अधिकारियों ने नहीं उठाया अभी तक कदम
उधर, लघुसचिवालय व जिला विकास भवन में दीवारों पर मधुमक्खियों के छत्ते लटक रहे हैं, लेकिन निगम को छोड़कर किसी भी विभाग ने छत्ते हटाने का काम शुरू नहीं किया है।