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पराली को ढाल बना कर अपनी जान बचा रहा प्रशासन

Fri, 10 Nov 2017 03:06 AM IST
Updated Fri, 10 Nov 2017 03:06 AM IST
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पराली को ढाल बना कर अपनी जान बचा रहा प्रशासन
पराली को ढाल बना कर अपनी जान बचा रहा प्रशासन
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- सील प्लांट फैला रहे प्रदूषण, नहीं रुक रहा निर्माण कार्य
फोटो सहित
अमर उजाला ब्यूरो
रोहतक।
स्मॉग भले ही उत्तर भारत में रह रहे लोगों के लिए जानलेवा बनता जा रहा है, लेकिन सच्चाई यह है कि सरकार और अधिकारी इस मामले में मौन साधे हुए हैं। एक सुर में सभी किसानों द्वारा पराली जलाने को इसका सबसे बड़ा कारण मान रहे हैं। जबकि शहर में प्रदूषण फैलाने वाले निर्माण धड़ल्ले से चल रहे हैं। स्थिति यह है कि प्रशासन के आदेशों की अनदेखी करते हुए सील प्लांट भी 24 घंटे जहरीला धुआं उगल रहे हैं।
पॉल्यूशन विभाग के एसडीई अजय मलिक के अनुसार वीरवार को सुबह शहर के वातावरण में 369 एक्यूवाई की मात्रा के हिसाब से प्रदूषण था। यह माप एमडीयू से लिया गया था। अधिकारी ने बताया कि पूरे जिले में लगभग समान मात्रा में प्रदूषण होता है। यदि शहर की बात करें तो यहां मानक के आधार पर 100 एक्यूआई ही आमजन के स्वास्थ्य के लिए सही है। इससे अधिक होने पर मानव जीवन को खतरा होने लगता है।
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अधिकारी ने बताया कि प्रदूषण के स्तर में दो प्रकार के मैटल होते हैं। इसमें एक 10 माइक्रोन होता है, यह 100 तक मानव जीवन के लिए खतरा नहीं माना जाता। जबकि दूसरा 2.5 माइक्रोन आकार का होता है, इसकी वातावरण में माजूदगी 60 से अधिक नहीं होनी चाहिए। इसमें चार तरह की गैसों का मिश्रण होता है, इनकी मात्रा अधिक होने पर हवा जहरीली हो जाती है।
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अजय मलिक ने बताया कि जिले में प्रदूषण की मात्रा जांचने के लिए एक ही मशीन है। इसके अलावा प्रदेश में गुरुग्राम, पंचकुला और फरीदाबाद में ही जांच मशीन हैं। वातावरण में अधिक प्रदूषण न हो इसके लिए पहले ही ईंट भट्ठों का बंद करवा रखा है। जो फिलहाल ईंट भट्ठे संचालित हो रहे हैं वह नई तकनीक के हैं। गौरतलब है कि जिले में 146 ईंट भट्ठे हैं और इनमें से महज दो ही संचालित हो रहे हैं।

आईएमटी में नियमों को ताक पर रखकर चल रहा क्रेशर
शहर भले ही प्रदूषण की मार से जूझ रहा हो, लेकिन आईएमटी में लगा क्रेशर आसमान में अपना धुंआ लगातार छोड़ रहा है। हैरानी की बात है कि प्रदूषण जांच करने वाला विभाग दावा कर रहा है कि इसे वह काफी समय पहले सील किया जा चुका है। विभाग की मानें तो यदि क्रेशर संचालित हो रहा है तो उसकी सील तोड़ी गई होगी, वह इसकी जांच कराएंगे और सख्त कार्रवाई करेंगे। गौरतलब है कि क्रेशर से निकलने वाला प्रदूषण इन दिनों साफ तौर पर देखा जा सकता है कि इसका धुआं आसमान में जाने की बजाए उल्टी जमीन पर ही फैल रहा है। इसमें प्रदूषण की इतनी मात्रा है कि यह किसी भी व्यक्ति को कैंसर जैसी बीमारी देने में सक्षम है।

पीजीआईएमएस में चल रहा सड़क रिपेयर का कार्य
स्वास्थ्य विभाग भले ही लोगों की और स्वयं की स्वास्थ्य संबंधी समस्याओं को भुगत रहा है। लेकिन इस मौसम में यहां की सड़क की रिपेयरिंग का कार्य तेजी पर हो रहा है। यहां तारकोल की पट्टी लगाई जा रही है और इसे भारी प्रदूषण करने वाले रोड रोलर से समतल किया जा रहा है। इसे रोकने वाला कोई नहीं है। वहीं मौसम विभाग की मानें तो वीरवार को सायं ढलते ही वातावरण में प्रदूषण का स्तर एक्यआई 400 को पार कर गया।

रुक-रुक कर हवा चलने से मिल रही कुछ राहत
स्मॉग का कहर लगातार जारी है। लेकिन दिन-रात रुक-रुक कर चल रही हवाओं ने लोगों को राहत जरूर प्रदान की है। स्मॉग की घनिष्ठता कम होेने के बावजूद वातावरण में प्रदूषण का स्तर अभी भी खतरे को पार कर रहा है। इसके चलते सबसे अधिक समस्या महिलाओं, बच्चों और बुजुर्गों को हो रही है। सबसे बड़ी समस्या इन दिनों सांस की बीमारी, दमा वाले मरीजों को हो रही है।

रात को दृश्यता कम होने से चालकों को हो रही परेशानी
रात में स्मॉग की अधिकता के चलते दृश्यता काफी कम हो रही है। इसका असर यह हो रहा है कि रात्रि में चलने वाले वाहन चालकों को साफ दिखाई नहीं देता। पीजीआईएमएस, जिला अस्पताल और निजी अस्पतालों में सड़क दुर्घटना में घायल हो कर आने वाले मरीजों की संख्या में इन दिनाें इजाफा हो रहा है। वहीं रेलवे पर स्मॉग का सबसे अधिक असर पड़ा है। यहां दिल्ली की ओर जाने वाली छिंदवाड़ा एक्सप्रेस 5 घंटे, जनता एक्सप्रेस 3 घंटे, जसलपुर एक्सप्रेस 2 घंटे, इंटर सिटी सुपर फास्ट 2 घंटे लेट रही। इसके अलावा वीरवार को बरेली इंटर सिटी रद्द रही। वहीं जींद की ओर जाने वाली जींद सवारी गाड़ी 20 मिनट, तूफान एक्सप्रेस 18 घंटे, गंगानगर इंटर सिटी 7 घंटे, फिरोजपुर इंटर सिटी 8 घंटे, नांदेड अमृतसर एक्सप्रेस 15 घंटे, फिरोजपुर जनता एक्सप्रेस 30 मिनट लेट रही। इसके अलावा भिवानी की ओर जाने वाली भिवानी सवारी गाड़ी 45 मिनट लेट रही।

बोले एक्सपर्ट
स्मॉग की समस्या का हल सिर्फ बरसात और तेज हवा का चलना है। जब तक मौसम साफ नहीं होता, लोग सुबह और सायं खुले में सैर या जॉगिंग न करें। इस समय पर आंखों की एलर्जी होने के अलावा सांस संबंधी समस्या हो सकती है। यदि किसी को बाहर निकलना ही पड़ता है तो वह बगैर मास्क के बाहर न निकले। इन दिनों ओपीडी में सांस संबंधी मरीजों की संख्या में 30 से 40 फीसदी इजाफा हुआ है। यदि इस समस्या का जल्द समाधान नहीं होता तो यह समय बीतने के साथ गंभीर होती जाएगी। आमजन को चाहिए कि वह अब अपने स्तर पर प्रदूषण को फैलने से रोकें।

- डॉ. ध्रूव चौधरी, विभागाध्यक्ष, पीसीसीएम, पीजीआईएमएस

बोले उपायुक्त
सील किए गए प्लांट को चलाए जाने का मामला संज्ञान में नहीं है। यदि यह चल रहा है तो यह नियमों के खिलाफ है। इस मामले में संबंधित विभाग को निर्देश दे दिए गए हैं, जांच के बाद सख्त कार्रवाई की जाएगी। इसके अलावा प्रदूषण की रोकथाम के लिए अन्य विभागों को भी निर्देश दिए गए हैं।
- यश गर्ग, उपायुक्त
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