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अधिकारियों की लापरवाही डेढ़ करोड़ की ब्लड मोबाइल बस को बना रहा सफेद हाथी

Sat, 17 Feb 2018 02:52 AM IST
Updated Sat, 17 Feb 2018 02:52 AM IST
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अधिकारियों की लापरवाही डेढ़ करोड़ की ब्लड मोबाइल बस को बना रहा सफेद हाथी
फोटो सहित
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अधिकारियों की लापरवाही डेढ़ करोड़ की ब्लड मोबाइल बस को बना रही कबाड़
- एसी जनरेटर, पावर बैकअप, फ्रिज खराब, अप्रशिक्षित चालक के हाथ में दी बस

संजय कुमार
रोहतक।
पंडित भगवत दयाल शर्मा स्वास्थ्य विज्ञान विश्वविद्यालय के अधिकारियों की लापरवाही संस्थान के माडर्न ब्लड बैंक की डेढ़ करोड़ रुपये की ब्लड मोबाइल बस को कबाड़ बना रही है। इस बस में एसी जनरेटर, पावर बैकअप और ब्लड स्टोर करने के लिए लगी फ्रिज तक एक साल से खराब है। स्थिति यह है कि बस को प्रशिक्षित की बजाए अप्रशिक्षित चालक को चलाने के लिए दिया गया है। महज दिखावे के लिए चलाई जा रही इस बस से नाको को आर्थिक नुकसान के साथ रक्तदान शिविर लगाने वाले समाज सेवियों को भी असुविधा झेलनी पड़ रही है।
मॉडर्न ब्लड बैंक की शान कही जाने वाली आधुनिक सुविधाओं से लैस ब्लड मोबाइल बस एक बार फिर राजनीति का शिकार हो रही है। आरटीआई के तहत मांगी गई जानकारी में खुलासा हुआ है कि इस बस को चलाने का प्रशिक्षण संस्थान के एक चालक वीरेंद्र हुड्डा को है। इसके बावजूद इसे दूसरे चालक को दिया गया है। सूत्रों की मानें तो इस बस का सिस्टम चलाने के लिए और बस को चलाने के लिए अलग-अलग इंजन की व्यवस्था है। इसके बावजूद यहां मुख्य इंजन से ही कार्य लिया जा रहा है। इस बस में लगे एसी सिस्टम के लिए बिजली उत्पन्न करने के लिए लगा इंजन, पावर बैकअप और ब्लड स्टोर करने वाले चार फ्रिज खराब हैं। बस की खराबी पर कोई सवाल न उठें इसलिए बस को चलाया भी जाता है। इस दौरान मुख्य इंजन से बस और सिस्टम को चलाया जाता है। अधिकांश स्टाफ इस बस को कहीं ले जाने से बचता भी है। यदि ब्लड बैंक किसी रक्तदान शिविर में जाती है तो संस्थान की एक अन्य गाड़ी बीच-बीच में शिविर से रक्त को पीजीआईएमएस पहुंचाने के लिए जाती है। सूत्रों का दावा है कि बस की रिपेयरिंग का मार्च में ठेका समाप्त होने जा रहा है, इसके बावजूद कोई बस सही नहीं करवा रहा है।
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बस सही न करवाने पर यह हैं नुकसान
- डीजल की अधिक खपत
- एक लीटर में ढाई किलोमीटर की एवरेज
- एक घंटा में मुख्य इंजन की खपत दस लीटर डीजल
- एक घंटा में पावर जनरेट करने के लिए पांच लीटर डीजल
- 240 यूनिट ब्लड संभाल कर रखने वाले चार फ्रीजर खराब
नोट : ब्लड मोबाइल बस को दिसंबर 2010 में लाया गया था। इसमें ब्लड लेने और रखने की पर्याप्त व्यवस्था है। इसमें ब्लड को स्टोर भी किया जा सकता है। इस बस को रक्तदान शिविर लगाने वालों को काफी लाभ मिलता है। लेकिन पावर बैकअप इंजन खराब होने से इसके डीजल की खपत बढ़ गई है और फ्रीजर खराब होने से दूसरे वाहन को बार-बार संस्थान रक्त पहुंचाने में अतिरिक्त डीजल खर्च करना पड़ता है।
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बोले अधिकारी
पहले ट्रांसपोर्ट का चार्ज सुरेश प्रधान का था। उसके बाद यह चार्ज मेरे पास है। ब्लड मोबाइल बस हमारी नहीं नाको की है। यदि कोेई शिकायत करेगा तो ही हमें पता चलेगा कि वह खराब है। मेरी जानकारी में बस सही है, वह रोज रक्तदान शिविर में जाती है।

- सुधीर कत्याल, ट्रांसपोर्ट अधिकारी, पीजीआईएमएस

बोली अधिकारी
नाको की ब्लड मोबाइल बस की समस्या पर संबंधित अधिकारी से बात की जाएगी। समस्या कहां आ रही है बात करके समाधान कराया जाएगा।
- डॉ. जसजीत कौर, प्रोजेक्ट डायरेक्टर, नाको, पंचकूला

बोले समाजसेवी
बस में समस्याओं का अंबार है। इसकी न तो एलईडी चलती और न ही फ्रिजर चलता है। बस में स्टाफ की अनियमितता अधिक हैं। जो चीज इसमें चलने लायक है वह भी नहीं चलाई जाती। 19 फरवरी को शिविर एमडीयू में लगाया जाना है, देखते हैं क्या होगा।
- तस्वीर हुड्डा, समाज सेवी, रक्तदान शिविर आयोजक
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