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जींद - कबड्डी मुकाबला बना आकर्षण का केंद्र-COR

Mon, 19 Mar 2018 12:52 AM IST
Updated Mon, 19 Mar 2018 12:52 AM IST
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जींद - कबड्डी मुकाबला बना आकर्षण का केंद्र-COR

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अब नेशनल मुकाबले को तैयार ‘गावरुओं’ की टीम
अमर उजाला ब्यूरो
जींद।
हर्बल पार्क में 50 साल से अधिक उम्र के बुजुर्गों ने कबड्डी मुकाबले में 25 साल तक के युवाओं को हरा दिया। इस मुकाबले का आइडिया एक साल पहले पुलिस कांस्टेबल सुभाष तितरम को आया था। एक साल पहले वो नेशनल वेटर्न गेम्स में हिस्सा लेने लखनऊ गए थे। उन्होंने वहां कबड्डी को भी वेटर्न गेम में शामिल करने की मांग की। वहां कर्नाटक के एक खिलाड़ी ने उन्हें अपने क्लब की ओर से खेलने का न्योता दिया, लेकिन साथ ही शर्त रखी कि फिर वे हरियाणा से नहीं खेल सकेंगे। उन्होंने तभी अपनी टीम बनाने का फैसला लिया और अब एक साल बाद उनकी टीम नेशनल मुकाबले के लिए तैयार है।

कैंसर को हरा कबड्डी में दाव लगा रहे सुभाष
सुभाष तितरम के अनुसार उन्हें 2010 में बड़ी आंत में कैंसर की पुष्टी हुई थी। इसके बाद 2011 में ऑपरेशन हुआ। तब वे बहुत कमजोर हो गए, लेकिन कभी हार नहीं मानी। हालांकि अभी वे कैंसर से पीड़ित हैं, लेकिन इसकी परवाह नहीं करते।
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एक महीने पहले शुरू हुई दोनों टीमों की तैयारी
बुजुर्गों और युवाओं की टीमों के बीच मैच की तैयारी एक महीने पहले शुरू हो गई थी। दरअसल सुभाष तितरम हर्बल पार्क में ही युवाओं को कबड्डी के गुर सिखा रहे हैं। ऐसे में युवाओं और बुजुर्गों के बीच मैच की योजना बनाई। इसमें शर्त रखी गई कि युवा टीम में 18 से 25 वर्ष तक के खिलाड़ी और बुजुर्गों की टीम में 50 वर्ष से अधिक उम्र के खिलाड़ी ही हिस्सा ले सकते हैं।
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अब कर्नाटक के क्लब से होगा मुकाबला
अब हमारी टीम तैयार है। कर्नाटक के क्लब के साथ मुकाबला करने का वादा किया है। अब क्लब को संदेश भेजा जाएगा कि वे यहां आकर मैच लगाएंगे या हमारी टीम वहां जाएगी। हर्बल पार्क में हर माह इस प्रकार का मैच किया जाएगा। इसमें टीमें बढ़ाने के लिए भी प्रयास होगा।

सुभाष तितरम, वेटर्न टीम।

बुजुर्गों की तकनीक अच्छी
बुजुर्गों के साथ हुए मैच को भले ही युवा टीम हार गई है, लेकिन इससे बहुत कुछ सीखने को मिला है। ये बुजुर्ग कहां हुए हैं, इनकी तकनीक अच्छी है। हमें सीखने को मिला है कि सिर्फ ताकत नहीं तकनीक के दम पर भी मैच जीता जा सकता है। - विक्रम सिंह, कप्तान युवा टीम।
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