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मधुमेह व हाई ब्लड प्रेशर वाले ग्लूकोमा से सावधान रहें

Fri, 08 Mar 2019 02:46 AM IST
Rohtak Bureau रोहतक ब्यूरो
Updated Fri, 08 Mar 2019 02:46 AM IST
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मधुमेह व हाई ब्लड प्रेशर वाले ग्लूकोमा से सावधान रहें
रोहतक। यदि किसी को मधुमेह और हाई बीपी की शिकायत है और परिवार में किसी को पहले से काला मोतिया या चश्मे का अधिक नंबर है तो वह सावधान रहें। क्योंकि ये लक्षण ग्लूकोमा का हो सकता है। ऐसे लक्षण वाले लोगों को डॉक्टर के संपर्क में रहना चाहिए, इससे दवा व सर्जरी से बीमारी को रोका जा सकता है। यदि ऐसा नहीं होता तो आंखों की रोशनी तक जा सकती है। यह बात पीजीआईएमएस के नेत्र विभाग से डॉ. सुमित सचदेवा ने कही। बता दें कि पीजीआईएमएस क्षेत्रीय नेत्र विज्ञान संस्थान में 10 से 16 मार्च तक विश्व ग्लूकोमा सप्ताह मनाने जा रहा है।
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डॉ. सचदेवा ने बताया कि ग्लूकोमा नेत्र संबंधी खतरनाक बीमारी है। यह विश्व में अंधेपन का दूसरा सबसे मुख्य कारण है। इसमें एक बार नजर खोने के बाद वापस नहीं आती। अकेले पीजीआईएमएस रोहतक में सालाना 1200 के करीब मरीज काला मोतिया का उपचार कराने आते हैं और कुछ मरीज तो आखिरी स्टेज में आते हैं। इस समय तक इन्हें दिखाई देना बंद हो चुका होता है। इसके अंतर्गत नेत्र विभाग ओपीडी में ग्लूकोमा स्क्रीनिंग कैंप चलाएगा और जागरूकता व्याख्यान के माध्यम से लोगों को इस बीमारी के प्रति जागरूक किया जाएगा। डॉ. सचदेवा ने बताया कि हमें ग्लूकोमा (काला मोतिया) के बारे में अधिक से अधिक प्रचार-प्रसार करना चाहिए। इससे ग्रामीण क्षेत्रों में रहने वाले लोग जागरूक होकर समय पर अपना उपचार करवा कर इस बीमारी से बच सकेंगे। संस्थान में प्रत्येक बुधवार व वीरवार को ग्लूकोमा यूनिट की ओर से डॉ. मनीषा राठी व वह स्वयं ग्लूकोमा क्लीनिक चलाते हैं। हर साल ग्लूकोमा के 400 से 500 नए मरीज ओपीडी में उपचार कराने आ रहे हैं।
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ग्लूकोमा के लक्षण
1. रोशनी के चारों ओर आभा दिखाई देना
2. नजर में संकरापन आना
3. बार-बार चश्मे का नंबर बदलना
4. आंख में लालिमा
5. आंखों में धुंधलापन आना
6. आंख व सिर में दर्द होना

यह करें और यह न करें
1. डॉक्टर की बताई दवा निरंतर समय पर दवा लें।
2. जितनी दवा बताई गई है उसकी मात्रा या संख्या में बढ़ोतरी न करें।
3. ड्रॉप्स के बीच 15 मिनट का अंतर रखें।
4. ड्राप्स को ठीक तापमान पर रखें।
5. मरीज का उपचार जीवन भर चलता है, इसे बीच में स्वयं बंद न करें।
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