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साइबर सेंध-संशोधित
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अमर उजाला ब्यूरो
रोहतक। सतर्क करने के तमाम प्रयासों के बावजूद जिले में रोजाना तीन-चार उपभोक्ताओं के खातों को हैकर खंगाल रहे हैं। चौंकाने वाली बात यह है कि हैकर रात 11 से 3 बजे के बीच ज्यादा सक्रिय रहते हैं, क्योंकि इस वक्त लोग गहरी नींद में होते हैं और उनकी गाढ़ी कमाई की रकम खाते से निकालने पर आने वाले मैसेज का पता भी नहीं चलता। वर्ष 2018 में हैकर ने एटीएम कार्ड की क्लोनिंग कर 1200 से अधिक उपभोक्ताओं को निशाना बनाया। इनमें से 900 उपभोक्ताओं के खातों से रात 11 बजे के बाद और तीन बजे से पहले रुपये निकाले गए हैं। मामले को गंभीरता से लेते हुए एसपी ने सभी थानाध्यक्षों से अनसुलझे मामलों का ब्योरा तलब किया है। साथ ही दो टीम गठित कर साइबर ठगों पर जल्द शिकंजा कसने के निर्देश दिए हैं।
पुलिस महकमे से मिली जानकारी के मुताबिक जिले की पिछले वर्ष 1200 से अधिक शिकायतें विभिन्न थाना पुलिस और साइबर सेल को प्राप्त हुई। इनमें से 900 उपभोक्ताओं के खाते से रात 11 बजे से 3 बजे के बीच रकम निकाली गई थी। तमाम शिकायतों के बावजूद साइबर सेल अब तक साइबर ठगों के गिरोह को काबू करने में नाकाम रही है। बढ़ते साइबर अपराधों को लेकर पुलिस का बस इतना कहना है कि लोगों को जागरूक किया जा रहा है। यदि रात में खाते से रुपये निकाले जाने का मैसेज प्राप्त हो रहा है तो तुरंत ही पुलिस या फिर संबंधित बैंक के टोल फ्री नंबर पर सूचना दें। उधर, एलडीएम मुकेश कमार का कहना है कि इस संबंध में उपभोक्ताओं को गोष्ठी आदि के माध्यम से भी उपभोक्ताओं को जागरूक किया जाएगा।
2019 में अब तक 20 से ज्यादा लोग हो चुके शिकार
पुलिस के अनुसार वर्ष 2019 में भी कार्ड क्लोन कर उपभोक्ताओं के खाते से रुपये निकालने के 20 से अधिक मामले सामने आ चुके हैं। पुलिस मामला दर्ज करने के बाद ठगों का पता लगाने में जुटी है। रात में चार घंटों में ही रुपये निकालने की यह हो सकती है वजह
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पुलिस के अनुसार रात करीब 10 बजे तक अधिकतर लोग गहरी नींद में सो जाते हैं। खाते से रुपये निकालने का मोबाइल पर मैसेज आने पर भी लोग ध्यान नहीं दे पाते हैं। यदि मैसेज को उपभोक्ता पढ़ भी लेते हैं तो रात में साइबर सेल और बैंक में उनकी सुनवाई गंभीरता नहीं हो पाती। दूसरी वजह यह है कि 12 बजे के बाद दूसरा दिन शुरू हो जाता है। इससे पैसे निकालने की सीमा भी बढ़ जाती है। इसके कारण हैकर दूसरी बार फिर से रुपये निकालने में कामयाब हो जाते हैं। लोगों को सुबह उठने के बाद ही मामले का पता लग सका।
कोट
रुपये निकालने वाले हैकर्स के गिरोह पर शिकंजा कसने को दो टीमों का अलग से गठन किया गया है। साथ ही साइबर एक्सपर्ट की भी सलाह ली जा रही है। जल्द ही गिरोह का भंड़ाफोड़ कर दिया जाएगा।
- जशनदीप सिंह रंधावा, एसपी
यह बरतें सावधानियां
- कार्ड क्लोन होने के तुरंत बाद ही बैंक के सहायता नंबर पर कॉल कर शिकायत करें
- कोशिश करें कि सुरक्षा गार्ड वाले बूथ पर जाकर ही एटीएम से रुपये निकाले जाए
- रुपये निकालते समय अनजान व्यक्ति बूथ के अंदर नहीं होना चाहिए
- छुपाकर कार्ड पिन डायल करें, डेबिट कार्ड का इस्तेमाल करने के बाद पासवर्ड बदल लें
- खरीदारी करते वक्त भी कार्ड स्वैप करने पर क्लोनिंग की आशंका रहती है, कार्ड को स्वैप करने से बचें
साइबर एक्सपर्ट शोकिंद्र ने बताया कि एटीएम कार्ड से डाटा चोरी करने के लिए एक डिवाइस का इस्तेमाल किया जाता है। इसे स्कीमर कहते हैं। एटीएम से डाटा चोरी करने के लिए हैकर स्कीमर को मशीन के कार्ड रीडर स्लाट के ऊपर लगा देते हैं। मशीन में कार्ड इनसर्ट करते ही डाटा स्कीमर में सुरक्षित हो जाता है। स्कीमर का आकार, डिजाइन व रंग बिल्कुल मशीन के कार्ड रीडर स्लाट से मिलता जुलता होता है, जिस कारण उपभोक्ता इसे पहचान नहीं पाते हैं।
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रोहतक। सतर्क करने के तमाम प्रयासों के बावजूद जिले में रोजाना तीन-चार उपभोक्ताओं के खातों को हैकर खंगाल रहे हैं। चौंकाने वाली बात यह है कि हैकर रात 11 से 3 बजे के बीच ज्यादा सक्रिय रहते हैं, क्योंकि इस वक्त लोग गहरी नींद में होते हैं और उनकी गाढ़ी कमाई की रकम खाते से निकालने पर आने वाले मैसेज का पता भी नहीं चलता। वर्ष 2018 में हैकर ने एटीएम कार्ड की क्लोनिंग कर 1200 से अधिक उपभोक्ताओं को निशाना बनाया। इनमें से 900 उपभोक्ताओं के खातों से रात 11 बजे के बाद और तीन बजे से पहले रुपये निकाले गए हैं। मामले को गंभीरता से लेते हुए एसपी ने सभी थानाध्यक्षों से अनसुलझे मामलों का ब्योरा तलब किया है। साथ ही दो टीम गठित कर साइबर ठगों पर जल्द शिकंजा कसने के निर्देश दिए हैं।
पुलिस महकमे से मिली जानकारी के मुताबिक जिले की पिछले वर्ष 1200 से अधिक शिकायतें विभिन्न थाना पुलिस और साइबर सेल को प्राप्त हुई। इनमें से 900 उपभोक्ताओं के खाते से रात 11 बजे से 3 बजे के बीच रकम निकाली गई थी। तमाम शिकायतों के बावजूद साइबर सेल अब तक साइबर ठगों के गिरोह को काबू करने में नाकाम रही है। बढ़ते साइबर अपराधों को लेकर पुलिस का बस इतना कहना है कि लोगों को जागरूक किया जा रहा है। यदि रात में खाते से रुपये निकाले जाने का मैसेज प्राप्त हो रहा है तो तुरंत ही पुलिस या फिर संबंधित बैंक के टोल फ्री नंबर पर सूचना दें। उधर, एलडीएम मुकेश कमार का कहना है कि इस संबंध में उपभोक्ताओं को गोष्ठी आदि के माध्यम से भी उपभोक्ताओं को जागरूक किया जाएगा।
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2019 में अब तक 20 से ज्यादा लोग हो चुके शिकार
पुलिस के अनुसार वर्ष 2019 में भी कार्ड क्लोन कर उपभोक्ताओं के खाते से रुपये निकालने के 20 से अधिक मामले सामने आ चुके हैं। पुलिस मामला दर्ज करने के बाद ठगों का पता लगाने में जुटी है। रात में चार घंटों में ही रुपये निकालने की यह हो सकती है वजह
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पुलिस के अनुसार रात करीब 10 बजे तक अधिकतर लोग गहरी नींद में सो जाते हैं। खाते से रुपये निकालने का मोबाइल पर मैसेज आने पर भी लोग ध्यान नहीं दे पाते हैं। यदि मैसेज को उपभोक्ता पढ़ भी लेते हैं तो रात में साइबर सेल और बैंक में उनकी सुनवाई गंभीरता नहीं हो पाती। दूसरी वजह यह है कि 12 बजे के बाद दूसरा दिन शुरू हो जाता है। इससे पैसे निकालने की सीमा भी बढ़ जाती है। इसके कारण हैकर दूसरी बार फिर से रुपये निकालने में कामयाब हो जाते हैं। लोगों को सुबह उठने के बाद ही मामले का पता लग सका।
कोट
रुपये निकालने वाले हैकर्स के गिरोह पर शिकंजा कसने को दो टीमों का अलग से गठन किया गया है। साथ ही साइबर एक्सपर्ट की भी सलाह ली जा रही है। जल्द ही गिरोह का भंड़ाफोड़ कर दिया जाएगा।
- जशनदीप सिंह रंधावा, एसपी
यह बरतें सावधानियां
- कार्ड क्लोन होने के तुरंत बाद ही बैंक के सहायता नंबर पर कॉल कर शिकायत करें
- कोशिश करें कि सुरक्षा गार्ड वाले बूथ पर जाकर ही एटीएम से रुपये निकाले जाए
- रुपये निकालते समय अनजान व्यक्ति बूथ के अंदर नहीं होना चाहिए
- छुपाकर कार्ड पिन डायल करें, डेबिट कार्ड का इस्तेमाल करने के बाद पासवर्ड बदल लें
- खरीदारी करते वक्त भी कार्ड स्वैप करने पर क्लोनिंग की आशंका रहती है, कार्ड को स्वैप करने से बचें
साइबर एक्सपर्ट शोकिंद्र ने बताया कि एटीएम कार्ड से डाटा चोरी करने के लिए एक डिवाइस का इस्तेमाल किया जाता है। इसे स्कीमर कहते हैं। एटीएम से डाटा चोरी करने के लिए हैकर स्कीमर को मशीन के कार्ड रीडर स्लाट के ऊपर लगा देते हैं। मशीन में कार्ड इनसर्ट करते ही डाटा स्कीमर में सुरक्षित हो जाता है। स्कीमर का आकार, डिजाइन व रंग बिल्कुल मशीन के कार्ड रीडर स्लाट से मिलता जुलता होता है, जिस कारण उपभोक्ता इसे पहचान नहीं पाते हैं।