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हीहीहीही
Updated Thu, 11 Jan 2018 02:49 AM IST
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ट्रॉमा सेंटर शुरू, इसीजी के लिए तकनीशियन नहीं
बीयरर व नर्सों पर जांच करने का दबाव, विरोध
ट्रॉमा सेंटर का फाइल फोटो
संजय कुमार
रोहतक। पंडित भगवत दयाल शर्मा स्वास्थ्य विज्ञान विश्वविद्यालय का धनवंतरी ट्रॉमा सेंटर एक जनवरी से शुरू हो गया है। लेकिन अभी मरीजों की इसीजी जांच करने के लिए यहां तकनीशियन उपलब्ध नहीं हैं। अब प्रशासन नई नियुक्ति होने तक यह जांच करने के लिए स्टाफ को प्रशिक्षण देने की तैयारी कर रहा है तो इसका विरोध शुरू हो गया है। नर्सों और बीयरर ने इस प्रशिक्षण को लेने से मना कर दिया है।
सूत्रों की मानें तो मंगलवार को देर रात से इसीजी इलेक्ट्रो कार्डियो ग्राम इसीजी जांच करने के नाम पर हंगामा होता रहा। यहां कभी बीयरर को कभी नर्सों को इस जांच के लिए कहा गया तो सभी ने इंकार कर दिया और पल्ला झाड़ते हुए कहा कि यह काम तकनीशियन का है। बगैर जानकारी के वह यह काम क्यों करें। इसके बाद प्रशासन ने उनको इसीजी जांच करने का प्रशिक्षण देने की बात कही तो सभी ने फिलहाल एक तरफा इंकार कर दिया है। गौरतलब है कि ट्रॉमा सेंटर में इसीजी जांच का अहम महत्व है, क्योंकि इसकी रिपोर्ट के बिना किसी मरीज का आपरेशन नहीं हो सकता। इसके अलावा आईसीयू में भी उपचाराधीन मरीजों का इसीजी लगातार करना पड़ता है। यह जांच दिल की बीमारी वाले मरीज, दिल का दौरा, दिल की बीमारियाें का आंकलन करने के लिए की जाती है। गौरतलब है कि ट्रॉमा सेंटर में इसीजी तकनीशियन की चार पोस्ट मंजूर हैं, इनकी भर्ती अभी होनी है। जबकि ट्रॉमा सेंटर प्रशासन की माने तो वह स्टाफ नर्सों को इसकी ट्रेनिंग देने की तैयारी में हैं। इसके लिए 18 नर्सों का चयन किया गया है। लेकिन इसके लिए विरोध हो रहा है।
क्या हो सकती है गड़बड़
इसीजी जांच में सात से लेकर 12 प्वाइंट होते हैं। इनके इलेक्ट्रोड को सही रिब्ज पर लगाने के लिए तकनीशियन को जानकारी होती है। यदि कोई इन इलेक्ट्रोड को गलत जगह लगाता है तो रिपोर्ट गलत आ सकती है। इसी रिपोर्ट के आधार पर डॉक्टर मरीज को उपचार देता है। इस जांच को प्रशिक्षण के बाद नर्स और डॉक्टर तो कर सकते हैं, लेकिन इसके लिए किसी बीयरर को नहीं कहा जा सकता। एक्सपर्ट की मानें तो यदि इलेक्ट्रोड जांच के दौरान ऊपर या नीचे लग जाते हैं तो रिपोर्ट का गलत होना तय होता है।
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बोले अधिकारी
इस संबंध में प्रशासन से बात की जाएगी। जल्द प्रयास किया जाएगा कि इसीजी तकनीशियनों की भर्ती की जाए। जब तक स्टाफ की तैनाती होती है तब तक प्रशिक्षण ले चुके स्टाफ से काम चलाया जाएगा। मरीज के उपचार में किसी तरह की कोई कमी नहीं आएगी।
- डॉ. संदीप, डीएमएस, धनवंतरी अपैक्स ट्रॉमा सेंटर, पीजीआईएमएस
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बीयरर व नर्सों पर जांच करने का दबाव, विरोध
ट्रॉमा सेंटर का फाइल फोटो
संजय कुमार
रोहतक। पंडित भगवत दयाल शर्मा स्वास्थ्य विज्ञान विश्वविद्यालय का धनवंतरी ट्रॉमा सेंटर एक जनवरी से शुरू हो गया है। लेकिन अभी मरीजों की इसीजी जांच करने के लिए यहां तकनीशियन उपलब्ध नहीं हैं। अब प्रशासन नई नियुक्ति होने तक यह जांच करने के लिए स्टाफ को प्रशिक्षण देने की तैयारी कर रहा है तो इसका विरोध शुरू हो गया है। नर्सों और बीयरर ने इस प्रशिक्षण को लेने से मना कर दिया है।
सूत्रों की मानें तो मंगलवार को देर रात से इसीजी इलेक्ट्रो कार्डियो ग्राम इसीजी जांच करने के नाम पर हंगामा होता रहा। यहां कभी बीयरर को कभी नर्सों को इस जांच के लिए कहा गया तो सभी ने इंकार कर दिया और पल्ला झाड़ते हुए कहा कि यह काम तकनीशियन का है। बगैर जानकारी के वह यह काम क्यों करें। इसके बाद प्रशासन ने उनको इसीजी जांच करने का प्रशिक्षण देने की बात कही तो सभी ने फिलहाल एक तरफा इंकार कर दिया है। गौरतलब है कि ट्रॉमा सेंटर में इसीजी जांच का अहम महत्व है, क्योंकि इसकी रिपोर्ट के बिना किसी मरीज का आपरेशन नहीं हो सकता। इसके अलावा आईसीयू में भी उपचाराधीन मरीजों का इसीजी लगातार करना पड़ता है। यह जांच दिल की बीमारी वाले मरीज, दिल का दौरा, दिल की बीमारियाें का आंकलन करने के लिए की जाती है। गौरतलब है कि ट्रॉमा सेंटर में इसीजी तकनीशियन की चार पोस्ट मंजूर हैं, इनकी भर्ती अभी होनी है। जबकि ट्रॉमा सेंटर प्रशासन की माने तो वह स्टाफ नर्सों को इसकी ट्रेनिंग देने की तैयारी में हैं। इसके लिए 18 नर्सों का चयन किया गया है। लेकिन इसके लिए विरोध हो रहा है।
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क्या हो सकती है गड़बड़
इसीजी जांच में सात से लेकर 12 प्वाइंट होते हैं। इनके इलेक्ट्रोड को सही रिब्ज पर लगाने के लिए तकनीशियन को जानकारी होती है। यदि कोई इन इलेक्ट्रोड को गलत जगह लगाता है तो रिपोर्ट गलत आ सकती है। इसी रिपोर्ट के आधार पर डॉक्टर मरीज को उपचार देता है। इस जांच को प्रशिक्षण के बाद नर्स और डॉक्टर तो कर सकते हैं, लेकिन इसके लिए किसी बीयरर को नहीं कहा जा सकता। एक्सपर्ट की मानें तो यदि इलेक्ट्रोड जांच के दौरान ऊपर या नीचे लग जाते हैं तो रिपोर्ट का गलत होना तय होता है।
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इस संबंध में प्रशासन से बात की जाएगी। जल्द प्रयास किया जाएगा कि इसीजी तकनीशियनों की भर्ती की जाए। जब तक स्टाफ की तैनाती होती है तब तक प्रशिक्षण ले चुके स्टाफ से काम चलाया जाएगा। मरीज के उपचार में किसी तरह की कोई कमी नहीं आएगी।
- डॉ. संदीप, डीएमएस, धनवंतरी अपैक्स ट्रॉमा सेंटर, पीजीआईएमएस