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युवा नौकरी तलाशने वाले नहीं, रोजगार पैदा करने वाले बनें : कुलपति
Fri, 30 Oct 2026 11:47 PM IST
रोहतक ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, रेवाड़ी
संवाद न्यूज एजेंसी, रेवाड़ी
Updated Fri, 30 Oct 2026 11:47 PM IST
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सेमिनार में भाग लेते विद्यार्थी। स्रोत : विवि
रेवाड़ी। इंदिरा गांधी विश्वविद्यालय में विद्यार्थियों को उद्यमिता के लिए प्रोत्साहित करने के उद्देश्य से केंद्रीय उद्यमिता प्रकोष्ठ की शुरुआत की गई। इस दौरान कुलपति प्रो. असीम मिगलानी ने कहा कि युवा नौकरी तलाशने वाले नहीं बल्कि रोजगार पैदा करने वाले बनें।
कुलपति प्रो. असीम मिगलानी की मौजूदगी में वाणिज्य विभाग के सेमिनार हॉल-2 में आयोजित कार्यक्रम में विश्वविद्यालय के केंद्रीय उद्यमिता प्रकोष्ठ का शुभारंभ किया गया। इसके माध्यम से विभिन्न विभागों के विद्यार्थियों के नए व्यावसायिक विचारों को आगे बढ़ाने और उन्हें उद्यम स्थापित करने में मार्गदर्शन दिया जाएगा।
कुलपति ने कहा कि विश्वविद्यालय का अकादमिक ज्ञान जब धारूहेड़ा और बावल के औद्योगिक अनुभवों से जुड़ेगा, तभी नवाचार और आत्मनिर्भरता को बढ़ावा मिलेगा।
उन्होंने कहा कि उनका लक्ष्य विश्वविद्यालय को दक्षिण हरियाणा में उद्यमिता और कौशल विकास के प्रमुख केंद्र के रूप में विकसित करना है। उन्होंने कहा कि युवा केवल नौकरी तलाशने वाले नहीं, बल्कि रोजगार पैदा करने वाले बनें।
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कुलसचिव प्रो. दिलबाग सिंह ने प्रकोष्ठ को प्रशासनिक और ढांचागत सहयोग देने का भरोसा दिलाया। प्रकोष्ठ के समन्वयक सीए संदीप पुरवा ने विद्यार्थियों को छह संभावित उद्यम क्षेत्रों की जानकारी दी।
इनमें औद्योगिक कचरा प्रबंधन और पुनर्चक्रण, स्थानीय परिवहन एप, कृषि तकनीक, संस्थागत भोजन व्यवस्था, ग्रामीण हस्तशिल्प की ब्रांडिंग तथा अनाज और कृषि उत्पादों की पैकेजिंग के लिए मजबूत बोरियों का निर्माण शामिल है।
उन्होंने बताया कि एक विशेष टीम विश्वविद्यालय के विभिन्न विभागों की कक्षाओं में जाकर विद्यार्थियों से संवाद करेगी और उनके व्यावहारिक व वित्तीय विचारों का चयन करेगी।
वाणिज्य विभाग के चेयरमैन प्रो. रवींद्र ने विद्यार्थियों के विचारों को व्यावसायिक स्वरूप देने में सहयोग की बात कही। कौशल संवर्धन एवं व्यावसायिक विकास केंद्र की निदेशिका प्रो. रीतू बजाज ने उद्यमियों के लिए जरूरी कौशल, संवाद और नेतृत्व क्षमता विकसित करने में सहयोग का आश्वासन दिया।
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कुलपति प्रो. असीम मिगलानी की मौजूदगी में वाणिज्य विभाग के सेमिनार हॉल-2 में आयोजित कार्यक्रम में विश्वविद्यालय के केंद्रीय उद्यमिता प्रकोष्ठ का शुभारंभ किया गया। इसके माध्यम से विभिन्न विभागों के विद्यार्थियों के नए व्यावसायिक विचारों को आगे बढ़ाने और उन्हें उद्यम स्थापित करने में मार्गदर्शन दिया जाएगा।
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कुलपति ने कहा कि विश्वविद्यालय का अकादमिक ज्ञान जब धारूहेड़ा और बावल के औद्योगिक अनुभवों से जुड़ेगा, तभी नवाचार और आत्मनिर्भरता को बढ़ावा मिलेगा।
उन्होंने कहा कि उनका लक्ष्य विश्वविद्यालय को दक्षिण हरियाणा में उद्यमिता और कौशल विकास के प्रमुख केंद्र के रूप में विकसित करना है। उन्होंने कहा कि युवा केवल नौकरी तलाशने वाले नहीं, बल्कि रोजगार पैदा करने वाले बनें।
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कुलसचिव प्रो. दिलबाग सिंह ने प्रकोष्ठ को प्रशासनिक और ढांचागत सहयोग देने का भरोसा दिलाया। प्रकोष्ठ के समन्वयक सीए संदीप पुरवा ने विद्यार्थियों को छह संभावित उद्यम क्षेत्रों की जानकारी दी।
इनमें औद्योगिक कचरा प्रबंधन और पुनर्चक्रण, स्थानीय परिवहन एप, कृषि तकनीक, संस्थागत भोजन व्यवस्था, ग्रामीण हस्तशिल्प की ब्रांडिंग तथा अनाज और कृषि उत्पादों की पैकेजिंग के लिए मजबूत बोरियों का निर्माण शामिल है।
उन्होंने बताया कि एक विशेष टीम विश्वविद्यालय के विभिन्न विभागों की कक्षाओं में जाकर विद्यार्थियों से संवाद करेगी और उनके व्यावहारिक व वित्तीय विचारों का चयन करेगी।
वाणिज्य विभाग के चेयरमैन प्रो. रवींद्र ने विद्यार्थियों के विचारों को व्यावसायिक स्वरूप देने में सहयोग की बात कही। कौशल संवर्धन एवं व्यावसायिक विकास केंद्र की निदेशिका प्रो. रीतू बजाज ने उद्यमियों के लिए जरूरी कौशल, संवाद और नेतृत्व क्षमता विकसित करने में सहयोग का आश्वासन दिया।