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Rewari News: चार मामलों में छह आरोपी बरी, पुलिस जांच की कमियां बनीं आधार
Sat, 31 Oct 2026 12:21 AM IST
रोहतक ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, रेवाड़ी
संवाद न्यूज एजेंसी, रेवाड़ी
Updated Sat, 31 Oct 2026 12:21 AM IST
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रेवाड़ी। जिले की अदालतों ने विभिन्न आपराधिक मामलों में सुनवाई के बाद छह आरोपियों को बरी कर दिया है। इन मामलों में सड़क हादसे, शराब बरामदगी, मारपीट और नाकाबंदी तोड़ने के आरोप शामिल थे। चार अलग-अलग फैसलों में अदालतों ने अभियोजन पक्ष के साक्ष्यों और पुलिस जांच की कमियों को बरी करने का आधार बनाया।
अदालतों ने माना कि अभियोजन पक्ष आरोपियों के खिलाफ अपराध संदेह से परे साबित करने में विफल रहा। सड़क हादसे के एक मामले में अदालत ने कहा कि आरोपी की पहचान के लिए टेस्ट आइडेंटिफिकेशन परेड नहीं कराई गई। केवल अदालत में पहली बार की गई पहचान पर दोषी नहीं ठहराया जा सकता।
शराब बरामदगी के मामले में पुलिस 24 बोतल जब्त करने का दावा तो कर पाई। लेकिन केमिकल जांच रिपोर्ट से उनमें शराब होने की पुष्टि नहीं हो सकी। मारपीट के एक मामले में दंपती की चोटों का मेडिकल रिकॉर्ड पेश नहीं किया गया। जांच में कई कमियां सामने आईं, जिससे अभियोजन पक्ष कमजोर पड़ा।
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वहीं, नाकाबंदी तोड़ने के मामले में शिकायतकर्ता और जांच अधिकारी एक ही थे। वाहन मालिक ने अभियोजन का समर्थन नहीं किया। आरोपी की मेडिकल जांच भी नहीं कराई गई थी। इन सभी बिंदुओं पर अदालत ने सवाल उठाए, जिससे आरोपियों को संदेह का लाभ मिला।
केस -01सड़क हादसे में आरोपी बरी
न्यायिक मजिस्ट्रेट प्रथम श्रेणी आशीष कुमार मंडल की अदालत ने अलवर निवासी बीरेंद्र कुमार शर्मा को सड़क हादसे में बरी किया। घटना 7 मार्च 2022 को हुई थी, जब बीरेंद्र की कार ने बाइक सवार योगेश शर्मा को टक्कर मारी थी। पुलिस ने आरोपी के खिलाफ केस दर्ज किया था, पर उसे घटनास्थल से गिरफ्तार नहीं किया। पुलिस ने पहचान के लिए टेस्ट आइडेंटिफिकेशन परेड (टीआईपी) भी नहीं कराई थी। शिकायतकर्ता ने अदालत में पहली बार आरोपी की पहचान की, जिसे दोषसिद्धि के लिए पर्याप्त नहीं माना गया। अदालत ने कहा कि जब आरोपी शिकायतकर्ता को पहले से नहीं जानता, तब टीआईपी महत्वपूर्ण होती है। इसी आधार पर 28 अक्तूबर 2026 को बीरेंद्र को संदेह का लाभ देकर बरी कर दिया गया।
केस 02
शराब बरामदगी में जोगेंद्र उर्फ जॉनी को राहत
न्यायिक मजिस्ट्रेट प्रथम श्रेणी आशीष कुमार मंडल की अदालत ने मोहल्ला धीसा की ढाणी निवासी जोगेंद्र उर्फ जॉनी को शराब बरामदगी के मामले में बरी किया। पुलिस के अनुसार, 17 अप्रैल 2020 को धारूहेड़ा चुंगी के पास सूचना मिली थी कि आरोपी कार में शराब ला रहा है। पुलिस ने कार से 24 बोतल शराब बरामद होने का दावा किया और केस दर्ज किया। बचाव पक्ष ने स्वतंत्र गवाह शामिल नहीं करने और केमिकल जांच रिपोर्ट पेश नहीं होने की दलील दी। अदालत ने कहा कि जब्त बोतलों में शराब की पुष्टि के लिए केमिकल एग्जामिनर की रिपोर्ट जरूरी थी। पुलिस यह रिपोर्ट पेश नहीं कर सकी, जिसे अभियोजन के मामले में गंभीर कमी माना गया। इसी आधार पर जोगेंद्र को बरी कर दिया गया।
केस 3
मारपीट के मामले में तीन आरोपी बरी
न्यायिक मजिस्ट्रेट अनिल की अदालत ने जैनाबाद निवासी संजय, रामकिशन उर्फ धुन्ना और जय सिंह पीटीआई को मारपीट व धमकी के मामले में बरी किया। शिकायतकर्ता राजनेश के अनुसार, 11 सितंबर 2019 की रात मधुमक्खियों के बक्से हटाने को लेकर विवाद हुआ था। इसके बाद आरोपी उनके घर में घुसकर राजनेश और उनके पति सतीश कुमार के साथ मारपीट की। पुलिस ने 11 नवंबर 2019 को मामला दर्ज किया था। अदालत ने पाया कि राजनेश और सतीश की चोटों का मेडिकल रिकॉर्ड पेश नहीं किया गया। सतीश का मेडिकल परीक्षण घटना के करीब एक महीने बाद हुआ था, और जांच अधिकारी ने एमएलआर तैयार नहीं की थी। सावंत सिंह प्रत्यक्षदर्शी नहीं था, और बच्चों के बयान भी दर्ज नहीं हुए थे, जिससे अभियोजन आरोप साबित नहीं कर पाया। इन कमियों के कारण तीनों आरोपियों को बरी कर दिया गया।
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अदालतों ने माना कि अभियोजन पक्ष आरोपियों के खिलाफ अपराध संदेह से परे साबित करने में विफल रहा। सड़क हादसे के एक मामले में अदालत ने कहा कि आरोपी की पहचान के लिए टेस्ट आइडेंटिफिकेशन परेड नहीं कराई गई। केवल अदालत में पहली बार की गई पहचान पर दोषी नहीं ठहराया जा सकता।
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शराब बरामदगी के मामले में पुलिस 24 बोतल जब्त करने का दावा तो कर पाई। लेकिन केमिकल जांच रिपोर्ट से उनमें शराब होने की पुष्टि नहीं हो सकी। मारपीट के एक मामले में दंपती की चोटों का मेडिकल रिकॉर्ड पेश नहीं किया गया। जांच में कई कमियां सामने आईं, जिससे अभियोजन पक्ष कमजोर पड़ा।
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वहीं, नाकाबंदी तोड़ने के मामले में शिकायतकर्ता और जांच अधिकारी एक ही थे। वाहन मालिक ने अभियोजन का समर्थन नहीं किया। आरोपी की मेडिकल जांच भी नहीं कराई गई थी। इन सभी बिंदुओं पर अदालत ने सवाल उठाए, जिससे आरोपियों को संदेह का लाभ मिला।
केस -01सड़क हादसे में आरोपी बरी
न्यायिक मजिस्ट्रेट प्रथम श्रेणी आशीष कुमार मंडल की अदालत ने अलवर निवासी बीरेंद्र कुमार शर्मा को सड़क हादसे में बरी किया। घटना 7 मार्च 2022 को हुई थी, जब बीरेंद्र की कार ने बाइक सवार योगेश शर्मा को टक्कर मारी थी। पुलिस ने आरोपी के खिलाफ केस दर्ज किया था, पर उसे घटनास्थल से गिरफ्तार नहीं किया। पुलिस ने पहचान के लिए टेस्ट आइडेंटिफिकेशन परेड (टीआईपी) भी नहीं कराई थी। शिकायतकर्ता ने अदालत में पहली बार आरोपी की पहचान की, जिसे दोषसिद्धि के लिए पर्याप्त नहीं माना गया। अदालत ने कहा कि जब आरोपी शिकायतकर्ता को पहले से नहीं जानता, तब टीआईपी महत्वपूर्ण होती है। इसी आधार पर 28 अक्तूबर 2026 को बीरेंद्र को संदेह का लाभ देकर बरी कर दिया गया।
केस 02
शराब बरामदगी में जोगेंद्र उर्फ जॉनी को राहत
न्यायिक मजिस्ट्रेट प्रथम श्रेणी आशीष कुमार मंडल की अदालत ने मोहल्ला धीसा की ढाणी निवासी जोगेंद्र उर्फ जॉनी को शराब बरामदगी के मामले में बरी किया। पुलिस के अनुसार, 17 अप्रैल 2020 को धारूहेड़ा चुंगी के पास सूचना मिली थी कि आरोपी कार में शराब ला रहा है। पुलिस ने कार से 24 बोतल शराब बरामद होने का दावा किया और केस दर्ज किया। बचाव पक्ष ने स्वतंत्र गवाह शामिल नहीं करने और केमिकल जांच रिपोर्ट पेश नहीं होने की दलील दी। अदालत ने कहा कि जब्त बोतलों में शराब की पुष्टि के लिए केमिकल एग्जामिनर की रिपोर्ट जरूरी थी। पुलिस यह रिपोर्ट पेश नहीं कर सकी, जिसे अभियोजन के मामले में गंभीर कमी माना गया। इसी आधार पर जोगेंद्र को बरी कर दिया गया।
केस 3
मारपीट के मामले में तीन आरोपी बरी
न्यायिक मजिस्ट्रेट अनिल की अदालत ने जैनाबाद निवासी संजय, रामकिशन उर्फ धुन्ना और जय सिंह पीटीआई को मारपीट व धमकी के मामले में बरी किया। शिकायतकर्ता राजनेश के अनुसार, 11 सितंबर 2019 की रात मधुमक्खियों के बक्से हटाने को लेकर विवाद हुआ था। इसके बाद आरोपी उनके घर में घुसकर राजनेश और उनके पति सतीश कुमार के साथ मारपीट की। पुलिस ने 11 नवंबर 2019 को मामला दर्ज किया था। अदालत ने पाया कि राजनेश और सतीश की चोटों का मेडिकल रिकॉर्ड पेश नहीं किया गया। सतीश का मेडिकल परीक्षण घटना के करीब एक महीने बाद हुआ था, और जांच अधिकारी ने एमएलआर तैयार नहीं की थी। सावंत सिंह प्रत्यक्षदर्शी नहीं था, और बच्चों के बयान भी दर्ज नहीं हुए थे, जिससे अभियोजन आरोप साबित नहीं कर पाया। इन कमियों के कारण तीनों आरोपियों को बरी कर दिया गया।