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यौन उत्पीड़न का आगे आकर करना होगा विरोध : प्रो. रोमिका

Fri, 17 Jan 2025 12:43 AM IST
रोहतक ब्यूरो संवाद न्यूज एजेंसी, रेवाड़ी
संवाद न्यूज एजेंसी, रेवाड़ी Updated Fri, 17 Jan 2025 12:43 AM IST
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workshop on molestation
रेवाड़ी। अीईजीयू में आयोजित कार्यक्रम में मुख्य वक्ता मंजू परमार को पौधा और शाॅल देकर स्वागत कर
आईजीयू में यौन उत्पीड़न, मनोवैज्ञानिक और कानूनी पहलू विषय पर व्याख्यान का हुआ आयोजन
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फोटो: 05
संवाद न्यूज एजेंसी

रेवाड़ी। मीरपुर स्थित इंदिरा गांधी विश्वविद्यालय की महिला प्रकोष्ठ के अन्तर्गत जागरूकता कार्यक्रम यौन उत्पीड़न : मनोवैज्ञानिक और कानूनी पहलू विषय पर विस्तार व्याख्यान का आयोजन किया गया।
समन्वयक महिला प्रकोष्ठ प्रोफेसर रोमिका बत्रा ने स्वागत अभिनंदन करते हुए मुख्य वक्ता मंजू परमार को पौधा और शाॅल देकर स्वागत किया। विषय की प्रस्तावना रखते हुए उन्होंने कहा कि किसी भी व्यक्ति की सहमति के बिना जानबूझकर किया गया कोई भी यौन स्पर्श यौन उत्पीड़न है। कोई भी उत्पीड़न अपने आप समाप्त नहीं होता। हमें स्वयं जिम्मेदारी के साथ आगे आकर विरोध करना होगा। यदि हम किसी ऐसे व्यक्ति को जानते हैं, जिसे परेशान किया जा रहा है तो हमें पीड़ित व्यक्ति से बात करने और तत्काल कार्रवाई के लिए प्रेरित करना चाहिए।
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बताया कि यौन उत्पीड़न की रोकथाम के लिए जरूरी है कि समय-समय पर प्रशिक्षण कार्यक्रमों का आयोजन कराया जाए। इसमें राष्ट्रीय कानून, कार्यस्थल नीतियां बनाना और व्यक्तियों द्वारा उठाए जा सकने वाले कदम जैसे विषयों पर ठोस रूप से चर्चा की जाए। इसी के अंतर्गत आज की इस संगोष्ठी का आयोजन किया जा रहा है।
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मुख्य वक्ता प्रसिद्ध कानून विशेषज्ञ और सामाजिक अधिवक्ता मंजू परमार ने कहा कि महिलाओं के साथ कार्यस्थल पर यौन उत्पीड़न जैसी घटनाएं आज की कड़वी सच्चाई है, लेकिन, किसी भी महिला को ऐसे व्यवहार को चुप रहकर सहन नहीं करना चाहिए। ऐसा करने से दोषी बच जाते हैं और वे ऐसी घटनाओं को बढ़ावा देते हैं।
मंजू ने अधिनियम 2013 से परिचित कराते हुए विशाखा बनाम राजस्थान राज्य 1997 मामले में उच्चतम न्यायालय की ओर से दी गई परिभाषा से रूबरू करवाया। किसी भी संस्था अथवा संगठन को महिलाओं से जुड़े यौन उत्पीड़न के मामलों को प्रमुखता से लेना चाहिए।


हमारी संस्कृति में सदैव से स्त्री पूजनीय : कुलपति

कार्यक्रम अध्यक्ष कुलपति प्रोफेसर जेपी यादव ने भारतीय संस्कृति से अवगत कराते हुए कहा कि हमारी संस्कृति में सदैव से स्त्री पूजनीय रही है। हमें भी इसी परंपरा को निभाते हुए नारी का सम्मान करना चाहिए। समाज में कुछ कुत्सित प्रवृत्ति वाले पुरुष नारी के शोषण की कुचेष्टा करते हैं। यह अपराध क्षमा योग्य नहीं है। हमें ऐसे लोगों की पहचान करके पीड़ित महिला की मदद करनी चाहिए। ताकि, दोषी को सजा मिल सके और समाज में साफ-सुथरा वातावरण बन सके। महिलाओं के प्रति बढ़ते अपराध पुरुषों की कुटिल मानसिकता को दर्शाते हैं। हमें ऐसे लोगों के विरुद्ध उचित कार्रवाई करनी चाहिए, जो महिलाओं का तरह-तरह से शारीरिक और मानसिक शोषण करते हैं।
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