{"_id":"664a508842512207c00dc6c4","slug":"water-released-in-the-canal-will-now-be-available-regularly-rewari-news-c-198-1-rew1001-204625-2024-05-20","type":"story","status":"publish","title_hn":"Rewari News: नहर में छोड़ा गया पानी, अब नियमित मिलेगा","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
Rewari News: नहर में छोड़ा गया पानी, अब नियमित मिलेगा
Mon, 20 May 2024 12:48 AM IST
रोहतक ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, रेवाड़ी
संवाद न्यूज एजेंसी, रेवाड़ी
Updated Mon, 20 May 2024 12:48 AM IST
विज्ञापन
रेवाड़ी। शहर स्थित नहर में आया पानी। संवाद
संवाद न्यूज एजेंसी
रेवाड़ी। पानी की किल्लत से जूझ रहे शहरवासियों के लिए राहतभरी खबर है। 26 दिन बाद लिसाना व कालाका के जलघरों में पानी पहुंच गया है।
जनस्वास्थ्य विभाग की तरफ से वाटर टैंकों को बड़ी मोटरें लगाकर भरने का काम शुरू कर दिया गया है। वाटर टैंकों को भरने में 8 से 10 दिन का समय लगता है। इस बार नहर में पूरा पानी छोड़ा गया है। ऐसे में उम्मीद है कि उनको पर्याप्त मात्रा में पानी मिलेगा। जनस्वास्थ्य विभाग के मुताबिक लिसाना में 3 और कालाका गांव में 5 वाटर टैंक बने हुए हैं। वाटर टैंकों में पानी का गेज बढ़ते ही सप्लाई को नियमित करने की कोशिश रहेगी। सोमवार से सप्लाई नियमित की जा सकती है। कालाका से 70 फीसदी शहर को पानी की सप्लाई होती है। यहां पर पानी का स्टोरेज करने के लिए 5 वाटर टैंक बनाए हुए हैं। इन वाटर टैंकों में पानी स्टोरेज कर शहर की विभिन्न कॉलोनियों में बने बूस्टिंग स्टेशन के माध्यम से घरों तक सप्लाई दी जाती है। लेकिन यहां पर अब जितने टैंक हैं, उनमें 15 से 20 दिन का ही पानी भंडारण किया जा सकता है।
वर्तमान में नहर के बंद होने का समय ज्यादा है, इसलिए नियमित पेयजल सप्लाई देना बड़ी समस्या है। लंबे समय से एक अतिरिक्त वाटर टैंक निर्माण के लिए शहर के नजदीक लगते गांवों में जमीन ढूंढी जा रही है। अतिरिक्त वाटर टैंक नहीं बनने तक 70 फीसदी शहर को अक्सर पेयजल किल्लत का सामना करना पड़ेगा। जनस्वास्थ्य विभाग के जेई हेमंत कुमार ने बताया कि 26 दिन बाद लिसाना व कालाका के जलघरों में पानी पहुंच गया है। जवाटर टैंकों को बड़ी मोटरें लगाकर भरने का काम शुरू कर दिया गया है। इस बार नहर में पूरा पानी छोड़ा गया है।
विज्ञापन
रेवाड़ी। पानी की किल्लत से जूझ रहे शहरवासियों के लिए राहतभरी खबर है। 26 दिन बाद लिसाना व कालाका के जलघरों में पानी पहुंच गया है।
जनस्वास्थ्य विभाग की तरफ से वाटर टैंकों को बड़ी मोटरें लगाकर भरने का काम शुरू कर दिया गया है। वाटर टैंकों को भरने में 8 से 10 दिन का समय लगता है। इस बार नहर में पूरा पानी छोड़ा गया है। ऐसे में उम्मीद है कि उनको पर्याप्त मात्रा में पानी मिलेगा। जनस्वास्थ्य विभाग के मुताबिक लिसाना में 3 और कालाका गांव में 5 वाटर टैंक बने हुए हैं। वाटर टैंकों में पानी का गेज बढ़ते ही सप्लाई को नियमित करने की कोशिश रहेगी। सोमवार से सप्लाई नियमित की जा सकती है। कालाका से 70 फीसदी शहर को पानी की सप्लाई होती है। यहां पर पानी का स्टोरेज करने के लिए 5 वाटर टैंक बनाए हुए हैं। इन वाटर टैंकों में पानी स्टोरेज कर शहर की विभिन्न कॉलोनियों में बने बूस्टिंग स्टेशन के माध्यम से घरों तक सप्लाई दी जाती है। लेकिन यहां पर अब जितने टैंक हैं, उनमें 15 से 20 दिन का ही पानी भंडारण किया जा सकता है।
वर्तमान में नहर के बंद होने का समय ज्यादा है, इसलिए नियमित पेयजल सप्लाई देना बड़ी समस्या है। लंबे समय से एक अतिरिक्त वाटर टैंक निर्माण के लिए शहर के नजदीक लगते गांवों में जमीन ढूंढी जा रही है। अतिरिक्त वाटर टैंक नहीं बनने तक 70 फीसदी शहर को अक्सर पेयजल किल्लत का सामना करना पड़ेगा। जनस्वास्थ्य विभाग के जेई हेमंत कुमार ने बताया कि 26 दिन बाद लिसाना व कालाका के जलघरों में पानी पहुंच गया है। जवाटर टैंकों को बड़ी मोटरें लगाकर भरने का काम शुरू कर दिया गया है। इस बार नहर में पूरा पानी छोड़ा गया है।
विज्ञापन