फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
डाउनलोड करें

सब्सक्राइब करें
Hindi News ›   Haryana ›   Rewari News ›   village story

400 साल पूर्व मथुरा से आए ग्वाले गोबिंददास ने बसाया था नांगल शहबाजपुर गांव

Fri, 26 Feb 2021 12:37 AM IST
Rohtak Bureau रोहतक ब्यूरो
Updated Fri, 26 Feb 2021 12:37 AM IST
विज्ञापन
village story
बावल। गांव नांगल शहबाजपुर स्थित गोबिंद दास मंदिर। - फोटो : Rewari
रेवाड़ी। करीब 400 साल पूर्व चार भाईयों सहित 15 लोगों व गायों को चराते हुए बावल क्षेत्र पहुंचे गोबिंद दास कुछ दिन के लिए रुक गए तो शहबाज ठाकुर ने इन लोगों को रहने व खेती के लिए जमीन दी। शहबाज ठाकुर के नाम पर ही गोबिंद दास ने गांव का नाम गांव नांगल शहबाजपुर रख दिया। 15 लोगों के बसाये हुए गांव की आबादी ढाई हजार के पार पहुंच चुकी है। बुजुर्गों के अनुसार मथुरा से 400 साल पहले यहां गोबिंद दास नाम का युवक अपने चार भाइयों सहित 15 लोगों के साथ गाय चराते हुए पहुंचा था। 100 से अधिक उम्र में गोबिंद दास ने समाधि ली थी। ग्रामीणों की माने तो तभी से समाधि स्थल पर बने मंदिर में हरियाणा ही नहीं अन्य प्रदेशों से भी लोग मत्था टेकने यहां आते हैं। होली के अगले दिन रंगो के त्योहार पर हजारों लोग मेले में पहुंचते हैं। गोबिंद दास के चलते ही गांव को नांगल बाबाजी के नाम से भी जाना जाता है, लेकिन पंचायती दस्तावेजों में नाम नांगल शहबाजपुर है।
विज्ञापन

गोबिंद दास के मंदिर से गांव की पहचान
गांव बसाने वाले गोबिंद दास के मंदिर के नाम से ही गांव की पहचान है। 2500 की आबादी वाले गांव में करीब 400 मतदाता हैं, इनमें 800 पुरुष व 600 महिलाएं हैं। गांव में 12वीं तक सरकारी स्कूल, गुरुग्राम ग्रामीण बैंक, दो आंगनबाड़ी, आंबेडकर पार्क व एक प्राचीन तालाब भी है। गांव में घूमने के लिए पार्क भी बनाया गया है।
विज्ञापन

बॉर्डर पर होने के चलते परिवहन बड़ी समस्या
ग्रामीणों का कहना है कि गांव में सार्वजनिक वाहन रुकने के लिए बस क्यू शेल्टर बनाया गया है, लेकिन इस पर बसें रुकती ही नहीं हैं। हरियाणा-राजस्थान सीमा पर सटा होने के कारण इस रूट पर रोडवेज बसों की संख्या बहुत कम है। ऐसे में ग्रामीणों को निजी वाहनों या फिर ऑटो आदि का सहारा लेना पड़ता है। गांव के नजदीकी कस्बा बावल ही है।
विज्ञापन
विज्ञापन

गांव के विकास कार्यों के लिए जरूरत के मुताबिक ग्रांट नहीं मिल पाई। बावजूद इसके गांव में आंबेडकर पार्क, बस क्यू शेल्टर, सड़क आदि बनवाई गई हैं। आपसी भाईचारे के चलते गांव में सभी एक दूसरे का सहयोग करते हैं।
बालमुकुंद, निवर्तमान सरपंच
गोबिंद दास के मेले पर बड़ी मात्रा में दही का वितरण किया जाता है। इसके लिए एक माह पहले ही तैयारी शुरू हो जाती है। करीब 400 साल पूर्व मथुरा से आए गोबिंद दास ने गांव को बसाया था। गांव में सभी भाईचारे के साथ रहते हैं।
-रामकिशन, ग्रामीण
गांव में शुरूआती समय से ही शिक्षा का स्तर बेहतर है। गांव के अनेक लोग उच्च पदों पर सेवाएं दे रहे हैं। गांव बसाने के लिए शहबाज ठाकुर ने जमीन दी थी। सरकार को स्वास्थ्य व परिवहन सेवाओं की बेहतर व्यवस्था करनी चाहिए।
रणजीत सिंह, ग्रामीण
गांव में हिंदू- मुस्लिम समाज के लोग भाईचारे के साथ रहते हैं। गांव में गोबिंद दास मंदिर में दूर-दूर से लोग मन्नत मांगने आते हैं। गांव में बस क्यू शेल्टर तो बना दिया गया, लेकिन इस पर बसें कभी-कभार ही रुकती हैं।
-सुरेश सैनी, ग्रामीण
गांव हरियाणा-राजस्थान सीमा पर बसा हुआ है। अनेक समुदाय के लोग भाईचारे के साथ रहते हैं। सीमा पर बसा होने के कारण सुविधाओं की ओर सरकार का कम ध्यान रहता है। ऐसे में सरकार को गांव में विकास कार्यों के लिए ग्रांट ज्यादा देनी चाहिए।

-प्रवीण कुमार, ग्रामीण
गांव की खास पहचान यहां का भाईचारा है। शिक्षा को लेकर ग्रामीण पहले से ही जागरूक रहे हैं। बाबा गोबिंद दास ने करीब 400 साल पहले गांव को बसाया था। आज भी बाबा में सभी की आस्था है, प्रत्येक साल मेले में भी हजारों लोग पहुंचते हैं।
-बलबीर, ग्रामीण
विज्ञापन
विज्ञापन

रहें हर खबर से अपडेट, डाउनलोड करें Android Hindi News App, iOS Hindi News App और Amarujala Hindi News APP अपने मोबाइल पे|
Get all India News in Hindi related to live update of politics, sports, entertainment, technology and education etc. Stay updated with us for all breaking news from India News and more news in Hindi.

विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन

एड फ्री अनुभव के लिए अमर उजाला प्रीमियम सब्सक्राइब करें

Next Article

AU ऐप में पढ़ें

Followed