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Rewari News: रेवाड़ी के नागरिक अस्पताल में होगा आनुवांशिक रोग हीमोफीलिया का इलाज, जानिए
Sat, 08 Apr 2023 11:49 PM IST
रोहतक ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, रेवाड़ी
संवाद न्यूज एजेंसी, रेवाड़ी
Updated Sat, 08 Apr 2023 11:49 PM IST
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संवाद न्यूज एजेंसी
रेवाड़ी। विश्व हीमोफीलिया दिवस 17 अप्रैल को है। यह एक अनुवांशिक बीमारी है, जिसमें शरीर के किसी हिस्से से रक्त बहने पर भी थक्का नहीं जम पाता। स्वास्थ्य विशेषज्ञों के अनुसार इस बीमारी का कारण एक रक्त प्रोटीन की कमी होती है जिसे क्लॉटिंग फैक्टर भी कहते हैं। इस फैक्टर की वजह से ही जब खून बहता है तो थोड़ी देर में वह उसका थक्का जमाकर बहने से रोक देता है। इस रोग में अगर समय पर उपचार नहीं मिले तो रक्त ज्यादा बहने पर मरीज की मौत भी हो सकती है।
अब से पहले जिले के नागरिक अस्पताल में भी इस बीमारी का इलाज नहीं था, पीड़ितों को गुरुग्राम या दिल्ली में ही उपचार के लिए जाना पड़ता था। जिसका खर्चा करीब 20 हजार रुपये तक आता है लेकिन अब नागरिक अस्पताल में ही इसका इलाज उपलब्ध है। अस्पताल में फैक्टर-8 के 12 और फैक्टर-9 के 3 पीड़ितों का इलाज चल रहा है।
लक्षण दिखने पर जांच जरूर कराएं
नागरिक अस्पताल के फिजिशियन डॉ. गौरव यादव के अनुसार जिन लोगों में इस रोग के लक्षण मिलें तो उनको एक बार डॉक्टर से सलाह जरूर करनी चाहिए। जांच भी कराएं, ताकि इस रोग का पता लग सके कि इसका लेवल कितना बढ़ा हुआ है। नागरिक अस्पताल में इसका टेस्ट भी हो रहा है। साथ ही इसके टीके भी उपलब्ध हैं। इसके अलावा खाने में विटामिन और मिनरल्स से भरपूर चीजें शामिल करनी चाहिए।
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यह हैं लक्षण
सामान्य या गंभीर चोट लग जाने के बाद खून लगातार बहता रहता है, शरीर के अलग-अलग जोड़ों में दर्द, शरीर के किसी भी हिस्से में अचानक सूजन आ जाना, पेशाब में रक्त दिखना, नाक से खून आना व कमजोरी या थकान महसूस करने जैसे इसके सामान्य लक्षण हैं।
यह हैं प्रमुख कारण
सामान्य अवस्था में खून में मौजूद एक खास तरह का प्रोटीन कटने या चोट लगने पर तुरंत सक्रिय हो जाता है। इसकी वजह से ऐसी दुर्घटना के बाद खून में थक्के जमने की प्रक्रिया शुरू हो जाती है और रक्त का प्रवाह थोड़ी ही देर में रूक जाता है। जब किसी आनुवांशिक कारण से व्यक्ति के शरीर में इस तत्व की कमी हो जाती है तो उसी अवस्था को हीमोफीलिया कहा जाता है और ऐसे में खून का बहाव रोकना बहुत मुश्किल हो जाता है।
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रेवाड़ी। विश्व हीमोफीलिया दिवस 17 अप्रैल को है। यह एक अनुवांशिक बीमारी है, जिसमें शरीर के किसी हिस्से से रक्त बहने पर भी थक्का नहीं जम पाता। स्वास्थ्य विशेषज्ञों के अनुसार इस बीमारी का कारण एक रक्त प्रोटीन की कमी होती है जिसे क्लॉटिंग फैक्टर भी कहते हैं। इस फैक्टर की वजह से ही जब खून बहता है तो थोड़ी देर में वह उसका थक्का जमाकर बहने से रोक देता है। इस रोग में अगर समय पर उपचार नहीं मिले तो रक्त ज्यादा बहने पर मरीज की मौत भी हो सकती है।
अब से पहले जिले के नागरिक अस्पताल में भी इस बीमारी का इलाज नहीं था, पीड़ितों को गुरुग्राम या दिल्ली में ही उपचार के लिए जाना पड़ता था। जिसका खर्चा करीब 20 हजार रुपये तक आता है लेकिन अब नागरिक अस्पताल में ही इसका इलाज उपलब्ध है। अस्पताल में फैक्टर-8 के 12 और फैक्टर-9 के 3 पीड़ितों का इलाज चल रहा है।
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लक्षण दिखने पर जांच जरूर कराएं
नागरिक अस्पताल के फिजिशियन डॉ. गौरव यादव के अनुसार जिन लोगों में इस रोग के लक्षण मिलें तो उनको एक बार डॉक्टर से सलाह जरूर करनी चाहिए। जांच भी कराएं, ताकि इस रोग का पता लग सके कि इसका लेवल कितना बढ़ा हुआ है। नागरिक अस्पताल में इसका टेस्ट भी हो रहा है। साथ ही इसके टीके भी उपलब्ध हैं। इसके अलावा खाने में विटामिन और मिनरल्स से भरपूर चीजें शामिल करनी चाहिए।
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यह हैं लक्षण
सामान्य या गंभीर चोट लग जाने के बाद खून लगातार बहता रहता है, शरीर के अलग-अलग जोड़ों में दर्द, शरीर के किसी भी हिस्से में अचानक सूजन आ जाना, पेशाब में रक्त दिखना, नाक से खून आना व कमजोरी या थकान महसूस करने जैसे इसके सामान्य लक्षण हैं।
यह हैं प्रमुख कारण
सामान्य अवस्था में खून में मौजूद एक खास तरह का प्रोटीन कटने या चोट लगने पर तुरंत सक्रिय हो जाता है। इसकी वजह से ऐसी दुर्घटना के बाद खून में थक्के जमने की प्रक्रिया शुरू हो जाती है और रक्त का प्रवाह थोड़ी ही देर में रूक जाता है। जब किसी आनुवांशिक कारण से व्यक्ति के शरीर में इस तत्व की कमी हो जाती है तो उसी अवस्था को हीमोफीलिया कहा जाता है और ऐसे में खून का बहाव रोकना बहुत मुश्किल हो जाता है।