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Rewari News: आज से नहाय-खाय के साथ छठ का चार दिवसीय अनुष्ठान शुरू

Sat, 25 Oct 2025 12:16 AM IST
Rohtak Bureau रोहतक ब्यूरो
Updated Sat, 25 Oct 2025 12:16 AM IST
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The four-day Chhath ritual begins today with Nahay-Khaay.
फोटो : 7सेक्टर 1 में छठ पर्व को लेकर सजाया गया द्वार। संवाद
रेवाड़ी। दीपावली के बाद श्रद्धालु अब लोक आस्था का महापर्व छठ की तैयारी में जुट गए हैं। 25 अक्तूबर से नहाय-खाय के साथ छठ का चार दिवसीय अनुष्ठान शुरू हो जाएगा।
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पर्व के दूसरे दिन 26 अक्तूबर को खरना पर महिलाएं पूरे दिन व्रत रखेंगी। शाम को चौके में नया चूल्हा स्थापित करेंगी। गन्ने के रस या गुड़ में बने हुए चावल की खीर को प्रसाद के रूप में खाएंगी। 27 अक्तूबर को व्रती महिलाएं अस्त होते सूर्य को अर्घ्य देंगी।
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28 अक्तूबर को उगते सूर्य को अर्घ्य देने के बाद महिलाएं उपवास तोड़कर पारण करेंगी। पूर्वांचल सेवा समिति के सचिव अश्विनी कुमार, सदस्य हरीश चंद, भोला चौधरी और अरुण कुमार ने बताया कि छठ पर्व पर महिलाएं 36 घंटे का कठोर निर्जला व्रत रखती हैं जो खरना के बाद शुरू होता है।
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सूर्य देव को अर्घ्य दिया जाता है। इसे सूर्य देव एवं छठी मैया की कृपा प्राप्त करने के लिए किया जाता है। इस व्रत को सबसे कठिन व्रत माना जाता है क्योंकि इसमें व्रती की इच्छाशक्ति और शुद्धता का कड़ा इम्तिहान होता है। इस दौरान व्रती को चार दिनों तक शुद्ध और सात्विक जीवन जीना पड़ता है जिसमें प्राकृतिक चीजों का उपयोग और बिना सिलाई के कपड़े पहनना शामिल है।
व्रती अपनी मनोकामनाओं, सुख, समृद्धि और संतान की प्राप्ति के लिए यह व्रत करती हैं। यह निर्जला व्रत खरना के दिन प्रसाद ग्रहण करने के बाद शुरू होता है और अगले दिन सुबह उगते सूर्य को अर्घ्य देने के साथ समाप्त होता है।



बिहार, झारखंड और पूर्वी उत्तर प्रदेश का है प्रमुख पर्व

छठ पूजा बिहार, झारखंड और पूर्वी उत्तर प्रदेश का प्रमुख पर्व है लेकिन अब यह पूरे देश में श्रद्धा और आस्था के साथ मनाया जाने लगा है। रेवाड़ी, बावल, धारूहेड़ा में भी हजारों की संख्या में पूर्वांचल से जुड़े परिवार निवास करते हैं जिनके सहयोग और सहभागिता से यह पर्व हर साल धूमधाम से मनाया जाता है। महिलाओं से लेकर पुरुष और बच्चे सभी मिलकर व्रत, गीत और पूजा-पाठ के माध्यम से सूर्य देव और छठी माई की आराधना करते हैं।
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