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Rewari News: छह माह में महज 200 ही बेसहारा पशु पकड़ पाई नगर परिषद

Wed, 15 Nov 2023 12:14 AM IST
रोहतक ब्यूरो संवाद न्यूज एजेंसी, रेवाड़ी
संवाद न्यूज एजेंसी, रेवाड़ी Updated Wed, 15 Nov 2023 12:14 AM IST
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The city council was able to catch only 200 destitute animals in six months.
रेवाड़ी। शहर में घूम रहे बेसहारा पशुओं को पकड़ने के लिए सरकारी खजाना खाली हो रहा है। इसके बावजूद सड़कों पर पशुओं का आना-जाना नहीं थम रहा है। उपलब्धि के नाम पर नगर परिषद की ओर से सिर्फ खानापूर्ति ही हो रही है। पशुओं को पकड़ने के लिए टेंडर दिए करीब छह माह बीत चुके हैं, परंतु अभी तक महज 200 के लगभग ही बेसहारा पशुओं को पकड़कर गोशाला में छोड़ा गया है। इतने धीमे-धीमे चल रहे काम से शहर में जगह-जगह पशुओं का जमावड़ा पहले से अधिक बढ़ गया है। बेसहारा पशु जानमाल को नुकसान पहुंचाने के साथ हिंसक भी हो रहे हैं।
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वर्ष 2016 से किया था कैटल फ्री घोषित
कागजों में रेवाड़ी जिले को वर्ष 2016 से कैटल फ्री घोषित किया जा चुका है, लेकिन हकीकत में स्थिति इसके बिल्कुल उलट है। पशु पकड़ने का टेंडर छोड़े जाने के बाद भी पशुओं को पकड़ने की कार्रवाई गति नहीं पकड़ पाई है। प्रशासन की लापरवाही का आलम यह है कि कैटल फ्री शहर का दावा मजाक बनकर रह गया है। बार-बार टेंडर छोड़ने पर लाखों रुपये का खर्च आता है। शहर के पुरानी सब्जी मंडी, नाईवाली चौक, नारनौल रोड का पुल, भाड़ावास रोड, बस अड्डा के सामने, कोनसीवास रोड आदि 24 घंटे भारी और छोटे वाहनों के साथ आमजनों का आवागमन रहता है। यहां बेसहारा पशुओं का जमावड़ा होने से हमेशा जानमाल का खतरा बना रहता है। सड़कों पर झुंड के रूप में बैठे हुए पशु हादसों का कारण बन रहे हैं। तेज गति से आने वाले वाहन चालक अंधेरे में इन पशुओं से टकराकर स्वयं और पशुओं को भी चोटिल कर रहे हैं।
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जून में छोड़ा था टेंडर

जून माह में नगर परिषद की ओर से एक संस्था को बेसहारा पशुओं को पकड़ने का ठेका दिया गया था। संस्था बेसहारा पशुओं को पकड़कर धारूहेड़ा स्थित गोशाला में भिजवाती है, लेकिन अब यह कार्रवाई लगभग ठप है। जिस संस्था ने बेसहारा पशु पकड़ने का टेंडर लिया है, उसे नगर परिषद की ओर से प्रत्येक पशु पकड़ने के लिए 1290 रुपये दिए जाते हैं।
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पशुपालकों की लापरवाही बढ़ा रही परेशानी
शहर के कई मोहल्लों में कई ऐसे पशुपालक हैं, जो अपने दुधारू गायों का दूध निकालकर उन्हें खुला छोड़ देते हैं। ऐसे में पहले से ही घूम रहे बेसहारा पशुओं के साथ इनसे संख्या बढ़ने से परेशानी बढ़ रही है। इस बार नगर परिषद की ओर से अपने पशुओं का दूध निकालकर सड़क पर छोड़ने वालों पर कार्रवाई करने का निर्णय लिया था, लेकिन उनपर भी कोई भी कार्रवाई नहीं की गई।
एक फोटोग्राफर की जा चुकी जान

बेसहारा पशु के हमले की वजह से करीब तीन साल पहले एक फोटोग्राफर की मौत हो चुकी है। इसके बाद शहर के लोगों ने कई दिन तक धरना-प्रदर्शन भी किया था, लेकिन नगर परिषद अधिकारियों के कानों पर जूं तक नहीं रेंग रही है। इसके अलावा हर माह पांच से सात लोग बेसहारा पशुओं की आपसी लड़ाई में या फिर अचानक रोड पर निकलने के कारण घायल हो रहे हैं।


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वर्जन:
टेंडर छोड़ा जा चुका है। कार्रवाई भी हुई है। ठेकेदार को जल्द से जल्द बेसहारा पशुओं को पकड़ने के निर्देश दिए गए हैं। शीघ्र ही सड़कों पर घूमने वाले सभी बेसहारा पशु गोशाला में पहुंचाए जाएंगे।
- संदीप कुमार, मुख्य सफाई निरीक्षक, नगर परिषद रेवाड़ी
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