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Rewari News: सरकार द्वारा बिजली दरों में की गई वृद्धि की कड़े शब्दों में निंदा
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संवाद न्यूज एजेंसी
रेवाड़ी। बिजली दरों में की गई बेतहाशा वृद्धि की एसयूसीआई कम्युनिस्ट ने कड़े शब्दों में निंदा करते हुए इसे घोर जनविरोधी करार दिया है।
एसयूसीआई कम्युनिस्ट के राज्य सचिव कॉमरेड राजेंद्र सिंह एडवोकेट ने कहा कि पहले से ही मंहगाई की मार से पीड़ित प्रदेश की जनता के लिए यह वृद्धि असहनीय है। बिजली जन जीवन की एक मौलिक जरूरत है, परंतु सरकार ने इसे प्राइवेट कंपनियों के लिए मुनाफा बटोरने का साधन बना दिया है। बिजली का पूर्ण रूप से निजीकरण किया जा रहा है। प्रीपेड मीटर लगाकर उपभोक्ताओं को ठगने की एक गंभीर साजिश है। कॉमरेड राजेंद्र सिंह ने बताया कि निजीकरण के चलते बिजली इतनी महंगी हो जाएगी कि जन साधारण उपभोक्ता महंगी बिजली कंपनियों से खरीद ही नहीं पाएंगे। हर रोज यह साबित हो रहा है कि प्रदेश सरकार का आम जनता से कोई लेना देना नहीं है, उसे केवल प्राइवेट कंपनियों के लिए मुनाफे की ही चिंता है।
एसयूसीआई कम्युनिस्ट ने मांग की है कि रात को 12 बजे बिजली की दरों में की गई वृद्धि सोए हुए उपभोक्ताओं की जेब पर डाका डालने के समान है। इस वृद्धि को तुरंत वापिस लिया जाए अन्यथा एसयूसीआई कम्युनिस्ट इस वृद्धि के विरोध में और बिजली निजीकरण के खिलाफ सड़कों पर उतरने के लिए बाध्य होंगी।
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रेवाड़ी। बिजली दरों में की गई बेतहाशा वृद्धि की एसयूसीआई कम्युनिस्ट ने कड़े शब्दों में निंदा करते हुए इसे घोर जनविरोधी करार दिया है।
एसयूसीआई कम्युनिस्ट के राज्य सचिव कॉमरेड राजेंद्र सिंह एडवोकेट ने कहा कि पहले से ही मंहगाई की मार से पीड़ित प्रदेश की जनता के लिए यह वृद्धि असहनीय है। बिजली जन जीवन की एक मौलिक जरूरत है, परंतु सरकार ने इसे प्राइवेट कंपनियों के लिए मुनाफा बटोरने का साधन बना दिया है। बिजली का पूर्ण रूप से निजीकरण किया जा रहा है। प्रीपेड मीटर लगाकर उपभोक्ताओं को ठगने की एक गंभीर साजिश है। कॉमरेड राजेंद्र सिंह ने बताया कि निजीकरण के चलते बिजली इतनी महंगी हो जाएगी कि जन साधारण उपभोक्ता महंगी बिजली कंपनियों से खरीद ही नहीं पाएंगे। हर रोज यह साबित हो रहा है कि प्रदेश सरकार का आम जनता से कोई लेना देना नहीं है, उसे केवल प्राइवेट कंपनियों के लिए मुनाफे की ही चिंता है।
एसयूसीआई कम्युनिस्ट ने मांग की है कि रात को 12 बजे बिजली की दरों में की गई वृद्धि सोए हुए उपभोक्ताओं की जेब पर डाका डालने के समान है। इस वृद्धि को तुरंत वापिस लिया जाए अन्यथा एसयूसीआई कम्युनिस्ट इस वृद्धि के विरोध में और बिजली निजीकरण के खिलाफ सड़कों पर उतरने के लिए बाध्य होंगी।
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