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Rewari News: रामलीला में श्रीराम व सीताजी के जन्म का मंचन
Sat, 05 Oct 2024 01:41 AM IST
रोहतक ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, रेवाड़ी
संवाद न्यूज एजेंसी, रेवाड़ी
Updated Sat, 05 Oct 2024 01:41 AM IST
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फोटो: 8रेवाड़ी। श्रीघंटेश्वर महादेव मंदिर आदर्श रामलीला में दशरथ के साथ खड़े श्रीराम, लक्ष्मण
संवाद न्यूज एजेंसी
रेवाड़ी। शहर के मोती चौक स्थित श्रीघंटेश्वर मंदिर के परिसर में आदर्शन रामलीला के मंच पर वीरवार की रात श्रीराम व सीता मां के जन्म के प्रसंग का मंचन किया गया। दशरथ पुत्र जन्म सुनि काना, मानहु ब्रह्मानंद समाना... पुत्र के जन्म की बात सुनकर दशरथ पुलकित हो उठते हैं। मानों वह ब्रह्मानंद में समा गए हों।
रामलीला का शुभारंभ गौरव शर्मा ने किया। रामलीला के पदाधिकारियों महेश पटवारी, श्यामसुंदर गुप्ता, राजेश पंवार, रमेश वशिष्ठ आदि ने उनका स्वागत किया। गौरव शर्मा ने कहा कि प्रभु श्रीराम के जीवन से हमें शिक्षा लेनी चाहिए और उनके आदर्शों को अपना कर जीवन यापन करना चाहिए। मर्यादा पुरुषोत्तम श्रीराम जी एक आदर्श पुत्र, पति, राजा व पिता थे।
रामलीला के सचिव याद के सुगन्ध ने बताया कि श्रीराम, लक्ष्मण, भरत व शत्रुघ्न और माता सीता के जन्म का मंचन किया गया। गुरु विश्वामित्र ने चारों भाइयों का नामकरण किया। वहीं रावण कैलाश पर्वत को उठा कर लंका ले जाने की कोशिश करता है। रावण पर्वत उठाने में असफल होता है। इसके बाद वह शिव तांडव स्तोत्र का जाप करता है। वह कैलाश पर्वत उठाने की गलती की क्षमा मांगता है। शिवजी प्रसन्न होकर उसे चंद्रहास नामक तलवार देते हैं।
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रेवाड़ी। शहर के मोती चौक स्थित श्रीघंटेश्वर मंदिर के परिसर में आदर्शन रामलीला के मंच पर वीरवार की रात श्रीराम व सीता मां के जन्म के प्रसंग का मंचन किया गया। दशरथ पुत्र जन्म सुनि काना, मानहु ब्रह्मानंद समाना... पुत्र के जन्म की बात सुनकर दशरथ पुलकित हो उठते हैं। मानों वह ब्रह्मानंद में समा गए हों।
रामलीला का शुभारंभ गौरव शर्मा ने किया। रामलीला के पदाधिकारियों महेश पटवारी, श्यामसुंदर गुप्ता, राजेश पंवार, रमेश वशिष्ठ आदि ने उनका स्वागत किया। गौरव शर्मा ने कहा कि प्रभु श्रीराम के जीवन से हमें शिक्षा लेनी चाहिए और उनके आदर्शों को अपना कर जीवन यापन करना चाहिए। मर्यादा पुरुषोत्तम श्रीराम जी एक आदर्श पुत्र, पति, राजा व पिता थे।
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रामलीला के सचिव याद के सुगन्ध ने बताया कि श्रीराम, लक्ष्मण, भरत व शत्रुघ्न और माता सीता के जन्म का मंचन किया गया। गुरु विश्वामित्र ने चारों भाइयों का नामकरण किया। वहीं रावण कैलाश पर्वत को उठा कर लंका ले जाने की कोशिश करता है। रावण पर्वत उठाने में असफल होता है। इसके बाद वह शिव तांडव स्तोत्र का जाप करता है। वह कैलाश पर्वत उठाने की गलती की क्षमा मांगता है। शिवजी प्रसन्न होकर उसे चंद्रहास नामक तलवार देते हैं।
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