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Rewari: दो साल की कड़ी मेहनत व प्रबल इच्छा शक्ति से कॉमनवेल्थ गेम्स में पहुंची शर्मिला

Fri, 22 Jul 2022 01:23 AM IST
रोहतक ब्यूरो विशाल जैमिनी, संवाद न्यूज एजेंसी, रेवाड़ी (हरियाणा)
विशाल जैमिनी, संवाद न्यूज एजेंसी, रेवाड़ी (हरियाणा) Published by: रोहतक ब्यूरो Updated Fri, 22 Jul 2022 01:23 AM IST
सार

शर्मिला ने शॉटपुट में दो साल में दो गोल्ड मेडल जीते हैं। वह 2018 में प्रदेश की पहली महिला कंडक्टर बनी थी।

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Sharmila reached the Commonwealth Games with 2 years of hard work and strong will power
वर्चुअल मीटिंग में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से बात करती खिलाड़ी शर्मिला। - फोटो : संवाद न्यूज एजेंसी (फाइल फोटो)

विस्तार

इंग्लैंड के बर्मिंघम में 28 जुलाई से शुरू होने वाले कॉमनवेल्थ गेम्स में रेवाड़ी निवासी पैरा खिलाड़ी शर्मिला शॉटपुट एफ-57 कैटेगरी में प्रतिभागिता करेगी। 34 वर्ष की उम्र में खेलना शुरू करने वाली दो बेटियों की मां शर्मिला महज 2 साल में अपनी कड़ी मेहनत और प्रबल इच्छा शक्ति से इस मुकाम तक पहुंची है। बता दें कि शर्मिला का 6 अगस्त को कॉमनवेल्थ गेम्स में मुकाबला होगा।

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बचपन से ही थी खेलों में दिलचस्पी
शर्मिला ने बताया कि वे बचपन से ही खेलों में दिलचस्पी लेती थी मगर पारिवारिक हालातों के चलते यह सपना पूरा नहीं कर पाई। जिंदगी में संघर्ष करते हुए यहां तक पहुंची हूं, अब दोनों बेटियों को भी खेलों में नाम कमाते देखना चाहती हूं।
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एक साल की मेहनत में शर्मिला ने जीता गोल्ड
शर्मिला ने बताया कि उन्होंने 2019 में रेवाड़ी के राव तुलाराम स्टेडियम में पैरा कोच टेकचंद (पैरा ओलंपिक) के मार्गदर्शन में शॉटपुट का अभ्यास शुरू किया। महज एक साल की मेहनत में ही वर्ष 2021 में बैंगलोर में 7.40 मीटर शॉट पुट के साथ नेशनल गोल्ड मेडल जीता। इसके बाद उन्होंने वर्ष 2022 में ओडिशा में 8.3 मीटर के साथ दूसरा गोल्ड अपने नाम किया।
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शर्मिला कहती है कि प्रशिक्षक टेकचंद की ही कड़ी मेहनत है कि उन्होंने कभी हिम्मत नहीं हारने दी। शर्मिला ने कहा कि वे शत प्रतिशत प्रदर्शन के साथ पदक जीतेंगी। अपनी 14 व 11 वर्षीय दोनों बेटियों को भी अंतरराष्ट्रीय खिलाड़ी बनाना जाती है।

2018 में प्रदेश की पहली महिला कंडक्टर लगी थी
शर्मिला ने बताया कि उनके पिता ने मजदूरी कर परिवार चलाया। गरीबी के चलते 2005 में शादी हो गई जिस समय वह 12वीं पास भी नहीं कर पाई थी। उनका वैवाहिक जीवन ठीक नहीं रहा। परिवार में रार के चलते वे अपनी दो बेटियों के साथ मायका महेंद्रगढ़ के गांव छितरौली में 6 साल तक रही।


परिवार ने उनकी दूसरी शादी 2017 में की तो उनके पति अजीत व ससुराल पक्ष से स्पोर्ट मिली। वर्तमान में रेवाड़ी के सनसिटी सोसायटी में रह रही है। शर्मिला को प्रदेश में रोडवेज में कॉन्ट्रेक्ट पर 2018 में पहली महिला कंडक्टर भर्ती होने का मौका मिला। 17 दिन नौकरी के बाद ही सरकार ने सभी कंडक्टरों को हटा दिया था।

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