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Rewari News: 13 स्कूलों में विद्यार्थियों को दी जाएगी रोबोटिक्स प्रोग्राम की ट्रेनिंग
Sat, 11 Mar 2023 11:34 PM IST
रोहतक ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, रेवाड़ी
संवाद न्यूज एजेंसी, रेवाड़ी
Updated Sat, 11 Mar 2023 11:34 PM IST
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संवाद न्यूज एजेंसी
रेवाड़ी। समग्र शिक्षा अभियान के पायलट प्रोजेक्ट के तहत जिले के 13 स्कूलों में विद्यार्थियों को रोबोटिक प्रोग्राम का प्रशिक्षण दिया जाएगा। हालांकि इनमें से तीन स्कूलों में प्रशिक्षण शुरू हो गया है जबकि 10 स्कूलों में प्रशिक्षण दिया जाना है। इससे विद्यार्थियों को काफी लाभ होगा।
विद्यार्थियों को रोबोटिक प्रोग्राम का प्रशिक्षण विशेषज्ञ देंगे। फिलहाल मॉडल संस्कृति स्कूल बोढि़या कमालपुर, जीजीएसएस स्कूल बावल और मॉडल संस्कृति स्कूल गुड़ियानी में विद्यार्थियों को रोबोटिक प्रोग्राम का प्रशिक्षण दिया जा रहा है। विद्यार्थियों को बताया जा रहा है कि कमांड मिलने के बाद रोबोट किस प्रकार कार्य करते हैं। इसकी क्या प्रक्रिया होती है। एपीसी कृष्ण कुमार ने बताया कि नई शिक्षा नीति के तहत रोबोटिक कोडिंग को भी पाठ्यक्रम मेंं शामिल किया जा रहा है। इसका उद्देश्य विद्यार्थियों को रोजगार के मुताबिक शिक्षा देना है। वहीं, राष्ट्रीय कौशल योग्यता फ्रेमवर्क में दो नए विषय शामिल किए गए हैं जिनमें रोबोटिक व इलेक्ट्रिक शामिल हैं। जल्द ही कुल 13 विषयों में स्कूल समय से ही कौशल की ट्रेनिंग मिलना शुरू हो जाएगी। इससे पहले एनएसक्यूएफ कार्यक्रम में 11 विषय ही शामिल थे।
बता दें रोबोटिक प्रोग्राम ट्रेनिंग इस साल पायलट प्रोजेक्ट के तौर पर है जिसमें जिले के 13 स्कूल शामिल किए गए हैं। छठी से 12वीं कक्षा तक के विद्यार्थियों को रोबोटिक ट्रेनिंग दी जा रही है। हालांकि इस वक्त 10वीं और 12वीं की परीक्षाएं चल रही हैं लेकिन तीन स्कूलों में अन्य बच्चों को ट्रेनिंग दी जा रही है।
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विद्यार्थियों को प्रदान की गई किट
रोबोटिक ट्रेनिंग के लिए विभाग की ओर से विद्यार्थियों को किट प्रदान की गई है। इसमें मिनी रोबोट बनाने का बेसिक सामान हैं। विद्यार्थी उसे असेंबल करके रोबोट बनाना सीख रहे हैं। किट मिलने से विद्यार्थियों को यह फायदा होगा कि वे अभ्यास के द्वारा अपने आप को मजबूत कर सकते हैं जिससे आने वाले समय में काफी लाभ मिलेगा।
प्रशिक्षण के लिए स्कूलों में तैयार की गई है विशेष लैब
राष्ट्रीय कौशल योग्यता फ्रेमवर्क कार्यक्रम के स्कूलों में विशेष लैब तैयार की गई है। इनमें विद्यार्थियों को ब्यूटी एंड वेलनेस, आईटी, ऑटोमोबाइल आदि का प्रशिक्षण दिया जाता है। इसका उद्देश्य यह है कि स्कूली शिक्षा पूरी होने के बाद विद्यार्थी खुद का रोजगार शुरू करके आत्मनिर्भर बन सकें। विशेषज्ञ अभी तीन स्कूलों में प्रशिक्षण दे रहे हैं। उनसे अध्यापक भी सीख रहे हैं। इससे फायदा यह होगा कि प्रशिक्षण लेने के बाद अध्यापक अगले सेक्शन में खुद विद्यार्थियों को सिखाएंगे। यानी कि विद्यार्थियों के साथ अध्यापकों को भी इस ट्रेनिंग प्रोग्राम में फायदा मिल रहा है। इससे बाद में ट्रेनरों की आवश्यकता नहीं पड़ेगी।
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इन 13 स्कूलों में दी जा रहा प्रशिक्षण
1. जीएसएस स्कूल, खोरी
2. मॉडल संस्कृति स्कूल, पीथड़ावास
3. जीएसएस स्कूल, काकोड़िया
4. जीएसएस स्कूल, बूढ़पुर
5. मॉडल संस्कृति स्कूल, बोढि़या कमालपुर
6. जीएसएस स्कूल, रेवाड़ी
7. जीएसएस स्कूल, भाड़ावास
8. जीजीएसएस स्कूल, बावल
9. जीएसएस स्कूल, संगवाड़ी
10. मॉडल संस्कृति स्कूल, गुड़ियानी
11. जीएसएस स्कूल, साहनवास
12. जीजीएसएस स्कूल, रेवाड़ी
13. जीएसएस स्कूल, धारूहेड़ा
वर्जन
एनएसक्यूएफ के तहत विद्यार्थियों को पायलट प्रोजेक्ट के तहत रोबोटिक प्रोग्राम की ट्रेनिंग दी जा रही है। विद्यार्थियों को किट भी दी गई है। ट्रेनिंग का उद्देश्य विद्यार्थियों में स्किल पैदा करके आत्मनिर्भर बनाना है।- कृष्ण कुमार, एपीएस रेवाड़ी।
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रेवाड़ी। समग्र शिक्षा अभियान के पायलट प्रोजेक्ट के तहत जिले के 13 स्कूलों में विद्यार्थियों को रोबोटिक प्रोग्राम का प्रशिक्षण दिया जाएगा। हालांकि इनमें से तीन स्कूलों में प्रशिक्षण शुरू हो गया है जबकि 10 स्कूलों में प्रशिक्षण दिया जाना है। इससे विद्यार्थियों को काफी लाभ होगा।
विद्यार्थियों को रोबोटिक प्रोग्राम का प्रशिक्षण विशेषज्ञ देंगे। फिलहाल मॉडल संस्कृति स्कूल बोढि़या कमालपुर, जीजीएसएस स्कूल बावल और मॉडल संस्कृति स्कूल गुड़ियानी में विद्यार्थियों को रोबोटिक प्रोग्राम का प्रशिक्षण दिया जा रहा है। विद्यार्थियों को बताया जा रहा है कि कमांड मिलने के बाद रोबोट किस प्रकार कार्य करते हैं। इसकी क्या प्रक्रिया होती है। एपीसी कृष्ण कुमार ने बताया कि नई शिक्षा नीति के तहत रोबोटिक कोडिंग को भी पाठ्यक्रम मेंं शामिल किया जा रहा है। इसका उद्देश्य विद्यार्थियों को रोजगार के मुताबिक शिक्षा देना है। वहीं, राष्ट्रीय कौशल योग्यता फ्रेमवर्क में दो नए विषय शामिल किए गए हैं जिनमें रोबोटिक व इलेक्ट्रिक शामिल हैं। जल्द ही कुल 13 विषयों में स्कूल समय से ही कौशल की ट्रेनिंग मिलना शुरू हो जाएगी। इससे पहले एनएसक्यूएफ कार्यक्रम में 11 विषय ही शामिल थे।
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बता दें रोबोटिक प्रोग्राम ट्रेनिंग इस साल पायलट प्रोजेक्ट के तौर पर है जिसमें जिले के 13 स्कूल शामिल किए गए हैं। छठी से 12वीं कक्षा तक के विद्यार्थियों को रोबोटिक ट्रेनिंग दी जा रही है। हालांकि इस वक्त 10वीं और 12वीं की परीक्षाएं चल रही हैं लेकिन तीन स्कूलों में अन्य बच्चों को ट्रेनिंग दी जा रही है।
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विद्यार्थियों को प्रदान की गई किट
रोबोटिक ट्रेनिंग के लिए विभाग की ओर से विद्यार्थियों को किट प्रदान की गई है। इसमें मिनी रोबोट बनाने का बेसिक सामान हैं। विद्यार्थी उसे असेंबल करके रोबोट बनाना सीख रहे हैं। किट मिलने से विद्यार्थियों को यह फायदा होगा कि वे अभ्यास के द्वारा अपने आप को मजबूत कर सकते हैं जिससे आने वाले समय में काफी लाभ मिलेगा।
प्रशिक्षण के लिए स्कूलों में तैयार की गई है विशेष लैब
राष्ट्रीय कौशल योग्यता फ्रेमवर्क कार्यक्रम के स्कूलों में विशेष लैब तैयार की गई है। इनमें विद्यार्थियों को ब्यूटी एंड वेलनेस, आईटी, ऑटोमोबाइल आदि का प्रशिक्षण दिया जाता है। इसका उद्देश्य यह है कि स्कूली शिक्षा पूरी होने के बाद विद्यार्थी खुद का रोजगार शुरू करके आत्मनिर्भर बन सकें। विशेषज्ञ अभी तीन स्कूलों में प्रशिक्षण दे रहे हैं। उनसे अध्यापक भी सीख रहे हैं। इससे फायदा यह होगा कि प्रशिक्षण लेने के बाद अध्यापक अगले सेक्शन में खुद विद्यार्थियों को सिखाएंगे। यानी कि विद्यार्थियों के साथ अध्यापकों को भी इस ट्रेनिंग प्रोग्राम में फायदा मिल रहा है। इससे बाद में ट्रेनरों की आवश्यकता नहीं पड़ेगी।
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इन 13 स्कूलों में दी जा रहा प्रशिक्षण
1. जीएसएस स्कूल, खोरी
2. मॉडल संस्कृति स्कूल, पीथड़ावास
3. जीएसएस स्कूल, काकोड़िया
4. जीएसएस स्कूल, बूढ़पुर
5. मॉडल संस्कृति स्कूल, बोढि़या कमालपुर
6. जीएसएस स्कूल, रेवाड़ी
7. जीएसएस स्कूल, भाड़ावास
8. जीजीएसएस स्कूल, बावल
9. जीएसएस स्कूल, संगवाड़ी
10. मॉडल संस्कृति स्कूल, गुड़ियानी
11. जीएसएस स्कूल, साहनवास
12. जीजीएसएस स्कूल, रेवाड़ी
13. जीएसएस स्कूल, धारूहेड़ा
वर्जन
एनएसक्यूएफ के तहत विद्यार्थियों को पायलट प्रोजेक्ट के तहत रोबोटिक प्रोग्राम की ट्रेनिंग दी जा रही है। विद्यार्थियों को किट भी दी गई है। ट्रेनिंग का उद्देश्य विद्यार्थियों में स्किल पैदा करके आत्मनिर्भर बनाना है।- कृष्ण कुमार, एपीएस रेवाड़ी।