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Rewari News: मानसून में पशुओं में संक्रामक बीमारियों का खतरा बढ़ा, पशुपालक बरतें सावधानी
Thu, 09 Jul 2026 11:47 PM IST
रोहतक ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, रेवाड़ी
संवाद न्यूज एजेंसी, रेवाड़ी
Updated Thu, 09 Jul 2026 11:47 PM IST
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पशुपालक की तरफ से पशुबाड़े में बांधे गई भैंस व कटड़ी। संवाद
रेवाड़ी। जिले में मानसून के आगमन के साथ पशुओं में संक्रामक बीमारियों का खतरा बढ़ गया है। पशु चिकित्सा विशेषज्ञों ने पशुपालकों को सतर्क रहने की सलाह दी है। बरसात के मौसम में पशु बाड़ों में नमी, गंदगी और जलभराव से कई गंभीर बीमारियां तेजी से फैल सकती हैं।
उचित देखभाल और बचाव के उपाय न करने पर पशुओं का स्वास्थ्य प्रभावित हो सकता है। इससे दूध उत्पादन में कमी आएगी और किसानों की आय पर सीधा असर पड़ेगा।
जिले में लगभग 95 फीसदी किसान कृषि के साथ डेयरी व्यवसाय भी करते हैं। यहां करीब 35 हजार गाय और लगभग 1.70 लाख भैंस हैं। पशुपालन विभाग ने पशुपालकों से बारिश के मौसम में अतिरिक्त सावधानी बरतने की अपील की है।
पशु चिकित्सा विशेषज्ञों के अनुसार, इस मौसम में खुरपका-मुंहपका, गलघोटू, लंगड़ा बुखार, थनैला और त्वचा संबंधी संक्रमण जैसी बीमारियों का खतरा अधिक रहता है। लगातार नमी और कीचड़ के कारण पशुओं के खुर और त्वचा में संक्रमण की आशंका बढ़ जाती है।
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समय पर उपचार न मिलने पर पशु कमजोर हो जाते हैं और उनका दूध उत्पादन प्रभावित होने लगता है। यदि किसी पशु में तेज बुखार, मुंह या खुर में छाले, थनों में सूजन, लंगड़ापन, भूख कम लगना या त्वचा पर घाव जैसे लक्षण दिखें तो तुरंत नजदीकी पशु चिकित्सालय से संपर्क करें। समय पर उपचार और टीकाकरण से अधिकांश बीमारियों पर नियंत्रण पाया जा सकता है।
बाड़े की सफाई और खानपान पर दें ध्यान
विशेषज्ञों का कहना है कि बारिश के दौरान पशु बाड़े की नियमित सफाई जरूरी है। बाड़े में पानी जमा नहीं होने दें। पशुओं के बैठने के लिए सूखे बिछावन की व्यवस्था करें। बाड़े में पर्याप्त हवा और रोशनी का प्रबंध आवश्यक है, ताकि नमी कम रहे और संक्रमण फैलने की संभावना घटे। पशुओं के खानपान पर भी विशेष ध्यान देना चाहिए। बारिश के मौसम में हरा चारा खिलाने से पहले उसकी गुणवत्ता अवश्य जांच लें। सड़ा-गला, गीला या फफूंद लगा चारा पशुओं के लिए नुकसानदायक हो सकता है। इससे पाचन संबंधी समस्याएं पैदा हो सकती हैं। पशुओं को संतुलित आहार, मिनरल मिक्सचर और पर्याप्त मात्रा में स्वच्छ पेयजल उपलब्ध कराना चाहिए। इससे उनकी रोग प्रतिरोधक क्षमता मजबूत रहती है और दूध उत्पादन सामान्य बना रहता है।
वर्जन
बारिश के मौसम में त्वचा संबंधी बीमारियों की आशंका बढ़ जाती है। ऐसे में पशुओं की देखभाल जरूरी है। पशुओं को बारिश, धूप और उमस भरी गर्मी से बचाएं। पशुओं को स्वच्छ चारा और उचित मात्रा में हरा चारा दें। किसी पशु में बुखार, भूख कम लगना, दूध उत्पादन में गिरावट या अन्य लक्षण दिखाई दें तो नजदीकी पशु चिकित्सालय या पशु चिकित्सा अधिकारी से संपर्क करें।-डॉ. नसीब सिंह, उप निदेशक, पशुपालन विभाग।
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उचित देखभाल और बचाव के उपाय न करने पर पशुओं का स्वास्थ्य प्रभावित हो सकता है। इससे दूध उत्पादन में कमी आएगी और किसानों की आय पर सीधा असर पड़ेगा।
जिले में लगभग 95 फीसदी किसान कृषि के साथ डेयरी व्यवसाय भी करते हैं। यहां करीब 35 हजार गाय और लगभग 1.70 लाख भैंस हैं। पशुपालन विभाग ने पशुपालकों से बारिश के मौसम में अतिरिक्त सावधानी बरतने की अपील की है।
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पशु चिकित्सा विशेषज्ञों के अनुसार, इस मौसम में खुरपका-मुंहपका, गलघोटू, लंगड़ा बुखार, थनैला और त्वचा संबंधी संक्रमण जैसी बीमारियों का खतरा अधिक रहता है। लगातार नमी और कीचड़ के कारण पशुओं के खुर और त्वचा में संक्रमण की आशंका बढ़ जाती है।
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समय पर उपचार न मिलने पर पशु कमजोर हो जाते हैं और उनका दूध उत्पादन प्रभावित होने लगता है। यदि किसी पशु में तेज बुखार, मुंह या खुर में छाले, थनों में सूजन, लंगड़ापन, भूख कम लगना या त्वचा पर घाव जैसे लक्षण दिखें तो तुरंत नजदीकी पशु चिकित्सालय से संपर्क करें। समय पर उपचार और टीकाकरण से अधिकांश बीमारियों पर नियंत्रण पाया जा सकता है।
बाड़े की सफाई और खानपान पर दें ध्यान
विशेषज्ञों का कहना है कि बारिश के दौरान पशु बाड़े की नियमित सफाई जरूरी है। बाड़े में पानी जमा नहीं होने दें। पशुओं के बैठने के लिए सूखे बिछावन की व्यवस्था करें। बाड़े में पर्याप्त हवा और रोशनी का प्रबंध आवश्यक है, ताकि नमी कम रहे और संक्रमण फैलने की संभावना घटे। पशुओं के खानपान पर भी विशेष ध्यान देना चाहिए। बारिश के मौसम में हरा चारा खिलाने से पहले उसकी गुणवत्ता अवश्य जांच लें। सड़ा-गला, गीला या फफूंद लगा चारा पशुओं के लिए नुकसानदायक हो सकता है। इससे पाचन संबंधी समस्याएं पैदा हो सकती हैं। पशुओं को संतुलित आहार, मिनरल मिक्सचर और पर्याप्त मात्रा में स्वच्छ पेयजल उपलब्ध कराना चाहिए। इससे उनकी रोग प्रतिरोधक क्षमता मजबूत रहती है और दूध उत्पादन सामान्य बना रहता है।
वर्जन
बारिश के मौसम में त्वचा संबंधी बीमारियों की आशंका बढ़ जाती है। ऐसे में पशुओं की देखभाल जरूरी है। पशुओं को बारिश, धूप और उमस भरी गर्मी से बचाएं। पशुओं को स्वच्छ चारा और उचित मात्रा में हरा चारा दें। किसी पशु में बुखार, भूख कम लगना, दूध उत्पादन में गिरावट या अन्य लक्षण दिखाई दें तो नजदीकी पशु चिकित्सालय या पशु चिकित्सा अधिकारी से संपर्क करें।-डॉ. नसीब सिंह, उप निदेशक, पशुपालन विभाग।