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Rewari News: आरबीएसके ने दो बच्चों को दिया नया जीवन, निशुल्क इलाज से बदली जिंदगी
Wed, 30 Sep 2026 11:40 PM IST
रोहतक ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, रेवाड़ी
संवाद न्यूज एजेंसी, रेवाड़ी
Updated Wed, 30 Sep 2026 11:40 PM IST
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लक्ष
रेवाड़ी। समय से स्वास्थ्य जांच में बीमारी की पहचान होने के बाद जिले के दो बच्चों के जीवन में इलाज के बाद सकारात्मक बदलाव आया है। राष्ट्रीय बाल स्वास्थ्य कार्यक्रम (आरबीएसके) की मोबाइल स्वास्थ्य टीम ने नियमित जांच के दौरान गांव पाली निवासी 10 माह के लक्ष और गांव जालियावास निवासी लविश यादव की स्वास्थ्य संबंधी समस्याओं की पहचान की। इसके बाद दोनों का निशुल्क उपचार किया गया।
लक्ष में दोनों पैरों में क्लब फुट की समस्या सामने आई थी। स्वास्थ्य टीम की पहचान के बाद उसका उपचार शुरू हुआ। प्लास्टर और सुधारात्मक शल्य चिकित्सा के बाद उसे सुधारात्मक जूते भी निशुल्क उपलब्ध कराए गए। वर्तमान में लक्ष की नियमित निगरानी की जा रही है। उपचार के बाद वह अब खड़ा होकर चलना सीख रहा है।
इसी तरह लविश की दोनों आंखों में जन्मजात मोतियाबिंद की पहचान हुई। समय पर रेफर किए जाने के बाद उसकी दोनों आंखों का ऑपरेशन निशुल्क कराया गया। उपचार के बाद उसकी दृष्टि में सुधार हुआ है। स्वास्थ्य विभाग की ओर से दोनों बच्चों की नियमित जांच और फॉलोअप जारी है।
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इन दोनों मामलों में सामने आया है कि बच्चों की समय पर स्वास्थ्य जांच से समस्याओं की शुरुआती स्तर पर पहचान कर उपचार शुरू किया जा सकता है। आरबीएसके की टीमों के माध्यम से बच्चों तक स्वास्थ्य सेवाएं पहुंचाने की प्रक्रिया जारी है।
प्लास्टर हुआ, ऑपरेशन भी हुआ, अब मिला लक्ष को लाभ
गांव पाली निवासी 10 माह के लक्ष की जांच 5 नवंबर 2025 को राष्ट्रीय बाल स्वास्थ्य कार्यक्रम की मोबाइल स्वास्थ्य टीम ने की थी। इसमें उसके दोनों पैरों में क्लब फुट की पहचान हुई। 8 नवंबर 2025 को उसे नागरिक अस्पताल रेवाड़ी में लाया गया जहां उपचार शुरू हुआ। लक्ष को एक सप्ताह तक कसरत करवाई गई। साप्ताहिक अंतराल पर चार बार प्लास्टर चढ़ाया गया। 27 दिसंबर 2025 को शल्य चिकित्सा की गई। इसके 21 दिन बाद बच्चे को सुधारात्मक जूते निशुल्क उपलब्ध करवाए गए। वर्तमान में लक्ष की नियमित जांच जारी है तथा समस्या दोबारा न हो, इसके लिए पांच वर्ष की आयु तक उसकी निगरानी की जाएगी। उपचार के बाद अब वह खड़ा होकर चलना सीख रहा है।
मोतियाबिंद की पहचान होने पर हुआ लविश का ऑपरेशन
गांव जालियावास डाकघर सुथाना निवासी लविश यादव की 17 जुलाई को राष्ट्रीय बाल स्वास्थ्य कार्यक्रम की मोबाइल स्वास्थ्य टीम ने जांच की। इस दौरान उसकी दोनों आंखों में जन्मजात मोतियाबिंद की पहचान हुई। उसी दिन बच्चे को जिला शीघ्र हस्तक्षेप केंद्र में दिखाया गया और आगे के उपचार के लिए संदर्भित नेत्र चिकित्सालय भेजा गया। इसके बाद लविश की दायीं आंख की शल्य चिकित्सा 28 जुलाई को की गई। इसके बाद बायीं आंख की शल्य चिकित्सा 18 अगस्त को हुई। दोनों आंखों की शल्य चिकित्सा निशुल्क करवाई गई। उपचार के बाद बच्चे की दृष्टि में सुधार हुआ है तथा उसकी नियमित जांच एवं देखभाल जारी है।
वर्जन
राष्ट्रीय बाल स्वास्थ्य कार्यक्रम के माध्यम से बच्चों के स्वास्थ्य की नियमित जांच, स्वास्थ्य समस्याओं की समय पर पहचान तथा आवश्यक उपचार की सुविधा उपलब्ध करवाने पर जोर दिया जाता है। किसी भी प्रकार की स्वास्थ्य समस्या सामने आने पर नजदीकी स्वास्थ्य केंद्र, स्वास्थ्य विभाग या आरबीएसके टीम से संपर्क करें।-मीनाक्षी यादव, प्रबंधक, डीईआईसी कम आरबीएसके
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लक्ष में दोनों पैरों में क्लब फुट की समस्या सामने आई थी। स्वास्थ्य टीम की पहचान के बाद उसका उपचार शुरू हुआ। प्लास्टर और सुधारात्मक शल्य चिकित्सा के बाद उसे सुधारात्मक जूते भी निशुल्क उपलब्ध कराए गए। वर्तमान में लक्ष की नियमित निगरानी की जा रही है। उपचार के बाद वह अब खड़ा होकर चलना सीख रहा है।
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इसी तरह लविश की दोनों आंखों में जन्मजात मोतियाबिंद की पहचान हुई। समय पर रेफर किए जाने के बाद उसकी दोनों आंखों का ऑपरेशन निशुल्क कराया गया। उपचार के बाद उसकी दृष्टि में सुधार हुआ है। स्वास्थ्य विभाग की ओर से दोनों बच्चों की नियमित जांच और फॉलोअप जारी है।
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इन दोनों मामलों में सामने आया है कि बच्चों की समय पर स्वास्थ्य जांच से समस्याओं की शुरुआती स्तर पर पहचान कर उपचार शुरू किया जा सकता है। आरबीएसके की टीमों के माध्यम से बच्चों तक स्वास्थ्य सेवाएं पहुंचाने की प्रक्रिया जारी है।
प्लास्टर हुआ, ऑपरेशन भी हुआ, अब मिला लक्ष को लाभ
गांव पाली निवासी 10 माह के लक्ष की जांच 5 नवंबर 2025 को राष्ट्रीय बाल स्वास्थ्य कार्यक्रम की मोबाइल स्वास्थ्य टीम ने की थी। इसमें उसके दोनों पैरों में क्लब फुट की पहचान हुई। 8 नवंबर 2025 को उसे नागरिक अस्पताल रेवाड़ी में लाया गया जहां उपचार शुरू हुआ। लक्ष को एक सप्ताह तक कसरत करवाई गई। साप्ताहिक अंतराल पर चार बार प्लास्टर चढ़ाया गया। 27 दिसंबर 2025 को शल्य चिकित्सा की गई। इसके 21 दिन बाद बच्चे को सुधारात्मक जूते निशुल्क उपलब्ध करवाए गए। वर्तमान में लक्ष की नियमित जांच जारी है तथा समस्या दोबारा न हो, इसके लिए पांच वर्ष की आयु तक उसकी निगरानी की जाएगी। उपचार के बाद अब वह खड़ा होकर चलना सीख रहा है।
मोतियाबिंद की पहचान होने पर हुआ लविश का ऑपरेशन
गांव जालियावास डाकघर सुथाना निवासी लविश यादव की 17 जुलाई को राष्ट्रीय बाल स्वास्थ्य कार्यक्रम की मोबाइल स्वास्थ्य टीम ने जांच की। इस दौरान उसकी दोनों आंखों में जन्मजात मोतियाबिंद की पहचान हुई। उसी दिन बच्चे को जिला शीघ्र हस्तक्षेप केंद्र में दिखाया गया और आगे के उपचार के लिए संदर्भित नेत्र चिकित्सालय भेजा गया। इसके बाद लविश की दायीं आंख की शल्य चिकित्सा 28 जुलाई को की गई। इसके बाद बायीं आंख की शल्य चिकित्सा 18 अगस्त को हुई। दोनों आंखों की शल्य चिकित्सा निशुल्क करवाई गई। उपचार के बाद बच्चे की दृष्टि में सुधार हुआ है तथा उसकी नियमित जांच एवं देखभाल जारी है।
वर्जन
राष्ट्रीय बाल स्वास्थ्य कार्यक्रम के माध्यम से बच्चों के स्वास्थ्य की नियमित जांच, स्वास्थ्य समस्याओं की समय पर पहचान तथा आवश्यक उपचार की सुविधा उपलब्ध करवाने पर जोर दिया जाता है। किसी भी प्रकार की स्वास्थ्य समस्या सामने आने पर नजदीकी स्वास्थ्य केंद्र, स्वास्थ्य विभाग या आरबीएसके टीम से संपर्क करें।-मीनाक्षी यादव, प्रबंधक, डीईआईसी कम आरबीएसके

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