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Rewari News: पंप हाउस परियोजना पर उठे सवाल, प्रदूषित पानी साहिबी नदी में मिलने की आशंका
Mon, 06 Jul 2026 11:33 PM IST
रोहतक ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, रेवाड़ी
संवाद न्यूज एजेंसी, रेवाड़ी
Updated Mon, 06 Jul 2026 11:33 PM IST
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मसानी स्थित साहबी बैराज। संवाद
बावल। आईएमटी बावल से साहबी नदी कैचमेंट क्षेत्र तक प्रस्तावित करीब 7.35 करोड़ रुपये की स्टॉर्म वाटर पंप हाउस परियोजना पर पर्यावरण मामलों के याचिकाकर्ता ने गंभीर सवाल उठाए हैं। उन्होंने मुख्यमंत्री, केंद्रीय पर्यावरण मंत्री, केंद्रीय प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड और हरियाणा सरकार को पत्र भेजकर परियोजना पर तत्काल रोक लगाने की मांग की है।
एडवोकेट दयाकिशन खोला, मनोज मसानी, विनय कुमार, हरीश कुमार ने बताया कि आईएमटी बावल के पास बगथला और आसलवास क्षेत्र में करीब 50 एकड़ भूमि पर पिछले डेढ़ दशक से औद्योगिक इकाइयों का रासायनिक मिश्रित पानी भरा है।
उनका कहना है कि प्रस्तावित पंप हाउस के जरिए बारिश के पानी के साथ यह प्रदूषित पानी भी साहिबी नदी कैचमेंट की ओर पहुंच सकता है, जिससे नदी, मसानी बैराज, भूजल स्रोतों और कृषि भूमि पर प्रतिकूल प्रभाव पड़ने की आशंका है।
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उन्होंने दावा किया कि जहरीले पानी के कारण आसपास के गांवों के भूजल पर असर पड़ा है। किसानों की भूमि बंजर हो रही है और लोगों में त्वचा रोग, फ्लोरोसिस सहित जलजनित बीमारियों की शिकायतें बढ़ी हैं।
मांग की है कि परियोजना पर तत्काल रोक लगाई जाए, 50 एकड़ क्षेत्र में जमा पानी और भूजल की जांच किसी राष्ट्रीय प्रयोगशाला या केंद्रीय प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड से कराई जाए तथा पूरे प्रोजेक्ट का स्वतंत्र तकनीकी और पर्यावरणीय ऑडिट कराया जाए।
उन्होंने कहा कि यदि औद्योगिक प्रदूषित पानी को स्टॉर्म वाटर के साथ जोड़ने की योजना सामने आती है तो संबंधित अधिकारियों और औद्योगिक इकाइयों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाए। उन्होंने इसे दक्षिण हरियाणा के पर्यावरण, भूजल, कृषि और जनस्वास्थ्य से जुड़ा गंभीर मुद्दा बताते हुए सरकार से तत्काल हस्तक्षेप की अपील की है।
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एडवोकेट दयाकिशन खोला, मनोज मसानी, विनय कुमार, हरीश कुमार ने बताया कि आईएमटी बावल के पास बगथला और आसलवास क्षेत्र में करीब 50 एकड़ भूमि पर पिछले डेढ़ दशक से औद्योगिक इकाइयों का रासायनिक मिश्रित पानी भरा है।
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उनका कहना है कि प्रस्तावित पंप हाउस के जरिए बारिश के पानी के साथ यह प्रदूषित पानी भी साहिबी नदी कैचमेंट की ओर पहुंच सकता है, जिससे नदी, मसानी बैराज, भूजल स्रोतों और कृषि भूमि पर प्रतिकूल प्रभाव पड़ने की आशंका है।
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उन्होंने दावा किया कि जहरीले पानी के कारण आसपास के गांवों के भूजल पर असर पड़ा है। किसानों की भूमि बंजर हो रही है और लोगों में त्वचा रोग, फ्लोरोसिस सहित जलजनित बीमारियों की शिकायतें बढ़ी हैं।
मांग की है कि परियोजना पर तत्काल रोक लगाई जाए, 50 एकड़ क्षेत्र में जमा पानी और भूजल की जांच किसी राष्ट्रीय प्रयोगशाला या केंद्रीय प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड से कराई जाए तथा पूरे प्रोजेक्ट का स्वतंत्र तकनीकी और पर्यावरणीय ऑडिट कराया जाए।
उन्होंने कहा कि यदि औद्योगिक प्रदूषित पानी को स्टॉर्म वाटर के साथ जोड़ने की योजना सामने आती है तो संबंधित अधिकारियों और औद्योगिक इकाइयों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाए। उन्होंने इसे दक्षिण हरियाणा के पर्यावरण, भूजल, कृषि और जनस्वास्थ्य से जुड़ा गंभीर मुद्दा बताते हुए सरकार से तत्काल हस्तक्षेप की अपील की है।