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Rewari News: कुम्हार दिन-रात बना रहे दीये, बढ़ी मांग से कारोबार में उछाल

Sat, 19 Sep 2026 11:46 PM IST
रोहतक ब्यूरो संवाद न्यूज एजेंसी, रेवाड़ी
संवाद न्यूज एजेंसी, रेवाड़ी Updated Sat, 19 Sep 2026 11:46 PM IST
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Potters making lamps day and night; business surges due to increased demand.
मिट्टी का दीया बनाते कुंभकार। संवाद
रेवाड़ी। दिवाली का त्योहार नजदीक आते ही जिले के कुंभकारों के चाक की रफ्तार बढ़ गई है। घर-घर रोशनी के लिए मिट्टी के दीये, गुल्लक और पारंपरिक खिलौने तैयार किए जा रहे हैं। कुंभकारों को इस बार बेहतर कारोबार की उम्मीद है। दिवाली के लिए करीब दो महीने पहले से ही दीये और अन्य सामान तैयार करने का काम शुरू कर दिया गया था। कुंभकारों के परिवार दिन-रात तैयारियों में जुटे हैं।
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महिलाएं और बच्चे दीये बनाने के साथ उन्हें सुखाने और पकाने में भी सहयोग कर रहे हैं। अब छोटे दुकानदारों ने भी थोक में मिट्टी के दीयों और अन्य सामान की बुकिंग शुरू कर दी है।
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कुंभकारों का कहना है कि लोग बिजली की रंग-बिरंगी झालरों से घर सजाने के साथ मिट्टी के दीये भी जलाते हैं। दिवाली पर मिट्टी के दीये जलाना शुभ माना जाता है। इसके चलते पिछले कुछ वर्षों में पारंपरिक दीयों की मांग में बढ़ोतरी हुई है।
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कुंभकारों का कहना है कि इस बार पिछले वर्ष की तुलना में दीयों के दामों में करीब 15 से 20 फीसदी तक बढ़ोतरी होने की संभावना है। फिलहाल मिट्टी के दीये करीब 200 रुपये सैकड़ा के हिसाब से बिक रहे हैं। उनका कहना है कि मिट्टी और अन्य सामग्री की लागत बढ़ने के बावजूद लोग पारंपरिक दीये खरीदने में रुचि दिखा रहे हैं।

दो महीने पहले शुरू हुई तैयारियां :
भाड़ावास चौक पर मिट्टी के दीये बेचने वाले कृष्ण कुमार ने कहा कि दिवाली पर हर घर मिट्टी के दीयों से रोशन होता है। लोग सजावट के लिए बिजली की लाइटों का भी इस्तेमाल करते हैं, लेकिन मिट्टी के दीयों की मांग हमेशा बनी रहती है। इस बार भी बेहतर कारोबार की उम्मीद है। वहीं, सरोज प्रजापति ने बताया कि मिट्टी की कमी के कारण हर साल दीयों के दाम में करीब 10 से 15 प्रतिशत तक बढ़ोतरी हो रही है। इसके बावजूद मांग में कमी नहीं आती। मौजूदा समय में मिट्टी की व्यवस्था करना भी कुंभकारों के लिए चुनौती बना हुआ है। कई बार समय पर मिट्टी नहीं मिल पाती। बारिश के मौसम में यह परेशानी और बढ़ जाती है।


5 दिन धूप में सुखाकर तैयार होती है दीये की मिट्टी :
शहर के कुतुबपुर मोहल्ले के कुंभकार उमेद प्रजापत बताते हैं कि दीये बनाने के लिए मिट्टी को चार से पांच दिन लगातार धूप में सुखाया जाता है। मिट्टी सूखने के बाद इसे तीन दिन तक लगातार पानी में भिगोकर रखना पड़ता है। इसके बाद मिट्टी दो बार छानी जाती है। इस प्रक्रिया से गुजरने के बाद ही मिट्टी दीये बनने के लिए चाक तक पहुंचती है। इसके बाद लगातार तीन दिन हल्की आंच पर पकने के बाद ही दीये बनकर तैयार होते हैं।
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