{"_id":"67f6b34a1e9c6982b00aa705","slug":"parents-under-the-burden-of-heavy-fees-rewari-news-c-198-1-fth1001-217699-2025-04-09","type":"story","status":"publish","title_hn":"Rewari News: भारी भरकम फीस के बोझ तले अभिभावक","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
Rewari News: भारी भरकम फीस के बोझ तले अभिभावक
विज्ञापन
सर्कुलर रोड स्थित एक कपड़े की दुकान में ड्रैस खरीदने के लिए पहुंचे अभिभावक। संवाद
रेवाड़ी। जिले में संचालित हो रहे निजी विद्यालयों में भारी भरकम फीस, महंगी किताबें और स्कूल ड्रेस के बोझ तले अभिभावक दबते जा रहे हैं। इसके साथ ही अभिभावकों को ड्रेस का दो सेट लेने का भी दबाव बनाया जाता है। सीबीएसई, आईसीएसई सहित एचबीएसई के निजी विद्यालयों में पढ़ने वाले छात्रों को हर साल फीस वृद्धि के साथ यूनिफॉर्म और निजी प्रकाशन की किताबों से अभिभावकों पर दोहरी मार झेलनी पड़ रही है।
विद्यालय में पढ़ रहे बच्चों को विद्यालय से किताबों और ड्रेस खरीदने की लिस्ट पकड़ा दी जा रही है। वहीं, हर साल किताबों और ड्रेस के बदलने से अभिभावक परेशान नजर आ रहे हैं। इसके साथ ही हर बार कक्षा का ड्रेस भी बदल जाने से घर का बजट गड़बड़ा रहा है। कभी ड्रेस, टाई, ब्लेजर तो कभी ट्रैक सूट बदले जाते हैं। हाफ और फुल अलग-अलग ड्रेस का दो सेट लेने का दबाव भी बनाते हैं। लीग की ड्रेस अलग होती है और जूते-मौजे दो कलर के अलग होते हैं। विद्यालय फीस के अलावा स्कूल बैग, कॉपी, किताब व यूनिफाॅर्म की कीमत में खासा वृद्धि हुई है। हर अभिभावक की चाह होती है कि वह अपने बच्चे का दाखिला बेहतर विद्यालय में करवाए पर ऐसे खर्चे देख के परेशान रहते हैं। निजी विद्यालयों सरकार की जारी शिक्षा नीति के मुताबिक एनसीईआरटी पैटर्न को पढ़ाने को तैयार नही है। अभिभावकों ने बताया कि हर साल निजी विद्यालयों में किताबों को साथ ही ड्रेस भी बदली जा रही है।
कॉपी, किताबों व ड्रेस में भारी कमीशन का खेल
कॉपी, किताबों व ड्रेस में भारी कमीशन शहर भर में नए शिक्षा सत्र शुरू होते ही निजी विद्यालयों में महंगी किताबें और फीस वृद्धि से अभिभावक लूटे जा रहे हैं। अभिभावकों का कहना है कि काॅपी, किताब और ड्रेस पर विद्यालयों को भारी कमीशन मिलता है। विद्यालय से ही बच्चों को कॉपी, किताबें देने का जो खेल है उसमें अभिभावक ठगे जा रहे हैं। नर्सरी से आठवीं कक्षा तक स्कूलों की ओर से निजी प्रकाशकों की पुस्तकें पढ़ाई जा रही हैं। इन किताबों को खरीदने वाले अभिभावकों को भारी चपत लगती है। इसमें नर्सरी की किताबों का सेट एक हजार और आठवीं का सेट 6500 से अधिक की पड़ रही है।
विज्ञापन
विज्ञापन
विद्यालय में पढ़ रहे बच्चों को विद्यालय से किताबों और ड्रेस खरीदने की लिस्ट पकड़ा दी जा रही है। वहीं, हर साल किताबों और ड्रेस के बदलने से अभिभावक परेशान नजर आ रहे हैं। इसके साथ ही हर बार कक्षा का ड्रेस भी बदल जाने से घर का बजट गड़बड़ा रहा है। कभी ड्रेस, टाई, ब्लेजर तो कभी ट्रैक सूट बदले जाते हैं। हाफ और फुल अलग-अलग ड्रेस का दो सेट लेने का दबाव भी बनाते हैं। लीग की ड्रेस अलग होती है और जूते-मौजे दो कलर के अलग होते हैं। विद्यालय फीस के अलावा स्कूल बैग, कॉपी, किताब व यूनिफाॅर्म की कीमत में खासा वृद्धि हुई है। हर अभिभावक की चाह होती है कि वह अपने बच्चे का दाखिला बेहतर विद्यालय में करवाए पर ऐसे खर्चे देख के परेशान रहते हैं। निजी विद्यालयों सरकार की जारी शिक्षा नीति के मुताबिक एनसीईआरटी पैटर्न को पढ़ाने को तैयार नही है। अभिभावकों ने बताया कि हर साल निजी विद्यालयों में किताबों को साथ ही ड्रेस भी बदली जा रही है।
विज्ञापन
कॉपी, किताबों व ड्रेस में भारी कमीशन का खेल
कॉपी, किताबों व ड्रेस में भारी कमीशन शहर भर में नए शिक्षा सत्र शुरू होते ही निजी विद्यालयों में महंगी किताबें और फीस वृद्धि से अभिभावक लूटे जा रहे हैं। अभिभावकों का कहना है कि काॅपी, किताब और ड्रेस पर विद्यालयों को भारी कमीशन मिलता है। विद्यालय से ही बच्चों को कॉपी, किताबें देने का जो खेल है उसमें अभिभावक ठगे जा रहे हैं। नर्सरी से आठवीं कक्षा तक स्कूलों की ओर से निजी प्रकाशकों की पुस्तकें पढ़ाई जा रही हैं। इन किताबों को खरीदने वाले अभिभावकों को भारी चपत लगती है। इसमें नर्सरी की किताबों का सेट एक हजार और आठवीं का सेट 6500 से अधिक की पड़ रही है।
विज्ञापन