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Rewari News: दावा 155 का रूट पर दौड़ रहीं महज 130 बसें
Fri, 04 Sep 2026 11:51 PM IST
रोहतक ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, रेवाड़ी
संवाद न्यूज एजेंसी, रेवाड़ी
Updated Fri, 04 Sep 2026 11:51 PM IST
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रेवाड़ी डिपो में अधिकांश बूथों पर खड़ी निजी बसें। संवाद
रेवाड़ी। रेवाड़ी डिपो में बसों की कमी से यात्रियों को परेशानियों का सामना करना पड़ रहा है। परिवहन विभाग ने 155 बसों के संचालन का दावा किया है जबकि हकीकत यह है कि 157 रूटों पर करीब 130 बसें ही दौड़ रही हैं। इससे कई रूटों पर सुबह-शाम मारामारी रहती है। खासतौर से रेवाड़ी, महेंद्रगढ़, नारनौल, बावल, धारूहेड़ा, जयपुर, पटौदी, झज्जर, कोटकासिम आदि रुटों पर निजी बसों का सहारा है।
डिपो के लिए 177 बसों का बेड़ा तय है, लेकिन डिपो के पास उपलब्ध 155 बसों में से 15-20 बसें वर्कशॉप में रखी रहती हैं। ऐसे में महज 120 से 130 बसें ही उपलब्ध रह पाती हैं। डिपो के पास कुल 157 रूटों (परमिट) का अधिकार निर्धारित है। इनमें 96 अंतरराज्यीय व 59 राज्यस्तरीय और 2 सिटी सर्विस के रूट शामिल हैं।
डिपो से प्रतिदिन लगभग 120 रूटों पर बसों के संचालन का दावा किया जा रहा है। वहीं डिपो से हरियाणा रोडवेज के अलावा आरटीए के एसटी परमिट और विभिन्न निजी बस ऑपरेटरों की निजी बसें दिल्ली, गुरुग्राम, जयपुर व अन्य स्थानीय मार्गों पर संचालित होती हैं, जिनकी संख्या समय-सारणी व परमिट के अनुसार बदलती रहती है।
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औद्योगिक नगरी में सुबह व शाम यात्रियों की भारी भीड़ रहती है। बसों की कमी के चलते तय समय पर गंतव्य तक पहुंचने के लिए यात्रियों चुनौतियों का सामना करना पड़ सकता है। विशेषकर विद्यार्थियों, महिलाओं व नौकरी पेशा लोगों को बसों में खड़े होकर सफर करना पड़ रहा है।
इन बसों में भीड़ अधिक रहती है और पैर रखने तक को जगह नहीं होती। हर बस स्टॉप पर बसों को रोककर पशुओं की तरह यात्रियों को ठऊंसकर बैठाया जा रहा है। सरकारी बसों के अभाव में निजी बस संचालक भी समय सारणी की धज्जियां उड़ाकर मनमर्जी करते हैं।
कई बार यह आपस में भी उलझ जाते हैं। इस समय जिले में यातायात व्यवस्था को सुधारने के लिए कोसली डिपो को स्वीकृति मिल चुकी है लेकिन इसका कार्य धीमी गति से चल रहा है।
बेड़ा बढ़ाने के दावा हवाहवाई
प्रदेश सरकार की ओर से रेवाड़ी डिपो को अगस्त में पांच नई इलेक्ट्रिक व दस साधारण बसें देने की योजना थी। यह घोषणा कागजों से धरातल पर नहीं उतर पा रही है। जिले के लोगों के साथ-साथ अन्य पड़ोसी जिलों के लोगों को भी परेशानी हो रही है। बेहतर परिवहन सेवा से क्षेत्र में तेजी से विकास को गति मिलती लेकिन लोगों को जद्दोजहद करनी पड़ रही है। अनेक लोग तो निजी वाहनों के सहारे पहुंच रहे हैं।
वर्जन:
डिपो की ओर से नई बसों के लिए सरकार से पत्राचार किया जा रहा है। अगस्त में पांच इलेक्ट्रिक बसें मिलनी थी। इनकी प्रक्रिया तेजी से चल रही है। कुछ साधारण बसें भी जल्द ही डिपो को मिलने की उम्मीद है। जो बसें तकनीकी खराबी के कारण वर्कशॉप में रहती हैं, उन्हें मरम्मत के बाद रूटों पर उतार दिया जाता है।-निरंजन शर्मा, महा प्रबंधक, राज्य परिवहन डिपो रेवाड़ी।
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डिपो के लिए 177 बसों का बेड़ा तय है, लेकिन डिपो के पास उपलब्ध 155 बसों में से 15-20 बसें वर्कशॉप में रखी रहती हैं। ऐसे में महज 120 से 130 बसें ही उपलब्ध रह पाती हैं। डिपो के पास कुल 157 रूटों (परमिट) का अधिकार निर्धारित है। इनमें 96 अंतरराज्यीय व 59 राज्यस्तरीय और 2 सिटी सर्विस के रूट शामिल हैं।
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डिपो से प्रतिदिन लगभग 120 रूटों पर बसों के संचालन का दावा किया जा रहा है। वहीं डिपो से हरियाणा रोडवेज के अलावा आरटीए के एसटी परमिट और विभिन्न निजी बस ऑपरेटरों की निजी बसें दिल्ली, गुरुग्राम, जयपुर व अन्य स्थानीय मार्गों पर संचालित होती हैं, जिनकी संख्या समय-सारणी व परमिट के अनुसार बदलती रहती है।
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औद्योगिक नगरी में सुबह व शाम यात्रियों की भारी भीड़ रहती है। बसों की कमी के चलते तय समय पर गंतव्य तक पहुंचने के लिए यात्रियों चुनौतियों का सामना करना पड़ सकता है। विशेषकर विद्यार्थियों, महिलाओं व नौकरी पेशा लोगों को बसों में खड़े होकर सफर करना पड़ रहा है।
इन बसों में भीड़ अधिक रहती है और पैर रखने तक को जगह नहीं होती। हर बस स्टॉप पर बसों को रोककर पशुओं की तरह यात्रियों को ठऊंसकर बैठाया जा रहा है। सरकारी बसों के अभाव में निजी बस संचालक भी समय सारणी की धज्जियां उड़ाकर मनमर्जी करते हैं।
कई बार यह आपस में भी उलझ जाते हैं। इस समय जिले में यातायात व्यवस्था को सुधारने के लिए कोसली डिपो को स्वीकृति मिल चुकी है लेकिन इसका कार्य धीमी गति से चल रहा है।
बेड़ा बढ़ाने के दावा हवाहवाई
प्रदेश सरकार की ओर से रेवाड़ी डिपो को अगस्त में पांच नई इलेक्ट्रिक व दस साधारण बसें देने की योजना थी। यह घोषणा कागजों से धरातल पर नहीं उतर पा रही है। जिले के लोगों के साथ-साथ अन्य पड़ोसी जिलों के लोगों को भी परेशानी हो रही है। बेहतर परिवहन सेवा से क्षेत्र में तेजी से विकास को गति मिलती लेकिन लोगों को जद्दोजहद करनी पड़ रही है। अनेक लोग तो निजी वाहनों के सहारे पहुंच रहे हैं।
वर्जन:
डिपो की ओर से नई बसों के लिए सरकार से पत्राचार किया जा रहा है। अगस्त में पांच इलेक्ट्रिक बसें मिलनी थी। इनकी प्रक्रिया तेजी से चल रही है। कुछ साधारण बसें भी जल्द ही डिपो को मिलने की उम्मीद है। जो बसें तकनीकी खराबी के कारण वर्कशॉप में रहती हैं, उन्हें मरम्मत के बाद रूटों पर उतार दिया जाता है।-निरंजन शर्मा, महा प्रबंधक, राज्य परिवहन डिपो रेवाड़ी।

रेवाड़ी डिपो में अधिकांश बूथों पर खड़ी निजी बसें। संवाद

रेवाड़ी डिपो में अधिकांश बूथों पर खड़ी निजी बसें। संवाद