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Rewari News: एनएसएस स्वयंसेवकों ने अभियान चलाकर की गाजर घास की सफाई
Thu, 10 Sep 2026 11:26 PM IST
रोहतक ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, रेवाड़ी
संवाद न्यूज एजेंसी, रेवाड़ी
Updated Thu, 10 Sep 2026 11:26 PM IST
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कृषि महाविद्यालय में घास उन्मूलन अभियान चलाते विद्यार्थी। स्रोत : कॉलेज
बावल। कृषि महाविद्यालय बावल की राष्ट्रीय सेवा योजना (एनएसएस) इकाई की ओर से गाजर घास के दुष्प्रभावों के प्रति जागरूकता और इसके उन्मूलन के लिए विशेष अभियान चलाया गया। सुबह साढ़े 6 बजे शुरू हुए अभियान में एनएसएस स्वयंसेवकों ने महाविद्यालय परिसर, आसपास के क्षेत्र और सभागार परिसर की सफाई कर गाजर घास को हटाया।
अभियान की शुरुआत में स्वयंसेवकों को गाजर घास की पहचान, इसे सुरक्षित तरीके से हटाने और इसके प्रसार को रोकने के उपायों की जानकारी दी गई। इसके बाद स्वयंसेवकों ने परिसर में उगी गाजर घास को हटाकर उसे कंपोस्ट खाद बनाने के लिए एकत्र किया।
महाविद्यालय के प्रधानाचार्य डॉ. सत्यजीत यादव ने कहा कि गाजर घास तेजी से फैलने वाला हानिकारक खरपतवार है। इसके बीज लंबे समय तक मिट्टी में जीवित रह सकते हैं और अनुकूल परिस्थितियों में तेजी से अंकुरित होकर बड़े क्षेत्र में फैल जाते हैं। इसका कृषि उत्पादन के साथ मानव एवं पशु स्वास्थ्य और जैव विविधता पर भी प्रतिकूल प्रभाव पड़ता है।
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उन्होंने एनएसएस स्वयंसेवकों के प्रयासों की सराहना करते हुए कहा कि स्वच्छ और स्वस्थ पर्यावरण के निर्माण के लिए ऐसे अभियान जरूरी हैं। उन्होंने स्वयंसेवकों से भविष्य में भी जनहितकारी गतिविधियों में सक्रिय भागीदारी करने का आह्वान किया।
कार्यक्रम का संयोजन डॉ. रामस्वरूप सुथार और डॉ. प्रवीण शर्मा ने किया। अभियान के अंत में स्वयंसेवकों ने परिसर में स्वच्छता बनाए रखने और आसपास के लोगों को गाजर घास के दुष्प्रभावों के प्रति जागरूक करने का संकल्प लिया।
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अभियान की शुरुआत में स्वयंसेवकों को गाजर घास की पहचान, इसे सुरक्षित तरीके से हटाने और इसके प्रसार को रोकने के उपायों की जानकारी दी गई। इसके बाद स्वयंसेवकों ने परिसर में उगी गाजर घास को हटाकर उसे कंपोस्ट खाद बनाने के लिए एकत्र किया।
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महाविद्यालय के प्रधानाचार्य डॉ. सत्यजीत यादव ने कहा कि गाजर घास तेजी से फैलने वाला हानिकारक खरपतवार है। इसके बीज लंबे समय तक मिट्टी में जीवित रह सकते हैं और अनुकूल परिस्थितियों में तेजी से अंकुरित होकर बड़े क्षेत्र में फैल जाते हैं। इसका कृषि उत्पादन के साथ मानव एवं पशु स्वास्थ्य और जैव विविधता पर भी प्रतिकूल प्रभाव पड़ता है।
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उन्होंने एनएसएस स्वयंसेवकों के प्रयासों की सराहना करते हुए कहा कि स्वच्छ और स्वस्थ पर्यावरण के निर्माण के लिए ऐसे अभियान जरूरी हैं। उन्होंने स्वयंसेवकों से भविष्य में भी जनहितकारी गतिविधियों में सक्रिय भागीदारी करने का आह्वान किया।
कार्यक्रम का संयोजन डॉ. रामस्वरूप सुथार और डॉ. प्रवीण शर्मा ने किया। अभियान के अंत में स्वयंसेवकों ने परिसर में स्वच्छता बनाए रखने और आसपास के लोगों को गाजर घास के दुष्प्रभावों के प्रति जागरूक करने का संकल्प लिया।