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कंपनियों की मनमानी से भू-जल हुआ दूषित, एनजीटी ने 12 फरवरी को पेश होने का दिया आदेश

Wed, 29 Jan 2020 12:27 AM IST
Rohtak Bureau रोहतक ब्यूरो
Updated Wed, 29 Jan 2020 12:27 AM IST
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NGT given summan to Government on poluted water in Dharuheda Industrial Area
कंपनी द्वारा छोड़ा गया दूषित पानी। - फोटो : Rewari
बावल औद्योगिक क्षेत्र की कंपनियों द्वारा बोरवेल कर जमीन में पानी छोड़े जाने के मामले में आठ माह पूर्व चिराहड़ा गांव के लोगों को स्वच्छ पेयजल मुहैया कराने के आदेशों की अवहेलना करने पर एनजीटी ने केंद्र व प्रदेश सरकार को कड़ी फटकार लगाते हुए 12 फरवरी को कोर्ट में पेश होने के आदेश जारी किए हैं।
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यहां बता दें कि ग्रामीण रघुनाथ ने एनजीटी में शिकायत देकर कहा गया था कि बावल औद्योगिक क्षेत्र स्थित कुछ कंपनियां अवैध रूप से बोरवेल कर जमीन के अंदर केमिकल युक्त पानी छोड़ रही हैं। इससे आसपास के गांव का भूजल दूषित हो रहा है। एनजीटी के आदेश पर हुई जांच में ऐसा पाया भी गया। इस पर एनजीटी ने 13 मई 2019 को अवैध बोरवेल बंद कर ग्रामीणों को शुद्ध पेयजल मुहैया कराने के आदेश दिए थे। लेकिन अधिकारियों की ओर से ग्रामीणों को शुद्ध पानी मुहैया कराने की दिशा में कोई काम नहीं किया गया। इस पर ग्रामीण द्वारा आदेशों की अवहेलना किए जाने पर दोबारा एनजीटी कोर्ट में अपील की गई। एनजीटी ने 27 जनवरी को इस पर सुनवाई करते हुए केंद्र व प्रदेश सरकार के साथ ही प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड व भूजल प्राधिकरण को दस्ती आदेश जारी कर 12 फरवरी को कोर्ट में पेश होने के आदेश दिए हैं।
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धारूहेड़ा में हालात चिंताजनक, नोटिस तक कार्रवाई
औद्योगिक इकाइयों से निकले वाले केमिकल युक्त पानी का मामला बावल तक सीमित नहीं है। यह मसला धारूहेड़ा व भिवाड़ी में इससे भी ज्यादा चिंताजनक है। धारूहेड़ा व भिवाड़ी की कंपनियों से निकलने वाला दूषित पानी कुछ औद्योगिक इकाइयों द्वारा बोरवेल कर जमीन के अंदर छोड़ा जा रहा है। वहीं कुछ जगहों पर कई एकड़ में ये गंदा पानी भरा हुआ है। यहां का मामला भी एनजीटी तक पहुंचा है, लेकिन समाधान आज तक नहीं हो पाया है।
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जिले में भू-जल मानीटरिंग के लिए अधिकारी तक नहीं
भू-जल स्तर की मानीटरिंग के लिए प्रत्येक जिले में एक जियोलॉजिस्ट होता है। लेकिन रेवाड़ी में कोई अधिकारी तैनात नहीं है। नारनौल स्थित अधिकारी की ओर से मानीटरिंग की खानापूर्ति की जाती है। बता दें कि जिला का खोल ब्लॉक पहले ही डार्क जोन में है। हालात अन्य ब्लॉक भी कुछ ज्यादा अच्छे नहीं है। ऐसे में समय पर ध्यान नहीं दिया गया तो हालात और बिगड़ सकते हैं।
भूजल का टीडीएस 500 के पार
पीने योग्य पानी में टोटल डिजोल्व सॉल्वेंट (टीडीएस) की मात्रा 500 मिलीग्राम प्रतिलीटर से अधिक नहीं होनी चाहिए। लेकिन शहर से लेकर ग्रामीण क्षेत्रों का हाल ऐसा है कि टीडीएस की मात्रा 2500-3000 हजार तक है। टीडीएस की अधिकता के कारण ही पानी को खारा या नमकीन कहा जाता है। कुछ जगहों पर भूजल में बैक्टीरिया भी पाया गया है। बीते दिनों शुगर ठीक करने वाले पानी की अफवाह के बाद जांच में यह बात सामने भी आ चुकी है।
रघुनाथ बोले- अधिकारियों की अनदेखी के बाद दोबार गए एनजीटी कोर्ट
इस संबंध में गांव चिराहड़ा निवासी रघुनाथ सिंह ने नेशनल ग्रीन ट्रिब्युनल का दरवाजा खटखटाया। रघुनाथ ने अपनी शिकायत में दूषित पेयजल व भूजल खराब होने के आरोप लगाए थे। एनजीटी ने शिकायत पर संज्ञान लेते हुए जांच के बाद ग्रामीणों को शुद्ध पेयजल मुहैया कराएं जाने के आदेश दिए। रघुनाथ ने बताया कि आदेशों के बाद भी कोई कार्रवाई नहीं होने पर आदेशों की अवहेलना को लेकर एनजीटी कोर्ट में अपील की थी।

12 फरवरी को कोर्ट में पेश होने के दस्ती आदेश : अधिवक्ता
दिल्ली हाईकोर्ट के अधिवक्ता सुरेंद्र सिंह शेखावत व रणजीत शर्मा ने बताया कि एनजीटी ने 13 मई को ग्रामीणों को शुद्ध पेयजल उपलब्ध कराए जाने के आदेश दिए थे, लेकिन इस पर कोई कार्रवाई नहीं हुई। उसके बाद मुवक्किल की तरफ से आदेशों की अवहेलना को लेकर अपील की थी। जिस पर कोर्ट ने केंद्र व प्रदेश सरकार के साथ ही दो विभागों को कड़ी फटकार लगाते हुए 12 फरवरी केे कोर्ट में पेश होने के आदेश जारी किए गए हैं।
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