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जीवन शैली में बदलाव से होती हैं अधिकतर बीमारियां : डॉ. रामनारायण
Sun, 30 Mar 2025 12:18 AM IST
रोहतक ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, रेवाड़ी
संवाद न्यूज एजेंसी, रेवाड़ी
Updated Sun, 30 Mar 2025 12:18 AM IST
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फोटो : 11कार्यक्रम में एक मंच पर आए मुख्य वक्ताडॉ. रामनारायण मिश्रा साथ में विद्यार्थी व स्
संवाद न्यूज एजेंसी
रेवाड़ी। इंदिरा गांधी विश्वविद्यालय में योग विभाग की तरफ से साप्ताहिक राष्ट्रीय कार्यशाला का समापन हुआ। मुख्य वक्ता डॉ. रामनारायण मिश्रा रिसर्च ऑफिसर रहे।
विश्वविद्यालय के कुलपति प्रोफेसर जेपी यादव, कुलसचिव प्रोफेसर दिलबाग सिंह ने दीप प्रज्वलन कर कार्यक्रम की शुरुआत की। मुख्य वक्ता डॉ. रामनारायण मिश्रा ने कहा कि वर्तमान समय में 70% से अधिक बीमारियां संक्रामक न होकर जीवनशैली और आहार में बदलाव के कारण उत्पन्न हो रही हैं। इसके अतिरिक्त, बाजारों में मिलावट करने वाले खाद्य पदार्थ स्वास्थ्य पर प्रतिकूल प्रभाव डालते हैं। उन्होंने योग, प्राणायाम और ध्यान की प्रक्रिया के माध्यम से इन रोगों से बचाव के उपायों पर भी चर्चा की।
कुलपति प्रोफेसर जेपी. यादव ने योग विभाग को साप्ताहिक कार्यशाला के सफल आयोजन के लिए बधाई दी और भविष्य में इसी प्रकार के कार्यक्रमों के आयोजन हेतु विश्वविद्यालय का सहयोग देने का आश्वासन दिया। उन्होंने योग विभाग को प्राकृतिक चिकित्सा केंद्र स्थापित करने के लिए प्रेरित किया।
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कुलसचिव प्रोफेसर दिलबाग सिंह ने योग को भारतीय संस्कृति का अभिन्न हिस्सा बताते हुए कहा कि प्राचीन काल में लोग नियमित रूप से योगाभ्यास करते थे, जिससे उनकी जीवन अवधि अधिक थी। उन्होंने कहा कि आज के समय में हमें अपनी पुरानी परंपराओं से जुड़कर स्वस्थ जीवन की ओर बढ़ना चाहिए।
योग विभाग की अध्यक्ष प्रोफेसर मंजू परूथी ने कार्यशाला के आयोजन के लिए बधाई दी और कहा कि स्वस्थ जीवन के लिए योग अत्यंत महत्वपूर्ण है। प्रोफेसर एन.पी. गिरी ने कार्यशाला की साप्ताहिक रूपरेखा प्रस्तुत की।
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रेवाड़ी। इंदिरा गांधी विश्वविद्यालय में योग विभाग की तरफ से साप्ताहिक राष्ट्रीय कार्यशाला का समापन हुआ। मुख्य वक्ता डॉ. रामनारायण मिश्रा रिसर्च ऑफिसर रहे।
विश्वविद्यालय के कुलपति प्रोफेसर जेपी यादव, कुलसचिव प्रोफेसर दिलबाग सिंह ने दीप प्रज्वलन कर कार्यक्रम की शुरुआत की। मुख्य वक्ता डॉ. रामनारायण मिश्रा ने कहा कि वर्तमान समय में 70% से अधिक बीमारियां संक्रामक न होकर जीवनशैली और आहार में बदलाव के कारण उत्पन्न हो रही हैं। इसके अतिरिक्त, बाजारों में मिलावट करने वाले खाद्य पदार्थ स्वास्थ्य पर प्रतिकूल प्रभाव डालते हैं। उन्होंने योग, प्राणायाम और ध्यान की प्रक्रिया के माध्यम से इन रोगों से बचाव के उपायों पर भी चर्चा की।
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कुलपति प्रोफेसर जेपी. यादव ने योग विभाग को साप्ताहिक कार्यशाला के सफल आयोजन के लिए बधाई दी और भविष्य में इसी प्रकार के कार्यक्रमों के आयोजन हेतु विश्वविद्यालय का सहयोग देने का आश्वासन दिया। उन्होंने योग विभाग को प्राकृतिक चिकित्सा केंद्र स्थापित करने के लिए प्रेरित किया।
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कुलसचिव प्रोफेसर दिलबाग सिंह ने योग को भारतीय संस्कृति का अभिन्न हिस्सा बताते हुए कहा कि प्राचीन काल में लोग नियमित रूप से योगाभ्यास करते थे, जिससे उनकी जीवन अवधि अधिक थी। उन्होंने कहा कि आज के समय में हमें अपनी पुरानी परंपराओं से जुड़कर स्वस्थ जीवन की ओर बढ़ना चाहिए।
योग विभाग की अध्यक्ष प्रोफेसर मंजू परूथी ने कार्यशाला के आयोजन के लिए बधाई दी और कहा कि स्वस्थ जीवन के लिए योग अत्यंत महत्वपूर्ण है। प्रोफेसर एन.पी. गिरी ने कार्यशाला की साप्ताहिक रूपरेखा प्रस्तुत की।