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लंपी चर्म रोग वायरस : दो नए केस मिले, 147 गोवंश प्रभावित, 14 रोग मुक्त
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रेवाड़ी। जिले में लंपी चर्म रोग वायरस के प्रभावित गोवंशों की संख्या लगातार बढ़ रही है। इसके पीछे राजस्थान से आए घुमंतु जाति के लोगों के गोधन को मुख्य वजह माना जा रहा है। सोमवार की देर शाम तक जिले में वायरस की चपेट में बावल क्षेत्र के रानौली पशु अस्ताल के तहत नए दो गोवंशों की पहचान हुई। अब तक कुल 147 गोवंशों के इस रोग से ग्रस्त होने की पुष्टि हुई है।
गत सप्ताह 3 गोशालाओं में 5 संक्रमित गोवंश मिले थे। अब तक जिले में 3 गोवंशों की रोग के कारण मौत हो चुकी है। राहत भरी खबर यह है कि इस जिले के गांवों के बाद अब पशुपालन विभाग ने लंपी चर्म रोग वायरस से बचाव के लिए गोवंशों को टीके लगाने के लिए ढाणियों का रुख कर दिया है। जिले में अब तक 39056 गोवंशों का टीकाकरण हो चुका है, जबकि जिले में अभी 900 टीके उपलब्ध हैं।
उधर जिले में तीन माह से कम आयु के करीब 4 हजार गोवंश हैं, जिन्हें यह टीका नहीं लगेगा। पशुपालन विभाग के अनुसार जिले में कुल 40 हजार गोवंशों हैं, जिनको टीकाकरण के लिए लक्षित किया गया है। विभागीय तौर पर 14 चिकित्सीय टीमें टीकाकरण कार्य में जुटी हैं।
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कौट
- लंपी वायरस से गोवंश को बचाने हम शत प्रतिशत टीकाकरण के लक्ष्य के नजदीक हैं। इस रोग से जिले में कुछ मौतें हुई हैं। 14 गोवंश ठीक हुए हैं। अब तक 39 हजार से अधिक गोवंशों का टीकाकरण हो गया है। अब ढाणियों में यह काम हो रहा है। करीब 900 टीके हमारे पास मौजूद हैं। हम बेहतर प्रयास कर रहे हैं।
- डॉ राजबीर सिंह यादव, एसडीओ पशुपालन विभाग, रेवाड़ी।
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गत सप्ताह 3 गोशालाओं में 5 संक्रमित गोवंश मिले थे। अब तक जिले में 3 गोवंशों की रोग के कारण मौत हो चुकी है। राहत भरी खबर यह है कि इस जिले के गांवों के बाद अब पशुपालन विभाग ने लंपी चर्म रोग वायरस से बचाव के लिए गोवंशों को टीके लगाने के लिए ढाणियों का रुख कर दिया है। जिले में अब तक 39056 गोवंशों का टीकाकरण हो चुका है, जबकि जिले में अभी 900 टीके उपलब्ध हैं।
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उधर जिले में तीन माह से कम आयु के करीब 4 हजार गोवंश हैं, जिन्हें यह टीका नहीं लगेगा। पशुपालन विभाग के अनुसार जिले में कुल 40 हजार गोवंशों हैं, जिनको टीकाकरण के लिए लक्षित किया गया है। विभागीय तौर पर 14 चिकित्सीय टीमें टीकाकरण कार्य में जुटी हैं।
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कौट
- लंपी वायरस से गोवंश को बचाने हम शत प्रतिशत टीकाकरण के लक्ष्य के नजदीक हैं। इस रोग से जिले में कुछ मौतें हुई हैं। 14 गोवंश ठीक हुए हैं। अब तक 39 हजार से अधिक गोवंशों का टीकाकरण हो गया है। अब ढाणियों में यह काम हो रहा है। करीब 900 टीके हमारे पास मौजूद हैं। हम बेहतर प्रयास कर रहे हैं।
- डॉ राजबीर सिंह यादव, एसडीओ पशुपालन विभाग, रेवाड़ी।